मंडला:कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत का खुलासा; 4 शावकों की मौत से मचा हड़कंप, इन कारणों से गई थी जान

मंडला। कान्हा में बाघों की मौत के पीछे वायरस की पुष्टि हुई है। जांच में केनाइन डिस्टेंपर वायरस सामने आया है। यह बीमारी जानवरों में भूख खत्म कर देती है। अब पूरे रिजर्व में अलर्ट जारी कर दिया गया है।
मौत के पीछे वायरस का खुलासा
कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघिन T-141 और उसके चार शावकों की मौत ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया था। जांच के लिए सैंपल जबलपुर वेटरिनरी साइंस कॉलेज भेजे गए। रिपोर्ट में केनाइन डिस्टेंपर वायरस की पुष्टि हुई है। यह खुलासा बेहद चौंकाने वाला है क्योंकि यह बीमारी तेजी से फैलती है। वन विभाग अब पूरे मामले को गंभीरता से देख रहा है। इससे अन्य वन्यजीवों पर भी खतरा मंडराने लगा है।
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भूख और निमोनिया से तड़पकर मौत
विशेषज्ञों के अनुसार यह वायरस जानवरों की भूख खत्म कर देता है। संक्रमित होने के बाद जानवर खाना छोड़ देते हैं और धीरे-धीरे कमजोर हो जाते हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शावकों के पेट खाली पाए गए। इससे साफ है कि वे कई दिनों से भूखे थे। साथ ही वायरस निमोनिया भी पैदा करता है। इन दोनों कारणों से उनकी दर्दनाक मौत हो गई।
कुत्तों से फैला संक्रमण
वन विभाग का मानना है कि यह वायरस आसपास के गांवों से जंगल में पहुंचा। संक्रमित कुत्ते जंगल में आने वाले लोगों के साथ अंदर तक चले जाते हैं। यही कुत्ते इस बीमारी के वाहक बने। जंगल में इनके संपर्क में आने से बाघ संक्रमित हो गए। यह स्थिति वन्यजीव संरक्षण के लिए बड़ा खतरा बन गई है।
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साल 2018 में कई शेरों की हो चुकी हैं मौत
केनाइन डिस्टेंपर वायरस पहले भी बड़े नुकसान का कारण बन चुका है। साल 2018 में गिर नेशनल पार्क में इसी वायरस से कई शेरों की मौत हुई थी। उस घटना से इलाके से हड़कंप मच गया था। अब कान्हा में वही खतरा फिर सामने आया है। इससे वन्यजीव प्रबंधन की चुनौतियां और बढ़ गई हैं। विशेषज्ञ इसे गंभीर चेतावनी मान रहे हैं।
लापरवाही पर उठे सवाल
वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट ने इस घटना पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वन कर्मचारियों की लापरवाही से यह स्थिति बनी। जंगल में अवैध गतिविधियां रोकने में कमी रही। यदि समय रहते सख्ती बरती जाती तो शायद यह स्थिति टल सकती थी।












