प्रसिद्ध कुबेरेश्वरधाम में 4 सितंबर को गूंजेगा राधा नाम, चांदी के झूले में विराजेंगे मुरली मनोहर

सीहोर। सावन की भक्ति और कांवड़ यात्रा के उल्लास के बाद अब प्रसिद्ध कुबेरेश्वरधाम भादो की कृष्ण भक्ति में रंगने जा रहा है। भगवान शिव की आराधना से गूंज रहे धाम में अब श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। 4 सितंबर को जन्माष्टमी महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच मनाया जाएगा। इस अवसर पर मुरली मनोहर का विशेष श्रृंगार किया जाएगा और भगवान चांदी के झूले में विराजमान होकर भक्तों को दिव्य दर्शन देंगे।
कांवड़ लेकर पहुंच रहे शिवभक्त
रविवार को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु कुबेरेश्वरधाम पहुंचे। इनमें ऐसे शिवभक्त भी शामिल रहे, जो सीवन नदी के तट से कांवड़ में पवित्र जल लेकर पैदल धाम पहुंचे। तेज धूप भी उनके कदमों को नहीं रोक सकी। कांवड़ यात्रियों के मुख से ‘श्री शिवाय नमस्तुभ्यं’, ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय महादेव’ के जयघोष लगातार गूंजते रहे। धाम पहुंचकर श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया और परिवार की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की।
भक्ति के साथ सेवा में जुटी विठलेश सेवा समिति
कांवड़ लेकर धाम पहुंचे श्रद्धालुओं का विठलेश सेवा समिति की ओर से पंडित विनय मिश्रा, पंडित समीर शुक्ला सहित अन्य सेवादारों ने स्वागत और सम्मान किया। समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी सहित अन्य सेवा व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं। तपती धूप में लंबी पैदल यात्रा कर पहुंचने वाले भक्तों के लिए सेवा कार्य आस्था के साथ मानवीय संवेदना की मिसाल भी बन रहे हैं।
सावन के बाद भी जारी है कांवड़ यात्रा
सावन माह का कांवड़ मेला समाप्त होने के बाद भी सीवन नदी से कुबेरेश्वरधाम तक कांवड़ यात्रा का क्रम थमा नहीं है। श्रद्धालु अब भी पवित्र जल लेकर भगवान शिव के दरबार में पहुंच रहे हैं। भक्तों का कहना है कि भगवान शिव के प्रति आस्था और विश्वास ही उन्हें कठिन पैदल यात्रा पूरी करने की शक्ति देता है। कुबेरेश्वरधाम में आने वाले श्रद्धालु कंकर-शंकर की पूजा-अर्चना के साथ भगवान शिव के दर्शन कर स्वयं को आध्यात्मिक शांति से जोड़ते हैं।
पंडित प्रदीप मिश्रा ने बताया शिव का जीवन संदेश
रविवार शाम अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने धाम पहुंचकर श्रद्धालुओं के साथ आरती की। भगवान शिव की महिमा बताते हुए उन्होंने कहा कि शिव केवल देवता नहीं, बल्कि त्याग, करुणा, शांति और सत्य के प्रतीक हैं। शिवजी का स्वरूप मनुष्य को जीवन जीने की बड़ी सीख देता है। उनके सिर पर चंद्रमा, जटाओं में गंगा, गले में सर्प और शरीर पर भस्म यह संदेश देते हैं कि जीवन में धन-दौलत और दिखावे से अधिक महत्व मन की शांति और आत्मज्ञान का है।
विष पीकर भी संसार की रक्षा का संदेश
पंडित प्रदीप मिश्रा ने समुद्र मंथन की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि जब विष निकला तो भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण कर संसार की रक्षा की और नीलकंठ कहलाए। इससे मनुष्य को यह सीख मिलती है कि महान वही है, जो दूसरों के दुख को कम करने के लिए स्वयं कष्ट सहने को तैयार रहे। उनका संदेश सुनकर श्रद्धालुओं के बीच आध्यात्मिक भाव और गहरा दिखाई दिया।
4 सितंबर को दोपहर से रात 12 बजे तक दर्शन
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी कुबेरेश्वरधाम में जन्माष्टमी महोत्सव गुरुदेव के सानिध्य एवं मार्गदर्शन में सादगी और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। 4 सितंबर शुक्रवार को दोपहर 12 बजे से रात 12 बजे तक श्रद्धालुओं को दर्शन का अवसर मिलेगा। जन्माष्टमी को लेकर धाम में विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
कल्लू जी महाराज का अभिषेक और विशेष श्रृंगार
जन्माष्टमी महोत्सव के तहत रात्रि 7 बजे कल्लू जी महाराज का विशेष अभिषेक एवं श्रृंगार दर्शन होगा। इसके बाद भक्तों को धार्मिक अनुष्ठानों और विशेष सजावट के बीच दर्शन का अवसर मिलेगा। जन्माष्टमी के इस आयोजन को लेकर धाम में तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
चांदी के झूले में दिखेंगे मुरली मनोहर
रात्रि 8 बजे भगवान मुरली मनोहर चांदी के झूले में विराजमान होंगे। इस दौरान भगवान के दिव्य स्वरूप के दर्शन भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगे। चांदी के झूले में सजे मुरली मनोहर का दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह देखा जा रहा है। इसके बाद रात्रि 9 बजे राधा नाम संकीर्तन होगा, जिससे पूरा धाम भक्ति और कृष्ण प्रेम के स्वर से गूंज उठेगा।
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देश-विदेश से जुड़ेगा भक्तों का भाव
जन्माष्टमी के अवसर पर देश-विदेश में लाइन दर्शन का आयोजन भी किया जाएगा। श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए दर्शन, पूजा-अर्चना और सेवा से जुड़ी व्यवस्थाओं को व्यवस्थित किया जा रहा है। ऐसे में 4 सितंबर को कुबेरेश्वरधाम में शिवभक्ति के साथ कृष्ण प्रेम का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।




















