Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

भोपाल में डोल ग्यारस पर निकलेगा गणेश विसर्जन चल समारोह, 100 से ज्यादा प्रतिमाएं होंगी शामिल

भोपाल में डोल ग्यारस पर गणेश विसर्जन चल समारोह निकलेगा। 100 से अधिक गणेश प्रतिमाएं, 50 से ज्यादा झांकियां और 59 साल पुराना पीतल का डोल आकर्षण रहेगा।
भोपाल में डोल ग्यारस पर निकलेगा गणेश विसर्जन चल समारोह, 100 से ज्यादा प्रतिमाएं होंगी शामिल
डोल ग्यारस पर निकलेगा गणेश विसर्जन चल समारोह

भोपाल। डोल ग्यारस के अवसर पर मंगलवार को राजधानी भोपाल के पुराने शहर में श्री गणेश विसर्जन चल समारोह निकाला जाएगा। श्री डोल ग्यारस चल समारोह समिति के तत्वावधान में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में 50 से अधिक चलित झांकियां, 100 से ज्यादा गणेश प्रतिमाएं और विभिन्न समाजों के डोल (विमान) शामिल होंगे। सराफा स्थित पीपल चौक पर विराजमान ‘भोपाल के राजा’ की प्रतिमा चल समारोह में सबसे आगे रहेगी।

दोपहर 12 बजे पीपल चौक से शुरू होगा जुलूस

चल समारोह दोपहर 12 बजे पीपल चौक से शुरू होगा। यहां से जुलूस सुभाष चौक, लखेरापुरा, सोमवारा, सिंधी मार्केट, जुमेराती, लोहा बाजार, चौक, इब्राहिमपुरा और बुधवारा होते हुए कालीघाट मंदिर पहुंचेगा। इसके बाद लिली सिनेमा के सामने से होते हुए चल समारोह छोटे तालाब स्थित खटलापुरा घाट पहुंचेगा। खटलापुरा घाट पर शाम 6 बजे से गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला शुरू होगा, जो देर रात तक चलने की संभावना है।

59 साल पुराना पीतल का डोल रहेगा आकर्षण

चल समारोह में श्री मालवीय रजक समाज संघ का 59 वर्ष पुराना 54 किलो वजनी पीतल का डोल विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा। समाज की इस पुरानी धरोहर को साफ-सफाई और आकर्षक साज-सज्जा के बाद तैयार किया गया है। संघ के अध्यक्ष नरेश मालवीय के अनुसार, समारोह में धर्म ध्वज, बैंड और विभिन्न धार्मिक आयोजन भी शामिल होंगे। भगवान श्री गणेश को आकर्षक पालकी में विराजमान कर श्रद्धालु कंधों पर लेकर चलेंगे। इसमें समाज के पदाधिकारी, महिलाएं और युवा बड़ी संख्या में शामिल होंगे।

Breaking News

धार्मिक परंपरा का प्रतीक है पीतल का डोल

प्रकाश मालवीय ने बताया कि करीब 59 वर्ष पहले समाज ने इस डोल को तैयार कराया था। इससे पहले भगवान श्रीकृष्ण को लकड़ी के डोल में विराजमान कर श्रद्धालु कंधों पर लेकर चलते थे। बाद में पीतल का डोल तैयार कराया गया। आज यह डोल समाज की धार्मिक परंपरा और आस्था का प्रतीक बना हुआ है।

महिलाओं को प्रसाद के साथ बांटे जाएंगे पौधे

इस बार चल समारोह को पर्यावरण संरक्षण से भी जोड़ा गया है। आयोजन के दौरान महिलाओं को प्रसाद के साथ विभिन्न प्रजातियों के पौधे वितरित किए जाएंगे। समाज की ओर से लोगों से इन पौधों के संरक्षण की अपील भी की जाएगी।

नई पीढ़ी को परंपरा से जोड़ने की पहल

इस वर्ष चल समारोह की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी विष्णु मालवीय को संयोजक के रूप में सौंपी गई है। आयोजकों के अनुसार, 59 वर्ष पुराने पीतल के डोल के साथ निकलने वाला यह चल समारोह धार्मिक आस्था और परंपरा के साथ नई पीढ़ी को जोड़ने का माध्यम भी बनेगा।

Devendra Peoples
By Devendra Peoples

Latest Posts