सुरक्षा बलों ने तय नियमों और प्रक्रिया के तहत उसका आत्मसमर्पण कराया। इस घटनाक्रम को क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों के कमजोर पड़ने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
BBM के 15 नक्सली भी करेंगे सरेंडर
इसी कड़ी में 23 फरवरी को छत्तीसगढ़–ओडिशा सीमा पर सक्रिय CPI (माओवादी) संगठन को एक और बड़ा झटका लगा है। संगठन के बलांगीर-बरगढ़-महासमुंद (BBM) डिवीजन से जुड़े 15 नक्सलियों ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण करने का ऐलान किया है।
मिली जानकारी के मुताबिक, पश्चिम सब ब्यूरो के सचिव ‘विकास’ ने इस संबंध में विजय शर्मा को एक विस्तृत पत्र भेजा है। पत्र में कहा गया है कि संगठन के सभी सदस्य हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने के लिए तैयार हैं और वे सरकार से रेडियो संदेश के जरिए सुरक्षा की गारंटी चाहते हैं।
गृह मंत्री का बयान आया सामने
कांकेर में नक्सवादियों के आत्मसमर्पण पर गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा है कि माओवादी संगठन की ओर से रेडियो संदेश के माध्यम से सुरक्षा की गारंटी मांगी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार इस मांग को गंभीरता से ले रही है और आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।
गृह मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार पहले से ही प्रभावी पुनर्वास नीति पर काम कर रही है, ताकि हिंसा का रास्ता छोड़ने वाले लोग सम्मानजनक जीवन की ओर लौट सकें। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार जल्द ही एक वीडियो संदेश जारी करेगी, जिससे आत्मसमर्पण की पूरी प्रक्रिया सुरक्षित, पारदर्शी और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।
छत्तीसगढ़ सरकार से ये प्रमुख मांगे भी की
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रेडियो संदेश के जरिए सुरक्षा की गारंटी
आत्मसमर्पण करने वाले कैडर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार से आधिकारिक रेडियो संदेश जारी करने की मांग। -
कंबिंग ऑपरेशन रोकने का अनुरोध
आत्मसमर्पण प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे कंबिंग ऑपरेशन को अस्थायी रूप से रोकने की अपील। -
पुनर्वास प्रक्रिया में विश्वास
सरकार की पुनर्वास नीति पर भरोसा जताते हुए सम्मानजनक जीवन, रोजगार और सामाजिक पुनर्स्थापन की अपेक्षा। -
माओवादी कैडर पर दर्ज मामलों और जेल में बंद साथियों को लेकर स्पष्ट नीति
आत्मसमर्पण करने वाले कैडर और जेल में बंद साथियों के मामलों में सरकार की स्पष्ट और मानवीय नीति की मांग। -
संविधान के दायरे में राजनीतिक गतिविधि की अनुमति (सुझाव)
हिंसा छोड़ने के बाद संविधान के तहत शांतिपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने की अनुमति देने का सुझाव।











