इंसान और कुत्ते के रिश्ते को दुनिया का सबसे वफादार और खास बंधन माना जाता है। लेकिन यह रिश्ता कितना पुराना है, इस पर अब तक कई सवाल बने हुए थे। अब एक नई वैज्ञानिक खोज ने इस रहस्य से पर्दा उठा दिया है। तुर्की में मिले एक प्राचीन अवशेष ने यह साबित कर दिया है कि इंसान और कुत्ते की दोस्ती हमारी कल्पना से कहीं ज्यादा पुरानी है-करीब 15,800 साल पुरानी। यह खोज न केवल इतिहास को नया रूप देती है बल्कि यह भी दिखाती है कि इंसान और जानवर के बीच सहयोग और विश्वास का रिश्ता सभ्यता से भी पहले शुरू हो चुका था।
तुर्की के एक प्राचीन क्षेत्र में खुदाई के दौरान वैज्ञानिकों को एक कुत्ते के जबड़े और दांत का हिस्सा मिला। शुरुआत में इसे जंगली भेड़िए का अवशेष माना गया, लेकिन आधुनिक तकनीकों से जांच करने पर यह स्पष्ट हुआ कि यह एक पालतू कुत्ते का है। यह खोज इसलिए खास है क्योंकि अब तक इतने पुराने पालतू कुत्ते का कोई स्पष्ट सबूत सामने नहीं आया था। इससे पहले माना जाता था कि कुत्तों को पालतू बनाने की प्रक्रिया बाद में शुरू हुई, लेकिन इस खोज ने उस धारणा को बदल दिया है।
अब तक यह माना जाता था कि कुत्तों को पालतू बनाने की शुरुआत यूरोप या पूर्वी एशिया में हुई होगी। लेकिन तुर्की से मिली इस खोज ने इस सोच को बदल दिया है। यह संकेत मिलता है कि इंसान और कुत्ते का रिश्ता फर्टाइल क्रिसेंट क्षेत्र में बहुत पहले ही शुरू हो चुका था। खास बात यह है कि उस समय इंसान खेती नहीं करता था और पूरी तरह शिकार पर निर्भर था।
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यह खोज हिमयुग के दौर से जुड़ी हुई है, जब धरती पर बेहद ठंड थी और संसाधन सीमित थे। उस समय इंसान जंगलों में शिकार करके जीवन यापन करता था। ऐसे कठिन हालात में कुत्तों ने इंसानों का साथ देना शुरू किया। वे न केवल सुरक्षा देते थे बल्कि शिकार ढूंढने में भी मदद करते थे। बदले में इंसान उन्हें भोजन और आश्रय देता था। यही वह दौर था, जब यह रिश्ता धीरे-धीरे मजबूत होता गया।
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह बदलाव अचानक नहीं हुआ, बल्कि एक लंबी प्रक्रिया का परिणाम था। जब भोजन की कमी होती थी, तो कुछ जंगली कुत्ते इंसानी बस्तियों के पास आने लगे। वहां उन्हें खाने के अवशेष मिलते थे। धीरे-धीरे उन्होंने इंसानों के साथ रहना सीख लिया। समय के साथ उनके व्यवहार और जीन में बदलाव आया और वे आक्रामक शिकारी से वफादार साथी बन गए। इस प्रक्रिया को आज डोमेस्टिकेशन यानी पालतू बनने की प्रक्रिया कहा जाता है।
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जहां यह अवशेष मिला, वहां सिर्फ कुत्ते के निशान ही नहीं बल्कि इंसानों के रहने के भी प्रमाण मिले हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि उस समय इंसान और कुत्ते एक ही जगह पर रहते थे। यानी हजारों साल पहले भी दोनों के बीच सहजीवन (co-existence) का रिश्ता था।
इस खोज को लेकर वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सिर्फ एक जानवर का अवशेष नहीं है, बल्कि यह इंसान के भावनात्मक और सामाजिक विकास की कहानी भी बताता है। यह दिखाता है कि इंसान ने बहुत पहले ही दूसरे जीवों के साथ संबंध बनाना और सहयोग करना सीख लिया था। यह खोज यह भी बताती है कि वफादारी और साथ निभाने की भावना केवल आधुनिक समाज की देन नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें बहुत गहरी हैं।