शपथ लेने के बाद नवनियुक्त जस्टिस अमित लाहोटी बोले-‘कोर्ट ही लोगों की आखिरी उम्मीद है’

जबलपुर। भारत के संविधान की शुरुआत ‘वी द पीपल ऑफ इंडिया’ से होती है। ये शब्द याद दिलाते हैं कि हर संस्था, हर ऑफिस नागरिकों की सेवा के लिए ही हैं। यदि लोगों को कहीं न्याय नहीं मिलता तो वे कोर्ट आते हैं। कोर्ट ही नागरिकों की आखिरी उम्मीद है। आज जो संवैधानिक जिम्मेदारी मिली है, मेरा पूरा प्रयास रहेगा कि उसको पूरी गंभीरता से निभाऊं। यह बात सोमवार को न्यायाधीश के पद की शपथ लेने के बाद जस्टिस अमित लाहोटी ने कही।
एसीजे ने दिलाई शपथ
हाईकोर्ट के कोर्ट रूम नं. 1 में दोपहर ढाई बजे से आयोजित समारोह में सबसे पहले रजिस्ट्रार जनरल धरमिन्दर सिंह ने राष्ट्रपति द्वारा जारी किए गए नियुक्ति पत्र (वारंट) को पढ़ा। इसके बाद एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया ने जस्टिस अमित लाहोटी को शपथ दिलाई। इस मौके पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन, महाधिवक्ता प्रशांत सिंह, स्टेट बार काउंसिल की विशेष समिति के सदस्य दीपेन्द्र सिंह कुशवाहा, हाईकोर्ट बार जबलपुर के कार्यकारी अध्यक्ष अमित जैन, इंदौर बार के अध्यक्ष मनीष यादव, ग्वालियर बार के अध्यक्ष पवन पाठक और हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार के अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने अपने संबोधन में जस्टिस लाहोटी को शुभकामनाएं दीं।
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‘माता-पिता के आशीर्वाद से यहां तक पहुंचा’
जस्टिस लाहोटी ने कहा- पिता स्व. अनिल लाहोटी और निर्मला के आशीर्वाद से ही वे इस मुकाम तक पहुंचे हैं। उन्होंने सिर्फ शिक्षा ही नहीं, बल्कि संस्कार भी दिए। पत्नी नेहा और बेटे मानव का जिक्र करते हुए जस्टिस लाहोटी ने कहा कि उन्हें हर कदम पर दोनों का संबल मिला।
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