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धरती क्यों बन रही आग का गोला? वैज्ञानिकों की नई स्टडी इंसानों की भूमिका पर चौंकाने वाला खुलासा

धरती का तापमान लगातार क्यों बढ़ रहा है? वैज्ञानिकों की नई रिसर्च में ग्लोबल वार्मिंग को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। कोयला, तेल और गैस के इस्तेमाल से निकलने वाली ग्रीनहाउस गैसें पृथ्वी को गर्म कर रही हैं। वैज्ञानिकों को इंसानी गतिविधियों के असर के पहले से ज्यादा मजबूत सबूत मिले हैं। जानिए पूरी रिपोर्ट और इसके खतरे।
धरती क्यों बन रही आग का गोला? वैज्ञानिकों की नई स्टडी इंसानों की भूमिका पर चौंकाने वाला खुलासा
धरती के बढ़ते तापमान के पीछे कौन जिम्मेदार? वैज्ञानिकों की नई रिसर्च में सामने आई सच्चाई

कभी बेमौसम बारिश, कभी रिकॉर्ड तोड़ गर्मी तो कभी अचानक आने वाली बाढ़... क्या आपने सोचा है कि आखिर मौसम इतना तेजी से क्यों बदल रहा है? धरती का तापमान लगातार क्यों बढ़ रहा है और इसके पीछे असली वजह क्या है? वैज्ञानिकों की एक नई स्टडी ने इन सवालों के जवाब तलाशे हैं। रिसर्च में सामने आया है कि धरती को गर्म करने में इंसानों की गतिविधियों की सबसे बड़ी भूमिका है। कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के इस्तेमाल से निकलने वाली ग्रीनहाउस गैसें वातावरण में गर्मी को रोक रही हैं। इससे पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अब इसके सबूत पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गए हैं।

30 साल की रिसर्च में सामने आए बड़े सबूत

यह नई स्टडी वैज्ञानिक पत्रिका 'अर्थ्स फ्यूचर' (Earth's Future) में प्रकाशित हुई है। ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंग्लिया के एक शोधकर्ता के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने पिछले 30 साल से ज्यादा समय में हुए जलवायु संबंधी शोधों की समीक्षा की। इस दौरान वैज्ञानिकों ने धरती के तापमान, समुद्रों में बढ़ती गर्मी और वातावरण में हो रहे बदलावों से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन किया। रिसर्च में पाया गया कि साल 2009 की तुलना में अब ऐसे वैज्ञानिक सबूत काफी मजबूत हो चुके हैं, जो बताते हैं कि ग्लोबल वार्मिंग के पीछे इंसानी गतिविधियों का बड़ा योगदान है।

आखिर इंसानों की वजह से कैसे गर्म हो रही धरती?

धरती का तापमान बढ़ने की सबसे बड़ी वजह ग्रीनहाउस गैसों का बढ़ता स्तर है। जब इंसान बिजली बनाने, कारखाने चलाने और गाड़ियां चलाने के लिए कोयला, तेल और गैस जलाते हैं, तो वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसें निकलती हैं। ये गैसें धरती से निकलने वाली गर्मी के एक हिस्से को अंतरिक्ष में जाने से रोकती हैं। इससे वातावरण में गर्मी बढ़ने लगती है। इस प्रक्रिया को ग्रीनहाउस प्रभाव कहा जाता है। यह प्राकृतिक रूप से भी होता है, लेकिन इंसानी गतिविधियों के कारण ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़ने से धरती जरूरत से ज्यादा गर्म हो रही है।

क्या है क्लाइमेट फिंगरप्रिंटिंग तकनीक?

वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में 'क्लाइमेट फिंगरप्रिंटिंग' (Climate Fingerprinting) तकनीक का भी जिक्र किया है। इस तकनीक की मदद से वैज्ञानिक पता लगाते हैं कि मौसम और तापमान में होने वाले बदलाव प्राकृतिक कारणों से हो रहे हैं या इंसानों की वजह से। इसके लिए धरती की सतह, महासागरों और वातावरण की अलग-अलग परतों के तापमान का अध्ययन किया जाता है। वैज्ञानिक इन आंकड़ों की तुलना कंप्यूटर मॉडल से करते हैं। इससे पता चलता है कि प्राकृतिक कारणों और इंसानी गतिविधियों का जलवायु पर कितना असर पड़ रहा है।

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समुद्र की गहराई तक दिख रहा इंसानी गतिविधियों का असर

