MP High Court:RTO चेकपोस्ट पर हाईकोर्ट का यू-टर्न, ट्रांसपोर्ट कारोबारियों को बड़ी राहत, फैसले से ट्रांसपोर्ट सेक्टर खुश

जबलपुर। मध्यप्रदेश में बंद पड़े आरटीओ चेकपोस्ट फिलहाल दोबारा शुरू नहीं होंगे। जबलपुर हाईकोर्ट ने अपने ही पुराने आदेश पर स्टे लगाते हुए चेकपोस्ट बहाली की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। इस फैसले से प्रदेशभर के ट्रांसपोर्टर्स और वाहन चालकों को बड़ी राहत मिली है। इससे पहले हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 30 दिनों के भीतर सभी अंतरराज्यीय चेकपोस्ट फिर से शुरू करने का निर्देश दिया था। हालांकि ट्रांसपोर्टर्स की रिव्यू पिटीशन और सरकार के विरोध के बाद अदालत ने अपना आदेश फिलहाल स्थगित कर दिया। अब इस मामले में अगली सुनवाई और सरकार की अपील पर सबकी नजरें टिकी हैं।
सरकार ने भी जताया विरोध
मध्यप्रदेश में बंद पड़े परिवहन विभाग के आरटीओ चेकपोस्ट फिलहाल दोबारा शुरू नहीं होंगे। जबलपुर हाईकोर्ट ने अपने ही पुराने आदेश पर स्टे देते हुए चेकपोस्ट बहाल करने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद प्रदेशभर के ट्रांसपोर्ट कारोबारियों और वाहन चालकों ने राहत की सांस ली है। लंबे समय से ट्रांसपोर्टर संगठन चेकपोस्ट व्यवस्था का विरोध कर रहे थे और इसे भ्रष्टाचार तथा अनावश्यक जांच का कारण बता रहे थे। दरअसल, हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 16 अप्रैल 2026 को सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि मध्यप्रदेश में बंद किए गए सभी अंतरराज्यीय आरटीओ चेकपोस्ट 30 दिनों के भीतर फिर से शुरू किए जाएं। कोर्ट ने उस समय कहा था कि चेकपोस्ट बंद करने का फैसला पुराने न्यायिक आदेशों और 2018 में दिए गए स्टे का उल्लंघन माना जा सकता है। अदालत ने यह भी कहा था कि सड़क सुरक्षा, ओवरलोडिंग रोकने और परिवहन नियमों का पालन करवाने में चेकपोस्ट अहम भूमिका निभाते हैं।
रिव्यू पिटीशन के बाद बदला फैसला
इस मामले में भोपाल के ट्रांसपोर्टर अमन भोंसले की ओर से हाईकोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर की गई थी। इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने अपने पुराने आदेश पर रोक लगा दी। कोर्ट के इस नए फैसले के बाद चेकपोस्ट दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से रुक गई है। सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश सरकार की ओर से भी यह साफ किया गया कि सरकार फिलहाल चेकपोस्ट फिर से शुरू करने के पक्ष में नहीं है। डिप्टी एडवोकेट जनरल स्वप्निल गांगुली ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार पहले के आदेश को चुनौती देने की तैयारी कर रही है। इसके बाद न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा ने अपने 16 अप्रैल वाले आदेश पर स्टे लगा दिया।
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जुलाई 2024 से बंद हैं चेकपोस्ट
मध्यप्रदेश सरकार ने 1 जुलाई 2024 से प्रदेश के सभी अंतरराज्यीय आरटीओ चेकपोस्ट बंद कर दिए थे। उस समय सरकार का कहना था कि डिजिटल मॉनिटरिंग और नई तकनीकों के इस्तेमाल से अब भौतिक चेकपोस्ट की जरूरत कम हो गई है। सरकार ने यह भी तर्क दिया था कि चेकपोस्ट बंद होने से ट्रांसपोर्ट व्यवस्था आसान होगी और वाहन चालकों को बार-बार जांच की परेशानी से राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी चेकपोस्ट को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के बाद इन्हें बंद करने का फैसला लिया था। सरकार का मानना था कि कई जगहों पर चेकपोस्ट भ्रष्टाचार और अवैध वसूली का माध्यम बन चुके थे।
ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने फैसले का किया स्वागत
हाईकोर्ट के नए आदेश के बाद ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने खुशी जाहिर की है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि अदालत ने वाहन मालिकों और ड्राइवरों की समस्याओं को समझा है। उनका दावा है कि चेकपोस्ट व्यवस्था से ट्रांसपोर्ट कारोबारियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। एसोसिएशन के नेताओं ने कहा कि चेकपोस्ट बंद रहने से प्रदेश में परिवहन व्यवस्था पहले से ज्यादा सरल और पारदर्शी बनी है। उनका यह भी कहना है कि अब वाहन चालकों को अनावश्यक रोक-टोक और कथित उत्पीड़न का सामना नहीं करना पड़ेगा।











