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मुंबई। पौराणिक रहस्यमयी घटनाओं पर आधारित, रोंगटे खड़े कर देने वाली हॉरर-थ्रिलर और सस्पेंस फिल्म ‘काल त्रिघोरी’ 14 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। 'काल त्रिघोरी' के मुख्य कलाकारों में अरबाज़ खान, ऋतुपर्णा सेनगुप्ता, महेश मांजरेकर और आदित्य श्रीवास्तव हैं। अन्य कलाकारों में राजेश शर्मा और मुग्धा गोडसे भी शामिल हैं।
यह मनोवैज्ञानिक फिल्म गुजरात के नितिन वैद्य के दिमाग की उपज है, जिनका पहले दूर-दूर तक फिल्मों से कोई रिश्ता-नाता नहीं रहा। लेखक और निर्देशक नितिन वैद्य को ‘काल त्रिघोरी’ बनाने का विचार कैसे आया, इसे लेकर उन्होंने Peoplesupdate के लिए इसी फिल्म के प्रोडक्शन डिजाइनर तारिक खान से विस्तार में चर्चा की। पढ़िए क्या है ‘काल त्रिघोरी’ के पीछे की कहानी...
‘काल त्रिघोरी’ क्या है? इसको जानने से पहले हमें यह समझना पड़ेगा कि ‘काल बैसाखी’ क्या है? वर्ष में एक बार ऐसा मौका आता है, जब मौसम बहुत ही ज्यादा खतरनाक हो जाता है। काल बन कर बरसता है। तब प्लेन उड़ाने, बोटिंग करने से मना कर दिया जाता है।
आज से नहीं, हजारों वर्षों से इसका नाम काल बैसाखी है। लोगों का मानना है कि यह जो तूफान आता है, कोई काली शक्ति की वजह से आ रहा है। वह है-बैसाखी अमावस्या की काली रात।
बैसाखी अमावस्या की रात काले जादू की सबसे पसंदीदा रात है। यही काल बैसाखी; किसी खास दुर्योग में एक बार ‘काल त्रिघोरी’ बन जाती है। यह मौका 100 साल में एक बार ही आता है। यह एक कॉस्मिक अलाइनमेंट (Cosmic Alignment) है। इसका अर्थ, खगोलीय पिंडों जैसे-सूर्य, पृथ्वी और अन्य ग्रहों का एक सीध में आना है।
यह तब होता है, जब बैसाखी अमावस्या की रात को साथ देने के लिए दो रातें और इकट्ठी होती हैं। पहली अप्रैल को चैत्री अमावस्या, 16 अप्रैल को चैत्री पूर्णिमा और 30 अप्रैल को बैसाखी अमावस्या। यह 114 या इससे भी अधिक साल में एक बार होता है।
काल त्रिघोरी वर्ष 2022 अप्रैल के महीने में घटित हो चुका है। यह जब-जब आता है, तब-तब बहुत कहर बरपाता है। हमने इसे ऑब्जर्व किया। ऐसी बहुत सारी घटनाएं एकत्रित कीं, जोकि बहुत विचित्र थीं। काली बिल्लियां गायब हो जाती हैं। काल त्रिघोरी लोगों के दिमाग पर कब्जा करके अलग-अलग तरीके से काम करता है। यूक्रेन और रशिया का जो युद्ध हुआ; वो इसी की उपज है, ऐसा लगता है। जैसे कोई दिमाग पर कब्जा कर लेता है। उसके पहले कोरोना आया था।
तो असल में ये ‘काल त्रिघोरी’ जो है, इसका असल मतलब ये हुआ कि वो जो तीन रातों का मिलन है-इन तीन अघोर रातों से मिलकर एक शक्ति पैदा होती है-त्रिघोरी। ये तीन रातें उसके तीन कदम हैं। इसको किताबें ऐसे डिस्क्राइब करती हैं कि पहला कदम उसके दुपट्टे की हवाओं से तूफान पैदा होता है। दूसरा कदम तूफानी बारिश में वो बिजली की लाठी टेक कर चलता है। तीसरा कदम बैसाखी अमावस्या; उसके आगमन पर आसमान से तेजाब के साथ नरमुंड बरसते हैं।
