Running Record Controversy :अल्ट्रा मैराथन रनर कार्तिक पर आरोप-अपनी घड़ी दूसरे रनर को पहनाकर पूरा करते हैं टारगेट

भोपाल। अल्ट्रा मैराथन रनिंग के जरिए अलग पहचान बनाने वाले इंदौर के रनर कार्तिक जोशी फर्जी तरीके से अपनी मैराथन पूरी करते हैं। यह दावा किया है उनके सहयोगी धावक भोपाल के विवेक भदौरिया ने। बता दें, कार्तिक जोशी ने कारगिल युद्ध स्मारक से कन्याकुमारी तक की 4,200 किलोमीटर की ऐतिहासिक मैराथन दौड़ शुरू की है। वह विश्व रिकॉर्ड बनाने के लिए 55 दिनों में यह दौड़ पूरी कर सबसे कम उम्र के भारतीय धावक का खिताब अपने नाम करने के लिए 2 मई से रनिंग कर रहे हैं।
सहयोगी रनर विवेक ने जारी किया वीडियो
कार्तिक जोशी के इस टारगेट में भोपाल के विवेक भदौरिया भी सहयोगी धावक के रूप में दौड़ रहे हैं। इसी बीच विवेक ने एक वीडियो के जरिए यह आरोप लगाए हैं। इस वीडियो में कार्तिक साइकिल चलाते दिख रहे हैं और विवके उनकी घड़ी पहनकर दौड़ लगा रहे हैं। विवेक का आरोप है कि कार्तिक ने इस फर्जीवाड़े में उनका इस्तेमाल किया है और अपनी घड़ी विवेक को पहनाकर दौड़ लगवाकर बीच का टारगेट पूरा कराया।
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अंबाला में पता चला फर्जीवाड़ा
विवेक के मुताबिक वह इस टीम में शुरुआत से शामिल थे। उनका काम इस रनिंग के दौरान कार्तिक का ध्यान रखना और सपोर्ट करना था। इस दौरान जब वे लोग अंबाला में साइकिल खरीदने पहुंचे तो विवेक को कार्तिक ने अपनी घड़ी पहनकर डिस्टेंस कवर करने के लिए कहा। विवेक ने बताया - मैं रोजाना करीब 50 किमी तक का डिस्टेंस उनकी घड़ी पहनकर करता था, जबकि वह साइकिल से चलते थे। जब भी शहरी इलाका आता या उनकी यात्रा की रिकॉर्डिंग करने वाली कार उनके पास पहुंचती थी तो वे घड़ी पहनकर खुद दौड़ने लगते थे।
मैं थक कर लेटा तो मुझ पर गुस्सा किया
वे मुझे रात के समय रनिंग करवाते थे, ताकि कोई मुझे दौड़ता हुआ देख न लें।इस दौरान एक बार थकने के कारण मैं देर से उठा तो कार्तिक गुस्सा करने लगा और कहा कि अब तू रेस्ट ही कर। तब मुझे पहला झटका लगा कि मुझसे गलत काम करवाया जा रहा है और ऊपर से अच्छा व्यवहार भी नहीं करते। इसके बाद मैंने टीम छोड़ने का मन बना लिया।
मुझे धमकाया जा रहा
विवेक ने यह आरोप भी लगाया है कि इंदौर पहुंचने के करीब 30 किमी पहले कार्तिक की कार ने उन्हें टक्कर मारी और कार्तिक ने उनकी मदद भी नहीं की। विवेक ने कहा कि वह खुद किसी तरह अस्पताल पहुंचे और इलाज करवाकर सीधे घर लौट आए। इसके बाद जब उन्होंने विरोध शुरू किया तो उन्हें ही सोशल मीडिया पर बुली किया जाने लगा। अभी विवेक भोपाल में हैं।
कार्तिक बोले-सारे आरोप निराधार हैं
इस बारे में कार्तिक जोशी का कहना है कि विवेक ने जो आरोप लगाए हैं वह निराधार है। उसे इस रनिंग के बारे में टेक्निकल जानकारी नहीं है। अपनी तरफ से हमने इस रन को बहुत ट्रांसलेट रखा है। यदि फर्जीवाड़ा करना होता तो मैं इतनी बड़ी टीम लेकर नहीं चलता और इतना खर्च नहीं करता। मैं 2017 से अल्ट्रा मैराथन कर रहा हूं तब मप्र में कोई अल्ट्रा रन करता भी नहीं था। यदि फर्जी तरीके से रिकॉर्ड बनाना होता तो सालों पहले बना चुका होता। यह रन एक बड़े उद्देश्य के लिए है और मैं इसे जरूर पूरा करूंगा। चाहे कितने ही आरोप लगें या फिर कोई भी मुश्किल आए मैं इसे एक हिस्टोरिकल रन बनाकर रखूंगा।












