मराठी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री मधु कांबीकर का निधन, नाना पाटेकर की मां बनकर मिली थी खास पहचान!

पुणे। मराठी सिनेमा की अनुभवी अभिनेत्री मधु कांबीकर के निधन से फिल्म जगत ने अपनी एक खास कलाकार को खो दिया है। 73 वर्षीय मधु ने पुणे में अंतिम सांस ली। वह लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रही थीं। अपने अभिनय के साथ-साथ वह पारंपरिक मराठी लोकनृत्य लावणी के लिए भी जानी जाती थीं। उन्होंने अपने करियर में फिल्मों, रंगमंच, व्यावसायिक थिएटर और टीवी कार्यक्रमों में काम किया। हिंदी फिल्मों में भी उन्होंने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद प्रशंसकों और सिनेमा से जुड़े लोगों के बीच शोक का माहौल है।
मंच से शुरू हुआ था अभिनय का सफर
मधु कांबीकर का जन्म 28 जुलाई 1953 को महाराष्ट्र के बीड जिले के मालेगांव खुर्द में हुआ था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत मंच पर कार्यक्रमों से की और धीरे-धीरे फिल्मों की दुनिया में अपनी जगह बनाई। उनकी अभिनय शैली में सादगी और भावनाओं की गहराई दिखाई देती थी। मराठी फिल्मों के अलावा उन्होंने लोकनाट्य, थिएटर और टीवी कार्यक्रमों में भी काम किया। फिल्म ‘शापित’ से उन्हें खास पहचान मिली, जिसे निर्देशक राजदत्त ने बनाया था। समय के साथ वह मराठी सिनेमा की जानी-पहचानी कलाकार बन गईं।
नाना पाटेकर की मां बनकर मिली खास पहचान
मधु कांबीकर ने अपने लंबे करियर में कई यादगार किरदार निभाए। मराठी फिल्मों में उन्हें अक्सर मां और सास जैसी भूमिकाओं में देखा गया। फिल्म ‘यशवंत’ में उन्होंने नाना पाटेकर की मां का किरदार निभाया था। इस भूमिका के कारण हिंदी सिनेमा के दर्शकों के बीच भी उनकी चर्चा हुई। इसके अलावा उन्होंने गोविंदा और दिव्या भारती की फिल्म ‘शोला और शबनम’ में भी काम किया। अलग-अलग तरह के किरदारों को सहजता से निभाना उनकी खासियत रही।
लावणी के मंच पर भी बिखेरा हुनर
अभिनय के साथ मधु कांबीकर की पहचान मराठी लोकनृत्य लावणी से भी जुड़ी रही। वह इस पारंपरिक कला को मंच पर पेश करने के लिए जानी जाती थीं। साल 2016 में एक कार्यक्रम के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आई थी। बताया गया कि लंबे अंतराल के बाद मंच पर प्रस्तुति देते समय उन्हें परेशानी हुई और बाद में उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। इस घटना के बाद उनकी सेहत पर असर पड़ा और धीरे-धीरे उन्हें अभिनय से दूरी बनानी पड़ी।
सम्मान से नवाजी गईं मधु कांबीकर
मराठी सिनेमा और लोककला में योगदान के लिए मधु कांबीकर को सम्मानित भी किया गया था। उन्हें जी चित्र गौरव पुरस्कार समारोह में लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया गया। स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के कारण वह खुद समारोह में शामिल नहीं हो सकीं। उनकी बेटी शीतल जाधव ने उनकी ओर से यह सम्मान स्वीकार किया था। मधु कांबीकर का करियर उन कलाकारों की मिसाल है, जिन्होंने मंच, फिल्मों और लोककला के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई। उनके निधन से मराठी मनोरंजन जगत में एक महत्वपूर्ण स्थान खाली हो गया है।




















