UCC:यूसीसी लागू करने की तैयारी में मध्यप्रदेश, दिल्ली में होगी कमेटी की पहली बैठक

मध्यप्रदेश। यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता को लेकर सरकार ने अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है। इस दिशा में गठित उच्च स्तरीय समिति ने अपना काम शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है। समिति की पहली बैठक दिल्ली स्थित मध्यप्रदेश भवन में होने जा रही है, जहां यूसीसी से जुड़े कानूनी और सामाजिक पहलुओं पर गहराई से चर्चा होगी। सरकार का उद्देश्य एक ऐसा समान कानून ढांचा तैयार करना है जो सभी नागरिकों के लिए एक जैसा हो और विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों के बीच संतुलन स्थापित कर सके।
समिति की पहली बैठक से शुरू हुआ नया चरण
मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लागू करने की दिशा में सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ा दिया है। राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति अब अपने काम की औपचारिक शुरुआत करने जा रही है। इसी कड़ी में समिति की पहली अहम बैठक दिल्ली स्थित मध्य प्रदेश भवन में आयोजित की जा रही है, जिसमें यूसीसी से जुड़े कानूनी और सामाजिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज के नेतृत्व में काम करेगी समिति
इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। उनके साथ समिति में अनुभवी प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं। इनमें सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, कानूनी विशेषज्ञ अनूप नायर, शिक्षाविद गोपाल शर्मा, समाजसेवी बुधपाल सिंह और सचिव अजय कटेसरिया जैसे नाम शामिल हैं। यह टीम मिलकर राज्य के लिए एक संतुलित और व्यावहारिक यूसीसी मॉडल तैयार करने का प्रयास करेगी।
उत्तराखंड और गुजरात के मॉडल पर रहेगा फोकस
समिति अपनी शुरुआती प्रक्रिया में अन्य राज्यों के अनुभवों को भी ध्यान में रखेगी। खास तौर पर उत्तराखंड और गुजरात में लागू किए गए यूनिफॉर्म सिविल कोड मॉडल का गहराई से अध्ययन किया जाएगा। इन राज्यों में कानून कैसे लागू किया गया, किस तरह की चुनौतियां सामने आईं और उनका समाधान कैसे किया गया, इन सभी पहलुओं को समझकर मध्यप्रदेश के लिए एक उपयुक्त ढांचा तैयार किया जाएगा।
60 दिनों में तैयार होगी रिपोर्ट
राज्य सरकार ने समिति को यह जिम्मेदारी दी है कि वह 60 दिनों के भीतर एक ड्राफ्ट रिपोर्ट और प्रस्तावित बिल तैयार करे। इस रिपोर्ट के आधार पर ही आगे यह तय किया जाएगा कि मध्य प्रदेश में यूसीसी को किस रूप में और किन प्रावधानों के साथ लागू किया जाए। सरकार चाहती है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से कानूनी और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखकर आगे बढ़े।
जनता की राय होगी शामिल, बनेगा डिजिटल प्लेटफॉर्म
यूसीसी को लेकर सरकार केवल विशेषज्ञों तक ही सीमित नहीं रहना चाहती बल्कि आम जनता की राय भी इसमें शामिल करने की योजना बना रही है। इसके लिए जिला स्तर पर जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और राजधानी भोपाल में भी विशेष सुनवाई की व्यवस्था होगी। इसके साथ ही एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी तैयार किया जा रहा है, जहां लोग अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे।
आदिवासी परंपराओं को लेकर खास विचार
मध्यप्रदेश में आदिवासी समुदाय की बड़ी आबादी को देखते हुए उनके पारंपरिक कानून और रीति-रिवाजों को लेकर भी विशेष चर्चा की जा रही है। संभावना जताई जा रही है कि यूसीसी के कुछ प्रावधानों से आदिवासी समुदाय को आंशिक छूट दी जा सकती है, ताकि उनकी सांस्कृतिक पहचान और परंपराएं सुरक्षित रह सकें। इस पर अंतिम निर्णय समिति की सिफारिशों के बाद ही लिया जाएगा।
लिव-इन रिलेशनशिप और नए सामाजिक प्रावधानों पर भी नजर
यूसीसी के संभावित ढांचे में लिव-इन रिलेशनशिप जैसे आधुनिक सामाजिक मुद्दों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। समिति को ऐसे संबंधों के पंजीकरण, अधिकार और जिम्मेदारियों को लेकर स्पष्ट सुझाव देने के लिए कहा गया है। माना जा रहा है कि मध्य प्रदेश इस विषय पर अन्य राज्यों की तुलना में अधिक सख्त और स्पष्ट नियम अपना सकता है।
दिल्ली में होगा समिति का संचालन केंद्र
समिति का मुख्य कार्यालय दिल्ली में स्थापित किया जाएगा, जहां से पूरे ड्राफ्ट और शोध कार्य का संचालन किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कामकाज में पारदर्शिता और विशेषज्ञता दोनों बनी रहें।











