1 करोड़ से ज्यादा खर्च, फिर भी सूखे नल! कटनी के बैगा बहुल गांव में जल संकट

कटनी। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन कटनी जिले के ढीमरखेड़ा विकासखंड की ग्राम पंचायत कोठी में हालात कुछ और ही तस्वीर बयां कर रहे हैं। यहां पिछले करीब 4 से 5 महीनों से नल-जल योजना बंद पड़ी है। घरों में नल तो लगा दिए गए हैं, लेकिन उनमें पानी नहीं आ रहा। ऐसे में बैगा आदिवासी परिवारों को पेयजल के लिए परेशान होना पड़ रहा है। गांव की महिलाओं को पानी के लिए दूर-दराज के हैंडपंपों तक जाना पड़ रहा है। मीलों दूर से पानी ढोकर लाने की मजबूरी के बीच ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि जब घरों तक नल पहुंचाने के लिए योजना पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, तो फिर उन्हें पानी क्यों नहीं मिल रहा?
1 करोड़ से अधिक की लागत से स्वीकृत हुई थी योजना
ग्राम पंचायत कोठी के सरपंच सीताराम बैगा के मुताबिक, पंचायत में जिले के सर्वाधिक बैगा आदिवासी परिवार निवास करते हैं। प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत घर-घर शुद्ध पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से यहां 1 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से नल-जल योजना स्वीकृत की गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) और संबंधित ठेकेदार की लापरवाही के चलते निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हुआ है। यही वजह है कि योजना का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है।

ठेकेदार पर कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य अधूरा होने के बावजूद विभाग की ओर से ग्राम पंचायत पर योजना का हैंडओवर लेने का दबाव बनाया जा रहा है। इस मामले में ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने कई बार वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को शिकायतें भी दीं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। महीनों से मोटर बंद होने और नलों से पानी नहीं आने के कारण गांव में पेयजल संकट बना हुआ है। अब ग्रामीण मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार ठेकेदार पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
बिजली बिल बकाया होने से बाधित हुई जलापूर्ति: SDM
मामले में ढीमरखेड़ा की एसडीएम निधि गोहल ने बताया कि उन्होंने PHE विभाग के एसडीओ से जानकारी ली है। विभाग की ओर से बिजली बिल का समय पर भुगतान नहीं होने के कारण जलापूर्ति बाधित होने की बात कही गई है। एसडीएम ने यह भी कहा कि यदि निर्माण कार्य अधूरा होने के बावजूद ग्राम पंचायत पर योजना का हैंडओवर लेने का दबाव बनाया जा रहा है, तो इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। ग्रामीणों को तत्काल राहत देने के लिए अधिकारियों को जल्द से जल्द पेयजल आपूर्ति बहाल करने के निर्देश दिए गए हैं।




















