मणिपुर की आज सुबह कंपन से शुरू हुई। मंगलवार तड़के धरती अचानक हिल उठी और लोग डर के मारे घरों से बाहर निकल आए।
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, भूकंप की तीव्रता 5.2 मापी गई। इसका केंद्र कामजोंग इलाके में था और गहराई करीब 62 किलोमीटर बताई गई है। राहत की बात यह है कि अब तक किसी बड़े जान-माल के नुकसान की खबर नहीं मिली है, लेकिन लोगों के मन में डर जरूर बैठ गया है।
भूकंप मंगलवार सुबह करीब 5 बजकर 59 मिनट पर आया। उस समय ज्यादातर लोग सो रहे थे, इसलिए अचानक आए झटकों से घबराहट और ज्यादा बढ़ गई। मणिपुर के अलावा नागालैंड, असम और मेघालय में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। कई जगहों पर लोग तुरंत घरों से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागे। हालांकि, प्रशासन ने बताया कि स्थिति नियंत्रण में है और किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।
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सुबह के वक्त जब धरती हिली, तो लोगों को कुछ समझ नहीं आया। कुछ लोग नींद से जागते ही घर से बाहर भागे, तो कुछ ने खुले मैदानों का सहारा लिया। कई इलाकों में लोग काफी देर तक घरों के बाहर ही खड़े रहे, क्योंकि उन्हें दोबारा झटके आने का डर था। ऐसे हालात में प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की है।
भूकंप ऐसे समय आया है जब मणिपुर पहले से ही तनावपूर्ण दौर से गुजर रहा है। राज्य में पिछले कुछ समय से हिंसा, विरोध प्रदर्शन और बंद का सिलसिला जारी है। इस महीने की शुरुआत में संदिग्ध उपद्रवियों द्वारा दो बच्चों और कुछ अन्य लोगों की हत्या के बाद हालात और बिगड़ गए। इस घटना के विरोध में कई संगठनों ने बंद का आह्वान किया।
सोमवार को भी मणिपुर के कई पहाड़ी और घाटी जिलों में बंद का असर देखा गया। स्कूल, कॉलेज, बाजार और सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह बंद रहे, जिससे आम लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
मैतेई समुदाय बहुल घाटी के पांचों जिलों के साथ-साथ नागा बहुल उखरुल और सेनापति जिलों में भी जनजीवन पूरी तरह ठप रहा। सड़कें सूनी रहीं, बाजार बंद रहे और लोग जरूरी कामों के लिए भी बाहर नहीं निकल पाए। इस स्थिति ने पहले से परेशान लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
राजधानी इम्फाल में भी हालात शांत नहीं हैं। उरीपोक और नागरम जैसे इलाकों में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किए। महिलाओं के समूह ‘मीरा पैबिस’ ने बिष्णुपुर जिले में हुए बम हमले के खिलाफ पांच दिन के बंद का ऐलान किया है। यह बंद रविवार से शुरू हुआ और इसका असर पूरे राज्य में देखने को मिल रहा है।
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7 अप्रैल को बिष्णुपुर जिले के ट्रोंगलाओबी इलाके में एक बम हमला हुआ था। इस हमले में एक पांच साल के बच्चे और उसकी छह महीने की बहन की मौत हो गई थी, जबकि उनकी मां घायल हो गई थी। इस घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया। लोगों में गुस्सा बढ़ गया और विरोध प्रदर्शन तेज हो गए। बाद में ये प्रदर्शन हिंसक हो गए, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई और करीब 30 लोग घायल हो गए।