कोलकाता। पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए राजधानी कोलकाता में छापेमारी की है। यह कार्रवाई SSC भर्ती घोटाले से जुड़ी है, जिसमें राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी पहले से ही जांच के दायरे में हैं। शनिवार को हुई इस रेड ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है और इस पूरे मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।
ED की टीम ने कोलकाता में दो प्रमुख स्थानों पर छापेमारी की जिनमें पहला ठिकाना पार्थ चटर्जी का नाकतला स्थित आवास था, जबकि दूसरा स्थान प्रसन्न कुमार रॉय का न्यूटाउन स्थित कार्यालय बताया जा रहा है। दोनों जगहों पर एजेंसी ने कई घंटों तक तलाशी अभियान चलाया और दस्तावेजों के साथ-साथ डिजिटल साक्ष्यों को खंगाला। माना जा रहा है कि इन जगहों से जांच से जुड़े अहम सुराग मिल सकते हैं, जो मामले को और आगे बढ़ाने में मदद करेंगे।
जानकारी के मुताबिक, ED ने पार्थ चटर्जी को SSC घोटाले से जुड़े मामले में तीन बार समन जारी किया था और उन्हें जांच अधिकारी के सामने पेश होने के लिए कहा गया था। हालांकि, उन्होंने किसी भी समन का पालन नहीं किया और एक बार भी एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए। इसी को देखते हुए ED ने सख्त रुख अपनाते हुए उनके घर पर छापेमारी का फैसला लिया। इस कार्रवाई को एजेंसी की बढ़ती सख्ती और मामले को गंभीरता से लेने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
SSC भर्ती घोटाला पश्चिम बंगाल के सबसे चर्चित और बड़े घोटालों में शामिल है, जिसमें सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। इस घोटाले में प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती, SSC सहायक शिक्षकों की नियुक्ति और ग्रुप C व D कर्मचारियों की भर्ती में अनियमितताओं की बात सामने आई है। आरोप है कि, इन भर्तियों में नियमों को दरकिनार कर पैसों के आधार पर नियुक्तियां दी गईं। ED इस पूरे मामले में मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है।
पार्थ चटर्जी उस समय राज्य के शिक्षा मंत्री थे, जब ये भर्तियां की गई थीं। उन पर आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों में उनकी भूमिका रही या उन्होंने इन अनियमितताओं को नजरअंदाज किया। उन्हें जुलाई 2022 में इस मामले में गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद लंबी कानूनी प्रक्रिया चली। अंततः 2025 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई, लेकिन इसके बावजूद जांच एजेंसियां उनके खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही हैं और नए सबूत जुटाने में लगी हैं।
[featured type="Featured"]
प्रसन्न कुमार रॉय को पार्थ चटर्जी का करीबी माना जाता है और इस घोटाले में उनकी भूमिका भी जांच के दायरे में है। फिलहाल वह जेल में बंद हैं, लेकिन ED को शक है कि उनके कार्यालय से महत्वपूर्ण दस्तावेज और वित्तीय लेन-देन से जुड़े सबूत मिल सकते हैं। इसी वजह से उनके न्यूटाउन स्थित दफ्तर पर भी छापेमारी की गई, ताकि मामले की कड़ियों को और स्पष्ट किया जा सके।
हालांकि, ED की ओर से आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए गए हैं। इनमें लैपटॉप, हार्ड डिस्क और अन्य डिजिटल उपकरण शामिल हैं, जिनकी जांच की जा रही है। इसके अलावा कुछ संदिग्ध वित्तीय रिकॉर्ड भी मिले हैं, जिनसे मनी ट्रेल का पता लगाने की कोशिश की जाएगी। इन सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
यह पूरी कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब राज्य में चुनाव का माहौल बना हुआ है। ऐसे में ED की रेड ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। विपक्ष इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई बता रहा है, जबकि सत्तारूढ़ दल की ओर से इसे राजनीतिक दबाव और बदले की कार्रवाई के रूप में देखा जा सकता है। इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में सियासत और तेज होने की संभावना है।
[breaking type="Breaking"]
इसी बीच ED ने जमीन हड़पने और धोखाधड़ी से जुड़े एक अन्य मामले में भी कार्रवाई की है, जिसमें कई ठिकानों पर छापेमारी की गई। इस मामले में अमित गांगुली और उनके सहयोगियों पर आरोप है कि, उन्होंने फर्जी दस्तावेजों के जरिए कीमती जमीनों पर अवैध कब्जा किया। जांच के दौरान कई बैंक खातों को फ्रीज किया गया है और डिजिटल साक्ष्यों को जब्त किया गया है, जिनकी गहन जांच जारी है।
जांच में सामने आया है कि यह पूरा गिरोह एक सुनियोजित तरीके से काम करता था। सबसे पहले फर्जी एग्रीमेंट, पावर ऑफ अटॉर्नी और सेल डीड जैसे दस्तावेज तैयार किए जाते थे। इसके बाद अदालत में मामला दाखिल कर आदेश लिया जाता था और फिर सरकारी रिकॉर्ड में बदलाव कर जमीन पर कब्जे को वैध दिखाया जाता था। अंत में इन जमीनों पर रियल एस्टेट प्रोजेक्ट बनाकर फ्लैट बेचे जाते थे, जिससे आरोपियों ने भारी मुनाफा कमाया।
ED की ताजा कार्रवाई के बाद यह माना जा रहा है कि, आने वाले समय में इस मामले में और तेजी आएगी। एजेंसी अन्य आरोपियों से पूछताछ कर सकती है और नए नाम सामने आ सकते हैं। इसके अलावा छापेमारी में मिले सबूतों के आधार पर आगे गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। जांच का दायरा बढ़ने के साथ ही इस पूरे घोटाले के और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।