जीतू पटवारी बोले-बालाघाट में आदिवासी बच्चों, जहरीली शराब और दूषित पानी से हुई मौतों पर जवाबदेही तय करे सरकार

भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं, आदिवासी कल्याण और कानून-व्यवस्था को लेकर भाजपा सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मासूम बच्चों की मौत, जहरीली शराब से लोगों की जान जाने और दूषित पानी से नागरिकों की मृत्यु जैसी घटनाएं सरकार की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। मुख्यमंत्री को केवल बयान देने के बजाय इन मामलों में जनता के सामने स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
बच्चों की मौत और बुनियादी सुविधाओं पर चिंता
पटवारी ने कहा कि तीन महीने से लेकर एक वर्ष, दो वर्ष, पांच वर्ष, 15 वर्ष और 17 वर्ष तक की उम्र के बच्चों को खोने वाले परिवारों की पीड़ा पूरे प्रदेश की संवेदना और शासन की जवाबदेही का विषय है। उन्होंने कहा कि इन परिवारों की समस्याएं सुनना और उन्हें सरकार तक पहुंचाना लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है। उन्होंने आदिवासी अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाओं, पोषण, शिक्षा और रोजगार की स्थिति पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत बताई। अलीराजपुर सहित अन्य आदिवासी जिलों में गरीबी और बुनियादी सुविधाओं की कमी के सवाल लगातार उठते रहे हैं। पटवारी ने कहा कि आदिवासी परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, पौष्टिक आहार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।
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आदिवासी बजट के इस्तेमाल पर मांगा जवाब
पटवारी ने आरोप लगाया कि आदिवासी विकास के लिए निर्धारित बजट के उपयोग में पारदर्शिता का अभाव है। उन्होंने सरकार से पूछा कि आदिवासी कल्याण के लिए आवंटित धनराशि में से कितना पैसा स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और बुनियादी सुविधाओं पर खर्च किया गया और कितना अन्य मदों में व्यय हुआ। उन्होंने कहा कि यदि आदिवासी विकास की राशि के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। पटवारी ने भाजपा के लंबे शासनकाल के दौरान आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य की वास्तविक स्थिति पर भी सरकार से जवाब मांगा।
कलेक्टर-एसपी की अनुपस्थिति पर उठाया सवाल
पटवारी ने बालाघाट में राहुल गांधी के दौरे के दौरान जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक की अनुपस्थिति को भी गंभीर विषय बताया। उनके अनुसार, दौरे की पूर्व सूचना और मुख्य सचिव से संवाद के बावजूद दोनों वरिष्ठ अधिकारियों की अनुपस्थिति प्रशासनिक समन्वय और स्थापित प्रोटोकॉल को लेकर सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मामले को विभिन्न सक्षम मंचों पर उठाएगी। पार्टी संबंधित अधिकारियों के खिलाफ शिकायत, विधानसभा में विशेषाधिकार हनन का नोटिस, आईएएस-आईपीएस एसोसिएशनों के समक्ष मामला उठाने तथा राष्ट्रपति और केंद्रीय गृहमंत्री को लिखित शिकायत भेजने की तैयारी कर रही है। पटवारी ने कहा कि कार्रवाई की मांग तथ्यों और लागू नियमों के आधार पर की जाएगी।
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