पिपरिया में दो बेटों की हत्या के बाद पिता ने की आत्महत्या, पटवारी अजय धाकड़ पर हत्या का केस दर्ज
सोहागपुर। पिपरिया रेलवे स्टेशन पर रविवार को अजय धाकड़ ने ट्रेन के सामने आत्महत्या कर ली थी, जबकि उसके दोनों बेटों के शव बाद में पार्किंग के पास खड़ी कार में मिले। सोमवार को तीन डॉक्टरों की टीम ने तीनों शवों का पोस्टमार्टम किया और एफएसएल अधिकारी ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस पारिवारिक और कार्यालयीन तनाव सहित सभी पहलुओं की जांच कर रही है। परिजनों के मुताबिक, अजय का नागपुर और भोपाल में डिप्रेशन का इलाज चल रहा था। अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर ऐसी क्या वजह थी, जिसके चलते उसने अपने दोनों बेटों की जान ले ली।
हत्या का मामला दर्ज
कार में दो बेटों की हत्या करके खुद ट्रेन के सामने आत्महत्या करने वाले पिता अजय धाकड़ पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया है। पुलिस इस मामले में बच्चों की हत्या और पिता की आत्महत्या के कारणों की जांच कर रही है। पिपरिया के टीआई आदित्य सेन ने बताया कि बच्चों की गला घोंटकर हत्या की गई थी। पिता अजय सिंह धाकड़ के पास कार की चाबी मिली थी और कई अन्य सबूत भी मिले हैं। इन्हीं के आधार पर मृतक पटवारी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
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पोस्टमार्टम में बच्चों के गले पर मिले निशान
पिपरिया रेलवे स्टेशन पर रविवार को रेलवे ट्रैक पर लेटकर आत्महत्या करने वाले पटवारी अजय धाकड़ और उसके दोनों बेटों का सोमवार को सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम किया गया। पोस्टमार्टम तीन डॉक्टरों की टीम ने किया, जिसमें डॉ. देवेंद्र ठाकुर, डॉ. विक्रम पटेल और डॉ. सुनील आर्य शामिल थे। पटवारी अजय का सिर धड़ से अलग था। एफएसएल अधिकारी डॉ. ऋषिकेश यादव ने भी निरीक्षण किया, जबकि कार में मोबाइल चार्जर और बेल्ट मिले।
मोबाइल चार्जर के केबल से गला घोंटने की आशंका
दोनों बच्चों के पोस्टमार्टम में बेटे समर्थ के गले पर 0.5 सेंटीमीटर का एक निशान मिला, जबकि शिवाय के गले पर 0.5 सेंटीमीटर के दो निशान पाए गए। ये निशान मोबाइल चार्जर के तार से बने होने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस को संदेह है कि दोनों बेटों की हत्या मोबाइल चार्जर के केबल से गला घोंटकर की गई। हालांकि, पूरे मामले में हत्या के कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच की जा रही है।
डिप्रेशन का चल रहा था इलाज
सूत्रों के मुताबिक, अजय का नागपुर और भोपाल में डिप्रेशन का इलाज चल रहा था। उसके पारिवारिक सूत्रों ने भी इस बात की जानकारी दी है। बताया जाता है कि वह अपने दोस्तों और सहयोगियों से कहता था, “मुझसे तनाव नहीं झेला जाता, किसी काम में मन नहीं लगता। सोचता हूं नौकरी छोड़ दूं, पर नौकरी छोड़ दूंगा तो बच्चों का क्या होगा?” अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बच्चों के भविष्य की चिंता करने वाले अजय ने आखिर ऐसा कदम क्यों उठाया।
तीन घंटे बाद पार्किंग के पास कार में मिले बच्चों के शव
जीआरपी के लक्ष्मण प्रसाद ने बताया कि रविवार को संघमित्रा एक्सप्रेस से दोपहर करीब 3 बजे घटना हुई और 3:35 बजे सूचना मिली। शव अस्पताल लाए गए, जहां जेब की तलाशी में आधार कार्ड, मोबाइल, कुछ रुपए और कार की चाबी मिली। आधार कार्ड और मोबाइल के आधार पर शाम करीब 6 से 7 बजे पत्नी मालती और परिजनों से संपर्क हुआ। तब पता चला कि बच्चे भी फिल्म देखने साथ गए थे। इसके बाद कार नंबर एमपी 04 सीवी 0637 और बच्चों की तलाश शुरू की गई। टॉकीज और रेलवे स्टेशन के आसपास तलाश के दौरान पार्किंग के पास कार में दोनों बच्चों के शव मिलने की सूचना मिली।
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पत्नी ने भी साथ चलने की कही थी बात
अजय के चाचा प्रताप और रिश्तेदार गजेंद्र सिंह धाकड़ तथा राजेंद्र धाकड़ ने बताया कि परिवार आर्थिक रूप से संपन्न है। अजय के पिता नारायण सिंह सेवानिवृत्त शिक्षक हैं और उन्हें पेंशन मिलती है। उसकी छोटी बहन अर्चना पांडा बम्होरी बरेली में सचिव हैं, जबकि दूसरी बहन आराधना बरेली में शिक्षक हैं। दोनों की शादी हो चुकी है। अजय की पत्नी मालती का मायका खरगोन, बरेली में है। परिजनों के मुताबिक, अजय नई फिल्म लगने पर रविवार को पिपरिया में फिल्म देखने आता था। रविवार को भी वह दोनों बेटों समर्थ और शिवाय को फिल्म दिखाने के लिए बरेली से कार में निकला था। पत्नी मालती ने साथ चलने की बात कही, लेकिन अजय ने यह कहकर मना कर दिया कि रास्ते में दोस्तों से मिलना है।

























