मानसून सत्र के लिए सर्वदलीय बैठक :सरकार की विपक्ष को नसीहत, रिजिजू बोले- संसद चलाना सभी की साझा जिम्मेदारी

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले केंद्र सरकार ने सभी राजनीतिक दलों के साथ सर्वदलीय बैठक की। बैठक के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार ने सभी दलों के सुझाव और चिंताओं को गंभीरता से सुना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगामी सत्र सकारात्मक माहौल में चलेगा और सभी दल लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन करेंगे।
'देश चाहता है संसद चले', विपक्ष से की खास अपील
रिजिजू ने विपक्षी दलों से अपील करते हुए कहा कि जनता चाहती है कि संसद बिना किसी व्यवधान के चले। उन्होंने कहा कि विपक्ष को अपने मुद्दे पूरी मजबूती से उठाने का अधिकार है, लेकिन ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाना चाहिए जिससे सदन की कार्यवाही बाधित हो, संसद की गरिमा प्रभावित हो या लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचे।
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एनसीपीआई सांसदों के मुद्दे पर स्पीकर के अधिकार का हवाला
एनसीपीआई के 20 सांसदों की ओर से अलग दल के रूप में मान्यता और सदन में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग पर रिजिजू ने कहा कि यह मामला लोकसभा अध्यक्ष के विचाराधीन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी दल को मान्यता देना पूरी तरह संसदीय प्रक्रिया का हिस्सा है और इस पर फैसला स्पीकर के स्तर पर होगा। सरकार इस प्रक्रिया पर कोई टिप्पणी नहीं करेगी।
'लोकसभा सभी सांसदों की है'
रिजिजू ने कहा कि जब संबंधित सांसदों का मामला लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष लंबित है, तब उन्हें सर्वदलीय बैठक से बाहर रखने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने दोहराया कि लोकसभा किसी एक दल की नहीं, बल्कि सभी निर्वाचित सांसदों की है और सरकार का दायित्व सभी दलों के साथ संवाद बनाए रखना है।
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परिसीमन विधेयक पर सरकार ने कहा
परिसीमन विधेयक को लेकर उठ रहे सवालों पर रिजिजू ने कहा कि फिलहाल लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय की ओर से मानसून सत्र के लिए आठ विधेयकों की सूची जारी की गई है। यदि भविष्य में कोई अतिरिक्त विधेयक लाने का फैसला किया जाता है तो पहले बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) में चर्चा होगी और विपक्षी दलों को इसकी पूर्व सूचना दी जाएगी।
हर सांसद को अपनी बात रखने का अधिकार
रिजिजू ने कहा कि शून्यकाल, विशेष उल्लेख और अन्य संसदीय प्रक्रियाएं नियमित व्यवस्था का हिस्सा हैं। प्रत्येक सांसद को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार संसदीय कार्यों को पारदर्शी ढंग से संचालित करेगी और नए सरकारी कार्यों की जानकारी समय पर सभी दलों के साथ साझा की जाएगी।












