लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के आशियाना इलाके से सामने आया ‘नीला ड्रम कांड’ सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि यह उस मानसिक दबाव, पारिवारिक टकराव और अनकही पीड़ा की कहानी है, जो धीरे-धीरे एक सामान्य परिवार को तबाही की ओर ले गई। इस केस ने समाज के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं- क्या पढ़ाई और करियर का दबाव किसी को हत्या तक ले जा सकता है? क्या घर के भीतर पनप रही बेचैनी समय रहते पहचानी जा सकती थी?
‘नीला ड्रम कांड’ वह मामला है, जिसमें लखनऊ के आशियाना इलाके में एक पैथोलॉजी लैब मालिक का शव उनके ही घर के अंदर एक नीले रंग के ड्रम में बरामद हुआ। जांच में सामने आया कि, हत्या किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि मृतक के इकलौते बेटे ने की थी। यही वजह है कि यह केस लोगों को झकझोर रहा है।
मृतक का नाम मानवेंद्र सिंह था। वे एक सफल बिजनेसमैन थे। उनके पास चार पैथोलॉजी लैब और तीन शराब की दुकानें थीं। आर्थिक रूप से परिवार पूरी तरह संपन्न था। समाज में उनकी अच्छी पहचान थी और वे मिलनसार स्वभाव के माने जाते थे। मानवेंद्र सिंह की पत्नी का करीब नौ साल पहले निधन हो चुका था। इसके बाद वे अपने दो बच्चों बेटे अक्षत प्रताप सिंह और बेटी कृति की परवरिश खुद कर रहे थे। बेटी 11वीं की छात्रा है, जबकि बेटा अक्षत कॉलेज में पढ़ रहा था।
आरोपी बेटा अक्षत करीब 21 साल का है। वह बीकॉम का छात्र था, लेकिन उसके पिता चाहते थे कि वह मेडिकल की पढ़ाई करे और NEET क्वालीफाई कर MBBS बने। अक्षत ने दो बार NEET की परीक्षा दी, लेकिन सफल नहीं हो पाया।
यहीं से पिता-बेटे के बीच तनाव बढ़ने लगा। पिता लगातार पढ़ाई को लेकर डांटते थे, जबकि अक्षत मेडिकल लाइन में जाने को लेकर इच्छुक नहीं था। वह चाहता था कि, परिवार का बिजनेस किसी दूसरे रूप में बढ़ाया जाए जैसे लॉन या रेस्टोरेंट खोलकर। यह टकराव धीरे-धीरे बहस और मानसिक दबाव में बदलता चला गया।
पुलिस जांच के मुताबिक, 20 फरवरी की सुबह करीब 4:30 बजे पिता और बेटे के बीच पढ़ाई और करियर को लेकर तीखी बहस हुई। गुस्से में मानवेंद्र सिंह ने अपनी लाइसेंसी राइफल निकालकर बेटे को डराने की कोशिश की, लेकिन बाद में राइफल को एक तरफ रख दिया।
इसी दौरान अक्षत ने राइफल उठाई और पिता के सीने में गोली मार दी। गोली लगते ही मानवेंद्र सिंह की मौके पर ही मौत हो गई।
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गोली की आवाज सुनकर घर में मौजूद 17 वर्षीय बहन कृति नीचे आई। पुलिस के अनुसार, अक्षत ने उसे धमकाया कि अगर उसने किसी को कुछ बताया तो वह उसे भी जान से मार देगा।
डर और सदमे की हालत में कृति चुप रही। यही चुप्पी इस केस का सबसे दर्दनाक पहलू मानी जा रही है, क्योंकि एक नाबालिग लड़की ने अपने पिता की हत्या अपनी आंखों के सामने होते देखी, लेकिन डर के कारण कुछ कह नहीं सकी।
हत्या के बाद अक्षत ने सबूत मिटाने की साजिश रची। उसने पिता के शव को तीसरी मंजिल से नीचे ग्राउंड फ्लोर के एक खाली कमरे में पहुंचाया। इसके बाद बाजार से आरी खरीदी और शव के कई टुकड़े कर दिए। कुछ अंग कार में डालकर शहर के बाहरी इलाके में फेंक दिए। बाकी शरीर को पॉलीथिन में पैक कर नीले ड्रम में भर दिया। हत्या में इस्तेमाल राइफल को गद्दे के नीचे छिपा दिया। यह पूरी प्रक्रिया बेहद बेरहमी और ठंडे दिमाग से की गई, जिसने जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया।
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सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि, हत्या के बाद अक्षत तीन दिन तक सामान्य जिंदगी जीता रहा। उसने कार की सफाई की, घर में सामान्य व्यवहार किया और किसी को शक नहीं होने दिया। तीन दिन बाद वह खुद थाने पहुंचा और पिता की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। उसने पुलिस को बताया कि उसके पिता दिल्ली जाने की बात कहकर निकले थे और वापस नहीं आए।
जब पुलिस ने पूछताछ शुरू की तो अक्षत के हाव-भाव संदिग्ध लगे। पहले उसने आत्महत्या की कहानी बताने की कोशिश की। जब पुलिस ने सख्ती की, तो वह टूट गया और पूरी वारदात कबूल कर ली। इसके बाद पुलिस उसे लेकर घर पहुंची, जहां नीले ड्रम से शव के टुकड़े बरामद किए गए। हालांकि, कुछ अंग अभी भी नहीं मिले हैं, जिनकी तलाश जारी है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक टीम को बुलाया गया। घर से खून के निशान, हथियार और अन्य अहम सबूत जुटाए गए हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जिससे मौत के समय और तरीके की पुष्टि होगी। पुलिस आरोपी बेटे के खिलाफ हत्या और सबूत मिटाने जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर रही है।
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पड़ोसियों के मुताबिक, अक्षत बेहद रिजर्व रहता था। किसी से ज्यादा बातचीत नहीं करता था। चार साल पहले वह घर से भाग भी गया था और एक चिट्ठी में लिखकर गया था कि, उस पर MBBS के लिए दबाव न डाला जाए।
वहीं मानवेंद्र सिंह मोहल्ले में मिलनसार, धार्मिक और सामाजिक व्यक्ति के रूप में जाने जाते थे। रामलीला जैसे आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे।
इस केस में एक अहम सवाल यह भी उठ रहा है कि, क्या यह अचानक गुस्से में उठाया गया कदम था या लंबे समय से चल रहे मानसिक तनाव का नतीजा?
चार महीने पहले घर से गहनों की चोरी हुई थी। शुरुआत में नौकरानी पर शक किया गया, लेकिन बाद में पता चला कि चोरी बेटे ने ही की थी। पिता ने बेटे को बचाने के लिए शिकायत वापस ले ली थी, लेकिन इसके बाद वे उसकी गतिविधियों पर नजर रखने लगे थे। इससे रिश्तों में और कड़वाहट आई।
‘नीला ड्रम कांड’ यह दिखाता है कि सिर्फ आर्थिक सफलता से परिवार खुशहाल नहीं होता। बच्चों पर उनकी इच्छा के खिलाफ करियर का दबाव, संवाद की कमी और मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी खतरनाक साबित हो सकती है। यह मामला एक चेतावनी है कि, समय रहते अगर घर के भीतर चल रहे तनाव को समझ लिया जाए, तो शायद ऐसी त्रासदियां रोकी जा सकती हैं।