इसी मान्यताओं को लेकर मैंने एक कहानी गढ़ ली कि जब काल त्रिघोरी आया, तो सारी दुनिया में अलग-अलग जगह पर वो अपने प्रकोप दिखा रहा होगा, तब एक फैमिली के ऊपर इसका कैसे असर हुआ? वो काल त्रिघोरी से कैसे रिलेट करता है और काल त्रिघोरी इंसान के दिमाग पर कब्जा कर लेता है या नहीं, वो फिल्म में पता लगेगा।
इसका मैंने डायरेक्शन किया। यदि मैं इस फिल्म को बना पाया, डायरेक्शन किया और सब कुछ किया, तो सबसे बड़ा सहयोग मेरे परिवार का है। मेरे परिवार ने मुझ पर भरोसा किया। मेरे दोस्तों का है। तारिक भाई जैसे दोस्त, जिन्होंने ये बोला सर, आपकी कन्विक्शन(दृढ़विश्वास) बहुत गजब है। तो ये है सारी कहानी।
( जैसा कि फिल्म के लेखक-निर्देशक नितिन वैद्य ने प्रोडक्शन डिजाइनर तारिक खान और नादिरी खान’ सबा’ को बताया)
नितिन वैद्य गुजरात से हैं। मुझे याद है कि 2021 के एंड में मुझे एक कॉल आया था कि सर आप तारिक उमर खान बोल रहे हैं? तो मैंने बोला-जी हां। तो उन्होंने अपना इंट्रोडक्शन दिया और बताया कि वो एक हॉरर फिल्म; जो बेसिकली काल त्रिघोरी या काल बैसाखी पर आधारित है। तब मुझे यकीन नहीं हुआ था कि क्या ऐसा भी कुछ होता है? उन्होंने मेरी पिछली परफॉर्मेंस ‘दुर्गामती’ मूवी के काम को देखते हुए फोन किया था। मुझे लगता है कि तीन चार महीने का गैप आया। हम मिले नहीं कभी। फिर 2022 में वापस उन्होंने मुझे अप्रोच किया। हम लोग मुंबई में अंधेरी में होटल में मिले। जब पहली बार किसी इंसान से मिलता हूं तो दो चीज देखता हूं कि बंदा पैशनेट कितना है और एक्सपीरियंस कितना है? इनके पास एक्सपीरियंस तो कुछ नहीं था, लेकिन पैशनेट बहुत थे। इनका जो कन्विंसिंग पावर था और जिस तरीके से उन्होंने मुझे स्टोरी नेरेट की, जो डिटेल बताई; उसने मेरे अंदर इंटरेस्ट जगाया।
इनकी एक लाइन थी- आई एम ए न्यूकमर। मतलब- मैं एक इंडिविजुअल प्रोड्यूसर हूं और पहली बार फिल्म बना रहा हूं, तो आप मुझे प्लीज इसमें हेल्प करें। मुझे भी लगा कि मेरा फर्ज है कि नये-नये टेक्नीशियन को, नये टैलेंट को, नया डायरेक्टर को मार्केट में आने में मदद करनी चाहिए, यह उनका हक है।
हमने फिल्म को गुजरात में एक हवेली में शूट किया है। इसमें वीएफएक्स का काफी काम था, तो उसमें टाइम लगा। इसमें अगर आप फिल्म देखेंगे, तो एनिमेशन और सीजी(कम्यूटर ग्राफिक्स) का भी काम बहुत अच्छा है। बहुत बेहतरीन है। हम ‘काल त्रिघोरी’ का पार्ट 2 भी बनाएंगे।
(जैसा कि बॉलीवुड के ख्यात प्रोडक्शन डिजाइनर तारिक खान ने बताया)
(इनपुट- अमिताभ बुधौलिया)