भारत के मुसलमान वहां जाकर देखें...भोपाल में गरजे बागेश्वर बाबा, राम मंदिर मामले पर बोले- महादंड मिलेगा

भोपाल में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मंगलवार को कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने खास तौर पर राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा (दान) चोरी विवाद, धर्म, आस्था, मंदिरों के प्रबंधन और विदेशों में धार्मिक परंपराओं को लेकर टिप्पणी की। उनके बयान में धार्मिक भावनाओं, जांच प्रक्रिया और सामाजिक एकता जैसे मुद्दे शामिल रहे।
राम मंदिर चंदा चोरी विवाद पर प्रतिक्रिया
धीरेंद्र शास्त्री ने राम मंदिर से जुड़े हाल के विवाद पर कहा कि यह मामला सिर्फ एक सामान्य घटना नहीं है। उनके अनुसार, यह लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि जब किसी धार्मिक स्थान या मंदिर से जुड़ा मामला सामने आता है, तो उससे लोगों की भावनाएं आहत होती हैं। यह सिर्फ एक मंदिर का मामला नहीं होता, बल्कि पूरे सनातन समाज की प्रतिष्ठा और विश्वास से जुड़ जाता है।
'धर्म का अपमान करने वालों को मिलेगा परिणाम'
अपने बयान में धीरेंद्र शास्त्री ने धार्मिक ग्रंथों का उदाहरण देते हुए कहा कि धर्म और आस्था का अपमान करने वालों को अपने कर्मों का परिणाम जरूर मिलता है। उन्होंने रावण का उदाहरण देते हुए कहा कि जब रावण ने माता सीता (जानकी) का हरण किया था, तो उसका अंत उसके पूरे वंश के विनाश के रूप में हुआ। इसी तरह, जो लोग धार्मिक स्थलों की पवित्रता को नुकसान पहुंचाते हैं, उन्हें भी अपने कर्मों का फल भोगना पड़ता है।
उन्होंने इसे महादंड की तरह बताया और कहा कि धर्म के खिलाफ काम करने वाले लोगों को इसका गंभीर परिणाम भुगतना पड़ता है।
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जांच एजेंसियों और FIR पर बयान
राम मंदिर चंदा चोरी मामले में संघ और चंपत राय का नाम आने और एफआईआर दर्ज न होने को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में पूरी जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मामले में जांच एजेंसियां और एसआईटी काम कर रही हैं, इसलिए उन्हें अपना काम करने देना चाहिए। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच पूरी होना जरूरी है।
मंदिरों के प्रबंधन पर विचार
धीरेंद्र शास्त्री ने मंदिरों के प्रबंधन को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि मंदिरों की व्यवस्था और सेवा ऐसे लोगों के हाथ में होनी चाहिए जो पूरी तरह से भगवान और सनातन परंपरा के प्रति समर्पित हों। उन्होंने यह भी कहा कि शंकराचार्य जैसी धार्मिक परंपराओं से जुड़े लोग मंदिरों के संचालन में अधिक उपयुक्त हो सकते हैं।
उनके अनुसार, आजकल कुछ धर्म विरोधी ताकतें ऐसी परिस्थितियां बना रही हैं, जिससे मंदिरों और संतों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंदिरों की पवित्रता और व्यवस्था बनाए रखना बहुत जरूरी है।
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भारत के मुसलमानों को वहां जाकर देखना चाहिए
अपने संबोधन में उन्होंने भारत के मुसलमानों को इंडोनेशिया का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि भारत के मुसलमानों को वहां जाकर देखना चाहिए कि किस तरह अलग-अलग धर्मों के लोग साथ रहते हैं।
उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया में कुछ लोग जो पांच वक्त की नमाज पढ़ते हैं, वे भी दीपावली जैसे त्योहारों में शामिल होते हैं और राम कथा सुनते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि बाली में हिंदू नववर्ष के समय एक विशेष परंपरा होती है, जिसमें लोग निर्जला मौन व्रत रखते हैं। उस समय वहां के मुसलमान भी सम्मान के तौर पर अजान नहीं देते, ताकि हिंदू परंपरा का सम्मान बना रहे।











