सीहोर में पहली बार मां सीवन को चढ़ी 101 मीटर की चुनरी, भावनाओं से जुड़ा सीवन पुत्र अभियान
सीहोर शहर के इतिहास में रविवार का दिन मां सीवन के प्रति आस्था, सम्मान और पर्यावरण संरक्षण की भावना के लिए यादगार बन गया। सीवन पुत्र टीम ने पहली बार मां सीवन को 101 मीटर लंबी चुनरी अर्पित कर ऐसा भावनात्मक संदेश दिया जिसने नदी को केवल जलधारा नहीं बल्कि मां के रूप में देखने और उसके संरक्षण के लिए लोगों को जोड़ने का काम किया। महिला घाट से पुरुष घाट तक जब चुनरी चढ़ाई गई तो घाट पर मौजूद लोगों में श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत माहौल दिखाई दिया।
पूजा-अर्चना के बाद मां सीवन को अर्पित हुई चुनरी
कार्यक्रम की शुरुआत मां सीवन की विधिवत पूजा-अर्चना और आरती से हुई। खास बात यह रही कि एक नन्ही बालिका के हाथों मां सीवन की पूजा कराई गई। इसके बाद महिला घाट से पुरुष घाट तक 101 मीटर की चुनरी अर्पित की गई। चुनरी महोत्सव के माध्यम से संदेश दिया गया कि जिस नदी से शहर का जीवन और भावनाएं जुड़ी हैं, उसकी स्वच्छता और संरक्षण की जिम्मेदारी भी समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
20 कार्यक्रमों के जरिए लोगों से बना भावनात्मक रिश्ता
सीवन पुत्र प्रदीप चावड़ा ने बताया कि सीवन अभियान को करीब पांच महीने पूरे होने वाले हैं। इस दौरान लगभग 5,600 सीवन पुत्र बन चुके हैं। अभियान के अंतर्गत बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को मां सीवन से भावनात्मक रूप से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। पांच महीनों में करीब 20 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं जिनके जरिए नदी संरक्षण की भावना को लगातार मजबूत किया गया है।
अब दूसरी नदियों के लिए भी बढ़ रहे ‘पुत्र-पुत्री’
सीवन पुत्र अभियान अब केवल सीहोर तक सीमित नहीं रहा है। अभियान से प्रेरित होकर विभिन्न नदियों के नाम से पुत्र और पुत्रियां बनने की पहल भी सामने आ रही है। इनका उद्देश्य अपनी-अपनी नदियों की स्वच्छता, संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए समाज को संकल्पित करना है। यही कारण है कि सीवन पुत्र अभियान राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनता जा रहा है।
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चुनरी महोत्सव ने दिया नदी संरक्षण का भावनात्मक संदेश
101 मीटर की चुनरी अर्पित करने के पीछे केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि नदी के प्रति भावनात्मक संबंध मजबूत करने का उद्देश्य है। अभियान से जुड़े लोगों का मानना है कि जब लोग नदी को मां मानकर उससे जुड़ेंगे, तभी उसके संरक्षण की जिम्मेदारी भी दिल से निभाएंगे। चुनरी महोत्सव ने इसी भावना को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया।
वरिष्ठ सीवन पुत्रों सहित बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में वरिष्ठ सीवन पुत्र रमेश जायसवाल, अशोक नामदेव, हृदेश राठौर, देवेश सिसोदिया, लखन कुशवाह, जितेंद्र चौरसिया, कैलाश चव्हाण, कपिल बैरागी, वैभव राठौर, मुकेश राय, योगेंद्र राय, राधेश्याम मकवाना, प्रकाश यादव, जगदीश वर्मा, उमेश चावड़ा, लक्ष्मण चौकसे, कनीराम मालवीय, सुरेश भगत, रवि माहेश्वरी, विनोद यादव, संतोष मेवाड़ा, राजकुमार सोनी, राजेश शर्मा, सतीश सीठा, मांगीलाल मालवीय, विल्सन जैन, सुनील मालवीय सहित बड़ी संख्या में सीवन पुत्र मौजूद रहे।
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चुनरी बनी संकल्प की डोर
मां सीवन को अर्पित की गई 101 मीटर की चुनरी केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सीहोर की नदी से जुड़ती भावनाओं और जिम्मेदारी की प्रतीक बनकर सामने आई। महिला घाट से पुरुष घाट तक फैली चुनरी ने मानो पूरे शहर को यह संदेश दिया कि नदी बचेगी तो शहर बचेगा और नदी से रिश्ता मजबूत होगा तो उसके संरक्षण का संकल्प भी मजबूत होगा।














