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महाफर्जीवाड़ा :23 साल तक 'साहब' बनकर डकार गए 1.5 करोड़, MP के इस अफसर से पाई-पाई वसूलेगी सरकार

मध्य प्रदेश राज्य बीज एवं फार्म विकास निगम के सहायक प्रबंधक लाल सिंह की सेवा समाप्त। फर्जी जाति और निवास प्रमाण पत्र के आधार पर 2002 से कर रहे थे नौकरी। शासन वसूलेगा ₹1.5 करोड़ का वेतन। पढ़ें पूरी रिपोर्ट और जानें ग्वालियर के किस व्यक्ति के दस्तावेज का हुआ था गलत इस्तेमाल।
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23 साल तक 'साहब' बनकर डकार गए 1.5 करोड़, MP के इस अफसर से पाई-पाई वसूलेगी सरकार
23 साल से फर्जी प्रमाण जाति पत्र पर नौकरी
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी तंत्र में जालसाजी और धोखाधड़ी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने विभाग की पूरी सुरक्षा और जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मध्य प्रदेश राज्य बीज एवं फार्म विकास निगम में पिछले 23 सालों से सहायक प्रबंधक के पद पर काबिज लाल सिंह की नौकरी अंततः खत्म कर दी गई है। यह कार्रवाई फर्जी दस्तावेजों और कूटरचित प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी हासिल करने के गंभीर आरोप सिद्ध होने के बाद की गई है।

    धोखाधड़ी की नींव: 2002 से चल रहा था खेल

    मामले की जड़ें साल 2002 में जाती हैं, जब प्रदेश में विशेष भर्ती अभियान के तहत लाल सिंह की नियुक्ति सहायक प्रबंधक के पद पर हुई थी। आरोप है कि मूल रूप से उत्तर प्रदेश के झांसी निवासी लाल सिंह ने मध्य प्रदेश का फर्जी निवास और फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाकर न केवल सिस्टम को चकमा दिया, बल्कि एक पात्र उम्मीदवार का हक भी छीन लिया।  दो दशकों से अधिक समय तक साहब बनकर विभाग में मलाई काटने वाले इस अफसर की पोल तब खुली जब आरटीआई (RTI) के जरिए उनके दस्तावेजों की पड़ताल की गई।

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    किसी और के सर्टिफिकेट पर बना मैनेजर

    जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं हैं। लाल सिंह ने जिस प्रकरण क्रमांक 2296 (दिनांक 19 अगस्त 2003) का जाति प्रमाण पत्र विभाग में जमा किया था, वह असल में उनके नाम पर था ही नहीं। 

    रिकॉर्ड की हेराफेरी:  सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, वह सर्टिफिकेट ग्वालियर के गोपालपुरा निवासी चंद्र किशोर यादव को आवंटित किया गया था। पहचान का इस्तेमाल लाल सिंह ने दूसरे व्यक्ति के नाम पर जारी प्रमाण पत्र में हेरफेर कर उसे अपना बताकर सरकारी नौकरी हथिया ली।

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    पाई-पाई का हिसाब: 1.5 करोड़ की वसूली का आदेश

    विभाग के प्रबंध संचालक (MD) ने 24 मार्च को कड़ा फैसला सुनाते हुए लाल सिंह की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि लाल सिंह ने 23 साल की नौकरी के दौरान वेतन और भत्तों के रूप में सरकार से लगभग 1.55 करोड़ रुपए लिए हैं। विभाग ने इस पूरी राशि की वसूली (Recovery)की सिफारिश की है। आरोपी के खिलाफ जालसाजी और सरकारी रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ करने के जुर्म में FIR दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।

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    बचाव में नहीं मिला कोई ठोस आधार

    कार्रवाई से पहले विभाग ने लाल सिंह को अपना पक्ष रखने के लिए कई बार नोटिस जारी किए और उनसे मूल दस्तावेज (Original Documents) पेश करने को कहा। हालांकि, आरोपी अधिकारी ने हर बार बहानेबाजी की और कभी भी असली कागजात विभाग के सामने नहीं रखे। साक्ष्यों के अभाव और दस्तावेजों के फर्जी पाए जाने पर उनकी बर्खास्तगी का अंतिम आदेश जारी कर दिया गया।

    Sona Rajput
    By Sona Rajput

    माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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