🌤️
--Bhopal, India

PlayBreaking News

पाखंड नहीं, सच्चे भाव से करें शिव की आराधना: कुबेरेश्वरधाम से पंडित प्रदीप मिश्रा का भावपूर्ण संदेश

कुबेरेश्वरधाम से पंडित प्रदीप मिश्रा ने शिव की आराधना पाखंड से नहीं, बल्कि सच्चे और शुद्ध भाव से करने का महत्वपूर्ण संदेश दिया है। इस लेख में विस्तार से जानें कि कैसे आप अपनी भक्ति को वास्तविक अर्थों में महादेव को समर्पित कर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
Follow on Google News
पाखंड नहीं, सच्चे भाव से करें शिव की आराधना: कुबेरेश्वरधाम से पंडित प्रदीप मिश्रा का भावपूर्ण संदेश
हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज रहा पूरा मार्ग, श्री कांवड़ शिव महापुराण का हुआ समापन।

सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिला मुख्यालय के समीप स्थित कुबेरेश्वरधाम से प्रसारित पांच दिवसीय ऑनलाइन श्री कांवड़ शिव महापुराण का शुक्रवार सुबह सादगीपूर्ण वातावरण में समापन हो गया। कथा भले ही पूर्ण हो गई हो, लेकिन भगवान शिव के प्रति श्रद्धा, विश्वास और भक्ति का प्रवाह अब भी लाखों श्रद्धालुओं के हृदय में निरंतर बह रहा है। 3 अगस्त से 7 अगस्त तक चली इस कथा में देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं ने घर बैठे टीवी और सोशल मीडिया के माध्यम से कथा का श्रवण कर शिवभक्ति का पुण्य लाभ प्राप्त किया। कथा के अंतिम दिन भी श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और भावनात्मक जुड़ाव देखने को मिला।

घर-घर तक पहुंचा शिवमहापुराण का दिव्य संदेश

पांच दिनों तक चली ऑनलाइन कथा ने तकनीक और आस्था का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। दूर-दराज के गांवों से लेकर महानगरों तक लाखों श्रद्धालु अपने घरों में बैठकर कथा से जुड़े रहे। भगवान शिव की महिमा, धर्म, सेवा और संस्कारों का संदेश डिजिटल माध्यम से जन-जन तक पहुंचा। कथा के समापन अवसर पर भी श्रद्धालुओं ने पूरे श्रद्धाभाव से कथा का श्रवण कर भगवान शिव का स्मरण किया और परिवार सहित आरती में भाग लिया।

/img/404/1786107373402

अडंबर और पाखंड से दूर रहें, सच्चे मन से करें भगवान का जाप

अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने अपने उद्बोधन में कहा कि भगवान शिव अत्यंत भोले हैं और वे केवल सच्चे भाव से की गई भक्ति को स्वीकार करते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि दिखावे, आडंबर और पाखंड में उलझने के बजाय भगवान का निरंतर स्मरण करें। यदि मन में श्रद्धा और विश्वास है तो एक लोटा जल अर्पित करना भी भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए पर्याप्त है। उन्होंने कहा कि भक्ति का मूल्य बाहरी प्रदर्शन नहीं बल्कि मन की पवित्रता और समर्पण से तय होता है।

/img/404/1786107636976

कांवड़ यात्रा केवल परंपरा नहीं, शिव और शक्ति का प्रतीक है

पंडित प्रदीप मिश्रा ने सावन मास में निकल रही कांवड़ यात्राओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कांवड़ यात्रा शिव और शक्ति का जीवंत प्रतीक है। जो श्रद्धालु कांवड़ लेकर भगवान शिव के धाम की ओर बढ़ रहे हैं और जो लोग मार्ग में उनकी सेवा कर रहे हैं, दोनों ही भगवान की सेवा का पुण्य प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भगवान अपने भक्तों को कभी खाली हाथ नहीं लौटाते। श्रद्धा से किया गया सेवा कार्य जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।

ये भी पढ़ें: सीहोर से 'महाकाल' तक 160 किमी की पदयात्रा शुरू, अच्छी बारिश और जनकल्याण की कामना लेकर निकले शिवभक्त

श्रेष्ठ धर्म है राष्ट्र, समाज और मानवता की सेवा

कथा के दौरान पंडित मिश्रा ने स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण परमहंस का प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि श्रेष्ठ कर्म वही है जिसमें व्यक्ति अपने धर्म, राष्ट्र और समाज की सेवा पूरे समर्पण से करे। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में रहते हुए उसकी आलोचना करना उचित नहीं है। मनुष्य को दूसरों में दोष ढूंढने के बजाय पहले स्वयं का आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब हम किसी पर एक उंगली उठाते हैं तो तीन उंगलियां हमारी ओर होती हैं, इसलिए पहले स्वयं को सुधारने का प्रयास करें।

ये भी पढ़ें: विदिशा में झाड़ियों में मिली मासूम, दूध की बोतल मुंह में लगाकर छोड़ गई मां; एसपी रोहित काशवानी ने दिखाई इंसानियत

सीवन नदी से कुबेरेश्वरधाम तक सेवा और श्रद्धा का अनूठा संगम

ऑनलाइन कथा के समापन के बाद भी सावन मास में सीवन नदी तट से कुबेरेश्वरधाम तक श्रद्धालुओं की आस्था यात्रा निरंतर जारी है। प्रतिदिन हजारों कांवड़ यात्री पवित्र जल लेकर भगवान शिव का अभिषेक करने पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जिला प्रशासन, विठलेश सेवा समिति तथा अनेक सामाजिक संगठन पूरे मार्ग में पेयजल, चाय, नाश्ता, फलाहार, खिचड़ी और भोजन प्रसादी की नि:शुल्क व्यवस्था कर रहे हैं। सेवा पंडालों में सेवादार पूरे समर्पण के साथ यात्रियों की सेवा में जुटे हैं।

हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज रहा पूरा मार्ग

सीवन नदी तट से लेकर कुबेरेश्वरधाम तक पूरे मार्ग पर "हर-हर महादेव" और "श्री शिवाय नमस्तुभ्यं" के जयघोष वातावरण को शिवमय बना रहे हैं। श्रद्धालुओं के चेहरों पर आस्था, सेवा और समर्पण का अद्भुत भाव दिखाई दे रहा है। 

Sunil Sharma
By Sunil Sharma

पत्रकारिता मेरे लिए केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज की आवाज़ को सच और संवेदनशीलता के साथ उठाने का संकल्प ...Read More

icon

Latest Posts