बागी TMC सांसदों को बुलाना पड़ा भारी:सर्वदलीय बैठक में विपक्ष का हंगामा

संसद के मानसून सत्र से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों को बुलाए जाने पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ नाराजगी जताते हुए प्रतीकात्मक वॉकआउट किया और बाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद दोबारा बैठक में शामिल हो गए।
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सर्वदलीय बैठक में विपक्ष का हंगामा
बागी TMC सांसदों को बुलाना पड़ा भारी

सर्वदलीय बैठक की शुरुआत से ही TMC के बागी सांसदों को आमंत्रित किए जाने का मुद्दा विपक्ष के निशाने पर रहा। विपक्षी नेताओं ने इसे संसदीय परंपराओं के खिलाफ बताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। बैठक से बाहर निकलकर नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की और फिर वापस बैठक में शामिल होकर अपनी बात रखी। वहीं, सरकार ने संसद का मानसून सत्र सुचारु रूप से चलाने के लिए सभी दलों से सहयोग की अपील की।

टीएमसी के बागी सांसदों को बुलाने पर शुरू हुआ विवाद

संसद के मानसून सत्र से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक में उस समय माहौल गरमा गया, जब तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों को भी बैठक में आमंत्रित किए जाने का मामला सामने आया। टीएमसी नेताओं ने इस पर कड़ा विरोध जताया और सवाल उठाया कि आधिकारिक सांसदों की जगह पहले बागी सांसदों की सूची क्यों दिखाई गई। विपक्षी दलों ने इसे संसदीय मर्यादा के खिलाफ बताते हुए सरकार के फैसले पर आपत्ति दर्ज कराई। विवाद बढ़ने के बाद कई विपक्षी दलों ने बैठक से प्रतीकात्मक वॉकआउट कर दिया।

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सरकार का कदम अलोकतांत्रिक-धर्मेंद्र यादव 

बैठक के बाद समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि टीएमसी नेताओं ने स्पष्ट तौर पर सवाल उठाया कि आधिकारिक सांसदों की बजाय बागी सांसदों को प्राथमिकता क्यों दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का यह कदम लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। विपक्ष ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया और इसी वजह से बैठक से बाहर निकलकर अपना विरोध दर्ज कराया। इसी के साथ सपा सांसद ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

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महुआ मोइत्रा ने सरकार से पूछे कई सवाल

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जो सांसद पार्टी छोड़ चुके हैं, उन्हें सर्वदलीय बैठक में बुलाने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि यह गलत परंपरा की शुरुआत है और इससे संसदीय व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। महुआ ने आरोप लगाया कि जिन सांसदों के विलय को अभी तक लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी नहीं मिली और जिनकी अयोग्यता संबंधी याचिकाएं लंबित हैं, उन्हें बैठक का निमंत्रण किस आधार पर दिया गया। उन्होंने इसे पूरी तरह अनुचित बताया।

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विपक्ष ने एकजुट होकर दर्ज कराया विरोध

विवाद बढ़ने के बाद कांग्रेस के प्रमोद तिवारी, समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव, एनसीपी (शरद पवार गुट) की सुप्रिया सुले, टीएमसी की महुआ मोइत्रा समेत कई विपक्षी नेता बैठक से बाहर निकल गए। बाहर आकर सभी नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की और सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। महुआ मोइत्रा ने कहा कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, जेएमएम, आम आदमी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वाम दलों और शिवसेना (यूबीटी) समेत पूरे विपक्ष ने प्रतीकात्मक वॉकआउट किया। विरोध दर्ज कराने के बाद सभी विपक्षी नेता दोबारा बैठक में शामिल हो गए।

सरकार ने सहयोग की अपील की 

जेएमएम की राज्यसभा सांसद महुआ माझी ने कहा कि बीजेपी लगातार दूसरे दलों के सांसदों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है। उन्होंने महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर भी अपनी पार्टी की चिंताएं सामने रखीं। वहीं संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है और इसी उद्देश्य से सभी दलों की बैठक बुलाई गई थी। सरकार विपक्ष की बात सुनेगी और उम्मीद करती है कि विपक्ष भी सकारात्मक सहयोग करेगा, क्योंकि संसद जितनी बेहतर चलेगी, उसका फायदा पूरे देश को मिलेगा।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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