सीहोर: बुजुर्ग महिला की हत्या मामले में तीन आरोपियों को उम्रकैद, नर्मदा में फेंका था शव

सीहोर। न्यायालय ने तीनों पर कुल 13 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया। मामले में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक मनोज जाट ने पैरवी की।
रात में घर से गायब हुई थी बुजुर्ग महिला
अभियोजन के अनुसार रेहटी थाना क्षेत्र के ग्राम दिगवाड़ निवासी रामधार ने जनवरी 2023 में अपनी मां बलिया बाई के लापता होने की सूचना पुलिस को दी थी। बताया जा रहा कि 3 जनवरी की रात करीब 10 बजे से 4 जनवरी की सुबह 5 बजे के बीच बुजुर्ग महिला अचानक घर से गायब हो गई थी। परिजनों ने तलाश शुरू की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। नर्मदा में मिला शव, शरीर पर मिले खौफनाक निशान तलाश के दौरान बाबरी क्षेत्र के तपोवन के पास नर्मदा नदी में महिला का शव तैरता मिला। पुलिस ने शव को नदी से बाहर निकाला तो मामला सामान्य गुमशुदगी से कहीं अधिक भयावह निकला। महिला की कमर में नायलॉन की मोटी रस्सी बंधी थी और रस्सी के दूसरे सिरे पर लोहे का लंगर लगा था। दोनों पैरों में पिंडलियों के पास कटे होने के निशान मिले। उसके शरीर से जेवरात भी गायब थे।
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हत्या के बाद लूटे थे सोने-चांदी के जेवर
जांच में सामने आया कि महिला के पास मौजूद चांदी की कड़ी, चूड़ियां, सोने का मंगलसूत्र और अन्य जेवरात गायब थे। पुलिस ने हत्या, लूट और घर में घुसने सहित विभिन्न धाराओं में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की। शव को इस तरह नदी में फेंकने का उद्देश्य भी पुलिस जांच का अहम हिस्सा रहा। जांच के दौरान पुलिस ने धर्मेंद्र पिता रामशंकर यदुवंशी, नीलेश पिता सुमरन सिंह यदुवंशी और दिलीप उर्फ भूरा पिता जागेश्वर सिंह यदुवंशी, निवासी बाबरी घाट, थाना शिवपुर, जिला नर्मदापुरम को गिरफ्तार किया। अभियोजन के अनुसार पूछताछ और विवेचना में आरोपियों की भूमिका सामने आई। पुलिस ने उनके कब्जे से मामले से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए।
गला दबाकर हत्या, फिर शव को नदी में फेंका
अभियोजन के मुताबिक आरोपियों ने बुजुर्ग महिला की गला दबाकर हत्या की। इसके बाद शव को नर्मदा नदी के किनारे ले जाया गया। महिला के पैरों को काटने के बाद शव की कमर में रस्सी बांधी गई और लोहे के लंगर की मदद से उसे नदी में फेंक दिया गया। महिला के आभूषण तीनों आरोपियों ने आपस में बांट लिए थे। पुलिस ने संपूर्ण जांच के बाद अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने लिखित अंतिम तर्क के साथ वैज्ञानिक साक्ष्य और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की। न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन के तर्कों का परीक्षण करने के बाद तीनों आरोपियों को दोषी माना।
कोर्ट ने 13 हजार रुपए के अर्थदंड लगाया
तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश, भैरूंदा ने तीनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 सहित अन्य धाराओं में दोषी ठहराया। धारा 302 के तहत तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। इसके साथ ही न्यायालय ने कुल 13 हजार रुपए के अर्थदंड से भी दंडित किया।




















