20% तक महंगी होगी शराब और बीयर!कंपनियों ने राज्यों से मांगी कीमतें बढ़ाने की अनुमति

देशभर में शराब, बीयर और वाइन की कीमतें जल्द बढ़ सकती हैं। शराब बनाने वाली कंपनियों ने राज्य सरकारों से दाम बढ़ाने की अनुमति मांगी है। कंपनियों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष की वजह से सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है जिससे उत्पादन लागत तेजी से बढ़ रही है। शराब उद्योग की बड़ी संस्थाओं ने सरकारों को पत्र लिखकर साफ कहा है कि मौजूदा कीमतों पर कारोबार चलाना मुश्किल होता जा रहा है।
15% से 20% तक कीमत बढ़ाने की मांग
कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज (CIABC) और ब्रूअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने अलग-अलग राज्यों को पत्र भेजकर शराब और बीयर के दामों में संशोधन की मांग की है। बीयर इंडस्ट्री की संस्था BAI ने सुझाव दिया है कि बढ़ती लागत की भरपाई के लिए बीयर की कीमतों में 15% से 20% तक बढ़ोतरी की जाए।
बड़ी कंपनियों ने जताई चिंता
BAI में देश की बड़ी बीयर कंपनियां शामिल हैं। इनमें यूनाइटेड ब्रूअर्स, कारल्सबर्ग और एबी इनबेव जैसी कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों की देश के बीयर मार्केट में करीब 85% हिस्सेदारी बताई जाती है। कंपनियों का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत और घटते मार्जिन की वजह से पुराने रेट पर बिजनेस करना मुश्किल हो गया है।
कांच की बोतलें और पैकेजिंग हुई महंगी
शराब इंडस्ट्री पर सबसे बड़ा असर पैकेजिंग कॉस्ट में बढ़ोतरी का पड़ा है। कंपनियों के मुताबिक कांच की बोतलें, एल्युमीनियम कैन और अन्य पैकेजिंग मटेरियल पहले की तुलना में काफी महंगे हो गए हैं। सबसे ज्यादा असर फिरोजाबाद के ग्लास मैन्युफैक्चरिंग हब पर पड़ा है। यहां गैस सप्लाई कम होने की वजह से फैक्ट्रियों को जरूरत के मुकाबले सिर्फ 60% गैस मिल रही है। CIABC के अनुसार मजबूरी में कंपनियों को महंगी स्पॉट LNG और LPG खरीदनी पड़ रही है जिससे बोतलों की लागत तेजी से बढ़ गई है। कई यूनिट्स बंद होने की स्थिति में पहुंच चुकी हैं।
बीयर इंडस्ट्री पर एल्युमीनियम संकट
बीयर कंपनियों के सामने एल्युमीनियम कैन की सप्लाई सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। मिडिल ईस्ट से आने वाली एल्युमीनियम सप्लाई प्रभावित होने से बीयर कैन की उपलब्धता घट रही है। इंडस्ट्री का कहना है कि अगर क्षेत्रीय तनाव लंबे समय तक जारी रहा तो कई प्लांट्स का उत्पादन प्रभावित हो सकता है और कुछ यूनिट्स बंद भी करनी पड़ सकती हैं।
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सरकार से अंतरिम राहत की मांग
लागत के दबाव को कम करने के लिए कंपनियों ने राज्यों से टैक्स और लेवी में राहत देने की भी मांग की है। BAI ने सुझाव दिया है कि मैन्युफैक्चरिंग लेवी में ₹3 से ₹5 प्रति लीटर तक की कमी की जाए ताकि ग्राहकों पर अचानक ज्यादा बोझ न पड़े। वहीं CIABC ने IMFL और वाइन के ‘एक्स-डिस्टिलरी प्राइस’ में संशोधन की मांग की है जिससे कंपनियों को बढ़ती लागत से राहत मिल सके।
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आम ग्राहकों पर पड़ सकता है असर
अगर राज्य सरकारें कंपनियों की मांग मान लेती हैं तो आने वाले दिनों में शराब, बीयर और वाइन की कीमतों में बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है। खासतौर पर प्रीमियम और कैन पैक बीयर सबसे ज्यादा महंगी हो सकती है।