नई रिसर्च में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इंसानों की गतिविधियों का असर केवल धरती की सतह तक सीमित नहीं है। समुद्रों का तापमान भी बढ़ रहा है। इसके अलावा वातावरण की अलग-अलग परतों में तापमान के बदलाव देखे जा रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि जब जमीन, हवा और समुद्रों से मिलने वाले आंकड़े एक जैसे संकेत देते हैं, तो ग्लोबल वार्मिंग के कारणों को समझना आसान हो जाता है। अब वैज्ञानिक महासागरों की गहराई से लेकर वातावरण के ऊपरी हिस्सों तक इंसानों के प्रभाव की पहचान कर पा रहे हैं।

2009 के बाद बढ़ा धरती का तापमान

स्टडी में बताया गया है कि साल 2009 के बाद धरती के तापमान में बढ़ोतरी और स्पष्ट हुई है। इस दौरान दुनिया के रिकॉर्ड में दर्ज दस सबसे गर्म साल भी सामने आए। वैज्ञानिकों के मुताबिक, लगातार बढ़ता तापमान इस बात का महत्वपूर्ण संकेत है कि जलवायु परिवर्तन तेजी से हो रहा है। हालांकि, किसी एक साल का ज्यादा गर्म होना अपने आप में ग्लोबल वार्मिंग का पूरा सबूत नहीं है। लंबे समय के तापमान और दूसरे वैज्ञानिक आंकड़े मिलकर इसकी पुष्टि करते हैं।

अमेरिका की जलवायु नीति पर भी उठे सवाल

इस रिसर्च का संबंध अमेरिका की पर्यावरण नीतियों से भी है। साल 2009 में अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) ने ग्रीनहाउस गैसों को लोगों की सेहत और जीवन के लिए खतरा माना था। इस फैसले को 'एंडेंजेरमेंट फाइंडिंग' (Endangerment Finding) कहा गया। इसके आधार पर अमेरिका में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को नियंत्रित करने के नियम बनाए गए। हालांकि, जुलाई 2025 में अमेरिकी ऊर्जा विभाग की एक रिपोर्ट ने जलवायु विज्ञान के कुछ निष्कर्षों पर सवाल उठाए थे। नई स्टडी के वैज्ञानिकों का कहना है कि उस रिपोर्ट में पहले से मौजूद वैज्ञानिक सबूतों और हाल के शोधों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।

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बढ़ती गर्मी से इंसानों को क्या खतरा?

ग्लोबल वार्मिंग केवल तापमान बढ़ने की समस्या नहीं है। इसका सीधा असर लोगों की जिंदगी, स्वास्थ्य और खेती पर भी पड़ सकता है। ज्यादा गर्मी से हीट स्ट्रोक और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ता है। भारी बारिश और बाढ़ से घरों, सड़कों और खेतों को नुकसान पहुंच सकता है। इसके अलावा कई क्षेत्रों में जंगलों में आग लगने की आशंका बढ़ सकती है। मौसम में बदलाव से फसलों की पैदावार और पानी की उपलब्धता भी प्रभावित हो सकती है। वैज्ञानिक अब यह भी अध्ययन कर रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण लू, भारी बारिश और बाढ़ जैसी घटनाओं की संभावना कितनी बढ़ रही है।

दुनिया के बड़े वैज्ञानिक संस्थान भी रिसर्च में शामिल

इस अध्ययन में ब्रिटेन और अमेरिका के कई बड़े संस्थानों के वैज्ञानिकों ने योगदान दिया। इनमें मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT), कोलोराडो स्टेट यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबरा शामिल हैं। वैज्ञानिकों ने अलग-अलग शोधों और आंकड़ों की समीक्षा कर यह समझने की कोशिश की कि इंसानी गतिविधियों का जलवायु पर कितना प्रभाव पड़ रहा है। उनका निष्कर्ष है कि ग्लोबल वार्मिंग के पीछे इंसानों की भूमिका को लेकर वैज्ञानिक सबूत लगातार मजबूत हुए हैं।

क्या अभी भी बचाई जा सकती है धरती?

वैज्ञानिकों के मुताबिक, ग्लोबल वार्मिंग के खतरों को कम करने के लिए ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन घटाना जरूरी है। इसके लिए कोयला, तेल और गैस पर निर्भरता कम करना, स्वच्छ ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाना और ऊर्जा की बचत करना महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं। नई स्टडी यह संदेश देती है कि धरती का बढ़ता तापमान केवल भविष्य की चिंता नहीं है, बल्कि इसका असर अभी से दिखाई दे रहा है। ऐसे में सरकारों, उद्योगों और आम लोगों के स्तर पर उठाए गए कदम आने वाले वर्षों में जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद कर सकते हैं।

Dolly Wasvani
By Dolly Wasvani

डोली वासवानी | People’s Institute of Media Studies से BAMC Student। पत्रकारिता की दुनिया में नई शुरु...

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