कन्या पूजन नवरात्रि का एक महत्वपूर्ण और पवित्र हिस्सा है, जो हमें सेवा, सम्मान और श्रद्धा का संदेश देता है। कन्याओं को देवी का रूप मानकर उनकी पूजा करना न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करता है, बल्कि घर में सुख, शांति और समृद्धि भी लाता है।
कन्या पूजन के दौरान कन्याओं के पैर धोना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि यह भक्ति, सेवा और विनम्रता का प्रतीक है। शास्त्रों के अनुसार, 'या देवी सर्वभूतेषु…' के आधार पर हर कन्या में देवी का वास माना जाता है। इसलिए उनके चरण धोना देवी की पूजा का ही एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति यह विधि श्रद्धा से करता है, उसके परिवार पर माता की कृपा बनी रहती है।
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कन्याओं को केवल मां दुर्गा ही नहीं, बल्कि मां लक्ष्मी का भी रूप माना जाता है। मान्यता है कि जब कन्याएं घर में आती हैं तो वह अपने साथ सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आती हैं। उनके चरण धोकर और उन्हें भोजन कराकर भक्त देवी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इससे आर्थिक उन्नति के रास्ते खुलते हैं और घर में खुशहाली बनी रहती है।
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वास्तु शास्त्र में भी कन्या पूजन का विशेष महत्व बताया गया है। इसके अनुसार, कन्याओं का सम्मान और उनके चरण धोने से घर में धन की कमी दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। पूजन के दौरान दिशा का भी ध्यान रखा जाता है-पूर्व दिशा की ओर मुख करके अर्घ्य और पाद्य देना चाहिए, दक्षिण-पूर्व की ओर मुख करके आरती करनी चाहिए और उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके टीका लगाना शुभ माना जाता है।