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केरल सीएम का सुवेंदु अधिकारी को लेटर...पासपोर्ट रिन्यूअल मामले में हस्तक्षेप की मांग की, वरिष्ठ पत्रकार से जुड़ा है मामला

राजगोपाल के अनुसार, पश्चिम बंगाल में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान के दौरान उनका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया। अधिकारियों का कहना था कि वर्ष 2002 की मतदाता सूची में उनका या उनके पिता का नाम नहीं मिला।
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पासपोर्ट रिन्यूअल मामले में हस्तक्षेप की मांग की, वरिष्ठ पत्रकार से जुड़ा है मामला

तिरुवनंतपुरम। केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने 29 जून को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर वरिष्ठ पत्रकार और द टेलीग्राफ के पूर्व संपादक आर. राजगोपाल के पासपोर्ट नवीनीकरण (रिन्यू) के मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। मामला उस समय सामने आया जब वोटर लिस्ट से नाम हटने के बाद पुलिस की नेगेटिव वेरिफिकेशन रिपोर्ट के कारण उनका पासपोर्ट रिन्यू नहीं हो सका।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजगोपाल ने वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के खिलाफ अपील कर रखी है, लेकिन जब तक प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक पासपोर्ट का नवीनीकरण भी अटका हुआ है। उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए राज्य सरकार से आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया।

कौन हैं आर. राजगोपाल?

आर. राजगोपाल देश के वरिष्ठ पत्रकारों में गिने जाते हैं। उन्होंने तीन दशक से अधिक समय तक पत्रकारिता की है और कोलकाता से प्रकाशित प्रतिष्ठित अखबार द टेलीग्राफ के संपादक भी रह चुके हैं। वे लंबे समय से पश्चिम बंगाल में रह रहे हैं।

राजगोपाल, केरल के प्रसिद्ध गांधीवादी और समाजसेवी प्रोफेसर वी. रामदास के बेटे हैं। प्रोफेसर रामदास गांधी स्मारक निधि के राज्य सचिव रह चुके थे और सामाजिक कार्यों के लिए उनका काफी सम्मान किया जाता था।

/img/95/1782806851717पासपोर्ट रिन्यू क्यों अटका?

राजगोपाल के अनुसार, पश्चिम बंगाल में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान के दौरान उनका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया। अधिकारियों का कहना था कि वर्ष 2002 की मतदाता सूची में उनका या उनके पिता का नाम नहीं मिला। राजगोपाल का दावा है कि वे पिछले 25 वर्षों से अधिक समय से कोलकाता के बालीगंज विधानसभा क्षेत्र में रह रहे हैं और 2010 से लगातार मतदाता हैं।

इसके बावजूद उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया। इसी दौरान पासपोर्ट के पुलिस सत्यापन में भी नेगेटिव रिपोर्ट चली गई, जिसके कारण उनका पासपोर्ट रिन्यू नहीं हो पाया।

केरल के मुख्यमंत्री ने क्यों किया हस्तक्षेप?

मुख्यमंत्री सतीशन ने अपने पत्र में लिखा कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया जारी है, लेकिन केवल पुलिस रिपोर्ट के आधार पर पासपोर्ट नवीनीकरण में देरी उचित नहीं है। उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार से मामले पर तुरंत ध्यान देने और आवश्यक हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। उन्होंने यह पत्र सोशल मीडिया पर भी साझा किया और कहा कि ऐसे मामलों में प्रशासन को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।

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शशि थरूर ने भी जताया समर्थन

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी मुख्यमंत्री के कदम का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह एक मुख्यमंत्री द्वारा दूसरे मुख्यमंत्री से किया गया महत्वपूर्ण हस्तक्षेप है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि पासपोर्ट केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र का विषय है, फिर भी राज्य सरकार की भूमिका पुलिस सत्यापन में अहम होती है।

राजगोपाल ने क्या- क्या सवाल उठाए?

राजगोपाल का कहना है कि यह सिर्फ उनके पासपोर्ट का मामला नहीं है, बल्कि यह सवाल भी है कि क्या वोटर लिस्ट से जुड़े आंकड़ों का इस्तेमाल दूसरी सरकारी प्रक्रियाओं में किया जा सकता है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से यह भी पूछा कि क्या कोई सरकारी आदेश या नियम है, जिसमें पासपोर्ट सत्यापन से पहले संबंधित व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट में होना अनिवार्य बताया गया हो।

यह मामला अब केवल एक व्यक्ति के पासपोर्ट तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि चुनावी रिकॉर्ड, पुलिस सत्यापन और सरकारी प्रक्रियाओं के बीच तालमेल पर भी बहस का विषय बन गया है।

Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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