मृत्युभोज और तेरहवीं की परंपरा के खिलाफ यादव समाज की पहल, श्रद्धांजलि सभा में लिया सामाजिक बदलाव का संकल्प

बेगमगंज। समाज में वर्षों से चली आ रही मृत्युभोज और तेरहवीं जैसी परंपराओं को खत्म करने की दिशा में यादव समाज ने एक सराहनीय पहल की है। नगर के वार्ड क्रमांक 18 के पार्षद ओमकार यादव, बलवीर यादव और संतोष यादव की माता स्व. रूपा बाई यादव, पति रामसेवक यादव का 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया। परिवार ने पारंपरिक तेरहवीं के आयोजन के बजाय श्रद्धांजलि सभा आयोजित करने का निर्णय लिया। रविवार को नगर के गुप्ता मैरिज गार्डन में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में यादव समाज के वरिष्ठ समाजजन, जनप्रतिनिधि और विभिन्न समाजों के लोग शामिल हुए। सभी ने स्व. रूपा बाई यादव को श्रद्धासुमन अर्पित कर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
तेरहवीं के बजाय श्रद्धांजलि सभा का फैसला
परिवार की ओर से लिए गए इस निर्णय को सामाजिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया। सभा के दौरान समाजजनों ने मृत्युभोज और तेरहवीं जैसी परंपराओं पर चर्चा की और इनके कारण परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक तथा सामाजिक दबाव को कम करने की जरूरत बताई। वक्ताओं ने कहा कि परिवार में किसी सदस्य के निधन के बाद परिजन पहले ही गहरे दुख से गुजर रहे होते हैं। ऐसे समय में सामाजिक परंपराओं के नाम पर अतिरिक्त खर्च का दबाव उचित नहीं है। दिवंगत व्यक्ति को याद करने और श्रद्धांजलि देने के लिए सादगीपूर्ण आयोजन ज्यादा सार्थक हो सकता है।
गौ सेवा के लिए 11 हजार रुपए देने का संकल्प
स्व. रूपा बाई यादव की तेरहवीं के स्थान पर श्रद्धांजलि सभा के साथ ब्राह्मण भोज का आयोजन किया गया। इसके साथ ही परिवार की ओर से सामाजिक कामधेनु सेवा समिति को गौ सेवा के लिए 11 हजार रुपए दान करने का संकल्प लिया गया। परिवार के इस निर्णय की सभा में मौजूद समाजजनों ने सराहना की। कई लोगों ने भी ऐसी सामाजिक कुरीतियों को बढ़ावा नहीं देने और भविष्य में सादगीपूर्ण तरीके से दिवंगत परिजनों को श्रद्धांजलि देने का संकल्प लिया।
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सामाजिक खर्च और दिखावे से बचने की अपील
सभा में वक्ताओं ने कहा कि मृत्यु के बाद होने वाले अनावश्यक खर्च और सामाजिक दिखावे से कई परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। जरूरत इस बात की है कि समाज ऐसी परंपराओं में सकारात्मक बदलाव लाए और परिवार की स्थिति को ध्यान में रखते हुए सरल तरीके अपनाए। समाजजनों ने कहा कि श्रद्धांजलि सभा के माध्यम से दिवंगत व्यक्ति की स्मृतियों को याद करने के साथ समाजहित और सेवा कार्यों को बढ़ावा दिया जा सकता है।
पहले भी यादव समाज में हो चुकी हैं ऐसी पहल
यादव समाज में इससे पहले भी कई परिवार तेरहवीं जैसी परंपरा को छोड़कर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन कर चुके हैं। समाजजनों के अनुसार, लगातार सामने आ रही ऐसी पहल धीरे-धीरे सामाजिक बदलाव का रूप ले रही है। कई परिवार अब मृत्यु के बाद होने वाले अनावश्यक खर्च और दिखावे से बचते हुए सादगीपूर्ण श्रद्धांजलि सभा को प्राथमिकता दे रहे हैं। स्व. रूपा बाई यादव के परिवार द्वारा लिया गया यह निर्णय भी इसी सामाजिक सोच को आगे बढ़ाने वाली पहल के रूप में देखा जा रहा है।
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सेवा और सामाजिक बदलाव का दिया संदेश
श्रद्धांजलि सभा में दिवंगत को श्रद्धांजलि देने के साथ समाज में सकारात्मक बदलाव का संदेश भी दिया गया। तेरहवीं और मृत्युभोज के स्थान पर सादगीपूर्ण आयोजन तथा गौ सेवा के लिए दान का संकल्प इस बात को सामने लाता है कि परंपराओं के साथ-साथ समाज की जरूरतों के अनुसार सकारात्मक बदलाव भी किए जा सकते हैं। इस पहल के जरिए यादव समाज ने सामाजिक कुरीतियों को कम करने, अनावश्यक खर्च से बचने और सेवा कार्यों को बढ़ावा देने का संदेश दिया।




















