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जम्मू-कश्मीर में आतंक पर बड़ी कामयाबी, आतंकवाद से जुड़ी हिंसा पहुंची सबसे निचले स्तर पर, हालात तेजी से हो रहे सामान्य

सेना के सूत्रों और SATP के आंकड़ों के मुताबिक 2026 में सुरक्षा बलों की मौतें पहली बार सिंगल डिजिट में, मारे गए 23 आतंकवादियों में ज्यादातर पाकिस्तानी मूल के थे।
जम्मू-कश्मीर में आतंक पर बड़ी कामयाबी, आतंकवाद से जुड़ी हिंसा पहुंची सबसे निचले स्तर पर, हालात तेजी से हो रहे सामान्य
फाइल फोटो।

श्रीनगर/नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर को लेकर एक बहुत सकारात्मक खबर सामने आ रही है। सेना से जुड़े सूत्रों का कहना है कि केंद्र शासित प्रदेश में आतंक से जुड़ी हिंसक घटनाएं अब पिछले कई दशकों के मुकाबले सबसे कम हो गई हैं। इसे घाटी में स्थिति के सामान्य होने की दिशा में एक बड़ा और ठोस संकेत माना जा रहा है। सेना के सूत्रों और आतंकवाद पर नजर रखने वाले पोर्टल 'साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल' (SATP) के डाटा से यह बात स्पष्ट होती है। SATP ने जब साल 2000 में जम्मू-कश्मीर से जुड़ा डाटा दर्ज करना शुरू किया था, तब से लेकर अब तक आतंकवाद से जुड़ी मौतों का आंकड़ा अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।यह कोई अचानक आई कमी नहीं है, बल्कि पिछले कुछ सालों से जारी सुधार की प्रक्रिया का नतीजा है। खासतौर पर साल 2026 में हिंसा में अभूतपूर्व गिरावट दर्ज की गई है। 

सेना को नुकसान में बड़ी कमी आई

SATP की 31 अक्टूबर तक की रिपोर्ट के अनुसार, चालू साल में जम्मू-कश्मीर में अब तक 23 आतंकवादी सुरक्षा बलों के ऑपरेशन में मारे गए हैं। एक अहम तथ्य यह है कि साल 2000 के बाद यह पहला मौका है जब सुरक्षा बलों की शहादत का आंकड़ा एक अंक (सिंगल डिजिट) तक सिमट गया है। इस अवधि में सिर्फ दो जवानों की मौत दर्ज हुई है। सेना के एक वरिष्ठ सूत्र ने जानकारी दी कि इस साल मारे गए 23 आतंकवादियों में अधिकांश का संबंध पाकिस्तान से था। आंकड़ों पर नजर डालें तो 2000 के बाद 2025 और 2026 केवल दो ऐसे वर्ष हैं, जब आतंकवाद से जुड़ी कुल मौतों की संख्या 100 से कम यानी दो अंकों में रही। साल 2025 में कुल 92 मौतें हुई थीं, जिसमें पहलगाम में हुए आतंकी हमले के पीड़ित भी शामिल हैं। वहीं 2026 के पहले दस महीनों में यह आंकड़ा घटकर महज 28 रह गया है। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के इतिहास में सबसे खूनी साल 2001 रहा था। उस साल कुल 4,011 लोगों की जान गई थी, जिसमें 1,024 आम नागरिक, 628 सुरक्षाकर्मी और 2,345 आतंकवादी शामिल थे।

सर्दियों में बढ़ जाती हैं आतंकी घटनाएं

SATP के डाटा के अनुसार, 14 अन्य मौतों को 'अनिर्दिष्ट' (unspecified) कैटेगरी में दर्ज किया गया है। पोर्टल के आंकड़े बताते हैं कि इस साल जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से जुड़ी हिंसा में सिर्फ दो आम नागरिकों की जान गई है। यह बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि साल 2000 के बाद से हर साल सुरक्षा बलों के जवानों की शहादत का आंकड़ा 10 या उससे ज्यादा रहा है और इसी तरह आम नागरिकों की मौतों की संख्या भी हर साल दहाई के अंक में ही रही है। आमतौर पर जम्मू-कश्मीर में आतंक से जुड़ी अधिकांश वारदातें गर्मियों के मौसम में बढ़ जाती हैं, जबकि सर्दियों में इनमें कमी देखी जाती है। सुरक्षा प्रतिष्ठान से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा समय में केंद्र शासित प्रदेश में लगभग 120 से 140 आतंकवादियों के सक्रिय होने का अनुमान है।

घुसपैठ की एक भी कोशिश कामयाब नहीं हो सकी

सेना के एक सूत्र ने बताया कि इस साल नियंत्रण रेखा (LoC) के पार से घुसपैठ की एक भी कोशिश कामयाब नहीं हो पाई है। सर्दियों में घुसपैठ की घटनाएं सामान्य रूप से कम हो जाती हैं, क्योंकि पीर पंजाल पर्वतमाला के ऊंचे दर्रे बर्फबारी के कारण बंद हो जाते हैं। इस पर्वत श्रृंखला के यह दर्रे घाटी को घेरते हैं।एक और बड़ा सकारात्मक बदलाव स्थानीय भर्ती को लेकर देखा गया है। इस साल जम्मू-कश्मीर में एक भी स्थानीय युवक आतंकी संगठनों में शामिल नहीं हुआ है, जो पिछले कई सालों से जारी गिरावट के ट्रेंड को और मजबूत करता है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 2021 में 146 स्थानीय युवाओं ने आतंकी समूहों का दामन थामा था। यह संख्या 2022 में घटकर 121 हो गई, 2023 में सिर्फ 19 और 2024 में महज चार रह गई। सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि 2025 में केवल एक स्थानीय व्यक्ति आतंकी संगठन में शामिल हुआ था, जबकि 2026 में अब तक ऐसी एक भी भर्ती दर्ज नहीं हुई है।

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आंतरिक सुरक्षा भी ठीक रही

सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति में भी बड़ा सुधार हुआ है। इस साल अब तक घाटी में न तो किसी तरह का बंद बुलाया गया है और न ही पत्थरबाजी की कोई घटना सामने आई है। उन्होंने बताया कि 2025 में भी इसी तरह की शांति बनी रही थी और कोई बंद या पत्थरबाजी नहीं हुई थी। इसकी तुलना अगर मणिपुर से करें तो SATP के आंकड़ों के मुताबिक, वहां इस साल अब तक हिंसा से जुड़ी घटनाओं में 100 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 73 आम नागरिक, तीन सुरक्षाकर्मी और 24 विद्रोही शामिल हैं।

Puneet Pandey
By Puneet Pandey

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