एक ही घर में रहते हैं, साथ खाना भी खाते हैं, फिर भी पार्टनर के साथ लगता है अकेलापन?

पति-पत्नी का रिश्ता प्यार, भरोसे और आपसी समझ पर टिका होता है। इस रिश्ते में छोटी-मोटी नोकझोंक होना आम बात है। अक्सर माना जाता है कि जिन कपल्स के बीच कम झगड़े होते हैं, उनकी शादी ज्यादा खुशहाल होती है। लेकिन जरूरी नहीं कि हर शांत दिखने वाला रिश्ता अंदर से भी उतना ही मजबूत हो। कई बार पति-पत्नी एक ही घर में रहते हैं, साथ खाना खाते हैं और रोजमर्रा की जिम्मेदारियां भी निभाते हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके बीच भावनात्मक दूरी बढ़ने लगती है। ऐसे में व्यक्ति अपने पार्टनर के साथ रहते हुए भी अकेलापन महसूस कर सकता है।
रिश्ते में प्यार है, फिर भी क्यों बढ़ रही है दूरी?
रिलेशनशिप एक्सपर्ट के मुताबिक, कई कपल्स भावनात्मक दूरी का सामना करते हैं। इस स्थिति में रिश्ते में कोई बड़ा झगड़ा, बेवफाई या स्पष्ट समस्या नहीं होती, फिर भी दोनों के बीच पहले जैसा जुड़ाव महसूस नहीं होता। भावनात्मक दूरी अचानक नहीं आती, बल्कि धीरे-धीरे रिश्ते में जगह बनाती है। इसकी शुरुआत अक्सर छोटी-छोटी बातों से होती है। जैसे पति-पत्नी के बीच बातचीत केवल घर के काम, ऑफिस की जिम्मेदारियों और परिवार से जुड़े मुद्दों तक सीमित हो जाती है।
धीरे-धीरे दोनों अपने डर, सपने, भावनाएं और दिनभर के अनुभव एक-दूसरे के साथ साझा करना कम कर देते हैं। कभी उन्हें लगता है कि पार्टनर व्यस्त है, तो कभी यह डर रहता है कि सामने वाला उनकी बात समझ नहीं पाएगा। यही आदत आगे चलकर भावनात्मक दूरी बढ़ा सकती है।
पार्टनर की बात सुनना और समझना अलग-अलग बातें हैं
किसी की बात सुनना और उसकी भावनाओं को समझना एक जैसी बात नहीं है। कई बार पार्टनर आपकी बातें तो सुनता है, लेकिन उनके पीछे छिपी भावनाओं को समझ नहीं पाता। जब व्यक्ति को लगता है कि उसकी भावनाओं, जरूरतों या परेशानियों को रिश्ते में पर्याप्त जगह नहीं मिल रही है, तो वह धीरे-धीरे खुद को व्यक्त करना कम कर सकता है। इससे बातचीत और भावनात्मक जुड़ाव दोनों प्रभावित होते हैं। ऐसी स्थिति में पति-पत्नी एक-दूसरे के साथ समय बिताने के बावजूद मन की बातें साझा नहीं कर पाते। यही वजह है कि रिश्ते में साथ होने के बावजूद अकेलेपन का एहसास बढ़ सकता है।
रिश्ते में भावनात्मक जुड़ाव क्यों जरूरी है?
शादी केवल एक साथ रहने या जिम्मेदारियां निभाने का नाम नहीं है। इसमें एक-दूसरे की भावनाओं को समझना, बिना जज किए बात सुनना और मुश्किल समय में साथ देना भी जरूरी है। छोटी-छोटी बातचीत, दिनभर के अनुभव साझा करना और एक-दूसरे के लिए समय निकालना रिश्ते में भावनात्मक जुड़ाव बनाए रखने में मदद कर सकता है। इसलिए किसी रिश्ते में झगड़ों की कमी को ही खुशहाल शादी का पैमाना नहीं मानना चाहिए। जरूरी है कि दोनों पार्टनर एक-दूसरे के साथ भावनात्मक रूप से भी जुड़े रहें।
रिश्ते में अकेलापन है तो दूर कैसे करें?
पार्टनर के साथ रिश्ता रखने के लिए भावनात्मक जुड़ाव बनाए रखें, जिससे अकेलापन दूर होगा। छोटी-छोटी आदतों से इसकी शुरुआत की जा सकती है। इसका सबसे बढ़िया और अच्छा उपाय है ज्यादा से ज्यादा एक दूसरे बात करें। अपनी पार्टनर की बातों को ध्यान से सुनें, इसके साथ ही अपने पार्टनर के डेली रुटीन पर उससे बात करें, जैसे कि आज का दिन कैसा रहा, क्या किया, आदि। पार्टनर की हर जरूरत का ध्यान रखना न भूलें।




















