70 साल बाद भारत की जमीं पर जन्मे चीते के दो और शावकों की मौत, तीसरे की हालत गंभीर; एक शावक पहले ही तोड़ चुका है दम, 60 दिन में 6 मौतें

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70 साल बाद भारत की जमीं पर जन्मे चीते के दो और शावकों की मौत, तीसरे की हालत गंभीर; एक शावक पहले ही तोड़ चुका है दम, 60 दिन में 6 मौतें
भोपाल। 70 साल के लंबे अंतराल के बाद एमपी के कूनो में जन्में चार शावकों में से तीन की अब तक मौत हो चुकी है। मंगलवार को मादा चीता ज्वाला के एक शावक की मौत के बाद आज दो अन्य शावकों ने भी दम तोड़ दिया। चिंता बढाने वाली बात ये है कि बचे हुए चौथे शावक की हालत भी गंभीर बनी हुई है। इसके साथ ही नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से कूनो लाए गए तीन चीता साशा, दक्षा और उदय पहले ही काल के गाल में समा चुके हैं। इस तरह एमपी के कूनो में विदेश से लाए गए 20 व्यस्क चीतों में से केवल 17 और यहां जन्म लिए चार शावकों में से केवल एक शावक ही जीवित बचा है। हालांकि चौथे शावक की हालत भी गंभीर होने के कारण पार्क प्रबंधन की चिंता बढ़ गई है। सबसे ज्यादा चिंताजनक तथ्य यह है कि इन सभी की मौत केवल साठ दिनों के अतंराल पर हुई है।

दो दिन पहले ही हुई थी पहले शावक की मौत

कूनो नेशनल पार्क से लगातार बुरी खबरें आ रही हैं। दो दिन पहले ही यह दुखद सूचना आई थी कि ज्वाला नाम की मादा चीते के नन्हे शावक की मौत हुई है। देश में सात दशक से ज्यादा के अंतराल के बाद चीता शावकों के जन्म के बाद ये उम्मीद उठी थी कि भारत में चीतों के पुनर्वास को लेकर किए जा रहे प्रयास सफल होंगे। हालांकि अब तीन शावकों और तीन व्यस्क चीतों की मौत ने चीतों के पुनर्वास कार्यक्रम पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। चीतों की मौत को लेकर लगातार कूनो प्रशासन के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। https://twitter.com/psamachar1/status/1661686484317904898?t=gqsdiqrJt6j-exojt2tv1w&s=08

इससे पहले साशा, उदय, दक्षा और नन्हा शावक तोड़ चुका दम

सबसे पहले 27 मार्च को मादा चीता साशा की मौत हुई थी। इसके बाद 24 अप्रैल को नर चीते उदय ने भी दम तोड़ दिया था। 9 मई को मादा चीता दक्षा की मौत ने भारत में चीता पुनर्वास प्रोजेक्ट पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। इसके बाद एक शावक की मौत ने इस प्रोजेक्ट और एनटीसीए के प्रोटोकॉल और गाइडलाइन को ही संदेह के घेरे में ले लिया था। हालांकि कूनो प्रबंधन का दावा है कि यहां पदस्थ अमला न केवल चीतों की निरंतर निगरानी करता है, बल्कि उनके व्यवहार पर भी पैनी नजर रखता है। ऐसे में साठ दिनों में 6 चीतों की मौत ने इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर ही गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। ये भी पढ़ें- कूनो नेशनल पार्क से बुरी खबर, मादा चीता ज्वाला के शावक ने तोड़ा दम
Manisha Dhanwani
By Manisha Dhanwani

मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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