PU Special :भोपाल में दूसरी ग्लोबल इन्वेस्टर समिट की तैयारी, 15 अगस्त के बाद मुख्य सचिव के सामने होगा विभागवार प्रजेंटेशन

अशोक गौतम, भोपाल। सरकार इस बार जीआईएस को केवल नए निवेश प्रस्ताव जुटाने तक सीमित रखने के बजाय पुराने प्रस्तावों की प्रगति और निवेश में आ रही बाधाओं की समीक्षा पर भी फोकस कर रही है। जीआईएस-2025 में मिले 30 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्तावों में करीब 10 लाख करोड़ रुपए के प्रस्ताव जमीन पर उतरने का दावा है। विभागों को अपने क्षेत्र में उपलब्ध निवेश अवसरों, जरूरी अधोसंरचना और निवेशकों को मिलने वाली नीतिगत सुविधाओं की जानकारी देनी होगी। नए निवेश के साथ स्थानीय वैल्यू एडिशन और रोजगार बढ़ाने पर भी इस बार खास जोर रहेगा।
पुराने निवेश प्रस्तावों की प्रगति पर भी नजर
आगामी जीआईएस की तैयारी में सरकार पुराने निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारने को भी प्राथमिकता दे रही है। विभागों से यह जानकारी मांगी गई है कि पिछले एक-दो वर्षों में जिन बड़े औद्योगिक समूहों ने निवेश में रुचि दिखाई है, उनकी जरूरतें क्या हैं और उन्हें किन सुविधाओं की आवश्यकता है। जीआईएस-2025 में 30 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले थे, जिनमें से करीब 10 लाख करोड़ रुपए के प्रस्ताव जमीन पर उतरने का दावा किया गया है। अब सरकार इन प्रस्तावों की प्रगति और निवेश की राह में आने वाली अड़चनों की समीक्षा करेगी।
पर्यटन और ग्रीन एनर्जी में निवेश की संभावनाएं
पर्यटन क्षेत्र में होटल, लग्जरी रिसॉर्ट, होमस्टे, इको और एडवेंचर टूरिज्म के साथ वाइल्डलाइफ सफारी, वाटर स्पोर्ट्स और ट्रैवल-टेक में निवेश की संभावनाएं चिन्हित की गई हैं। नए एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे और वंदे भारत ट्रेनों से बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ मिलने की उम्मीद है। ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में सोलर पार्क, ऊर्जा भंडारण, पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज और रिन्यूएबल एनर्जी उपकरण निर्माण पर जोर रहेगा। रीवा, ओंकारेश्वर, ग्वालियर-चंबल, नीमच, छिंदवाड़ा, रतलाम, उज्जैन, मंदसौर और नर्मदापुरम के मोहासा-बाबई क्षेत्र में भी संभावनाएं चिन्हित की गई हैं।
खनिज और शहरी विकास पर भी फोकस
खनिज क्षेत्र में कोयला, लौह अयस्क, चूना पत्थर, बॉक्साइट और क्रिटिकल मिनरल्स के खनन के साथ रिफाइनिंग, स्मेल्टिंग और प्रोसेसिंग इकाइयों में निवेश बढ़ाने की तैयारी है। इससे स्थानीय वैल्यू एडिशन और रोजगार बढ़ाने पर जोर रहेगा। शहरी विकास के क्षेत्र में भोपाल और इंदौर के मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र, सैटेलाइट टाउन और आवासीय परियोजनाओं में निजी निवेश की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं। टियर-2 और टियर-3 शहरों में सड़क, जलापूर्ति, आवास और परिवहन जैसी अधोसंरचना भी निवेश का क्षेत्र बनेगी।
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15 अगस्त के बाद मुख्य सचिव के सामने प्रजेंटेशन
इस बार सरकार का फोकस पुराने निवेश प्रस्तावों की प्रगति की समीक्षा, नए निवेश अवसरों का विभागवार रोडमैप और निवेश की राह में आने वाली नीतिगत और अधोसंरचनात्मक अड़चनों की पहचान पर है। 15 अगस्त के बाद विभाग मुख्य सचिव के सामने अपना प्रजेंटेशन देंगे। सरकार यह भी देख रही है कि निवेश के साथ स्थानीय स्तर पर वैल्यू एडिशन और रोजगार के अवसर किस तरह बढ़ाए जा सकते हैं। पिछली जीआईएस के बड़े प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलना सरकार के सामने बड़ी चुनौती है, इसलिए आगामी समिट में पुराने निवेश की स्थिति और अड़चनों का समाधान भी निवेशकों के बीच भरोसा कायम करने का अहम आधार होगा।












