जयपुर में पूर्व सांसद के PWD इंजीनियर बेटे की मौत, बहू और पोते समेत 5 पर लगाया जहर देकर हत्या का आरोप

जयपुर में लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिशासी अभियंता राजेंद्र प्रताप सिंह की मौत के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। मृतक के पिता और भरतपुर के पूर्व सांसद रतन सिंह ने अपनी पुत्रवधू नीतू सिंह, पोते सौरव और ससुराल पक्ष के सदस्यों समेत पांच लोगों पर बेटे को जहर देकर मारने का आरोप लगाया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब पोस्टमार्टम, विसरा जांच और घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों से मौत की असली वजह सामने आने की उम्मीद है।
PWD इंजीनियर की मौत का मामला क्या है?
राजेंद्र प्रताप सिंह राजस्थान के जयपुर में लोक निर्माण विभाग में अधिशासी अभियंता के पद पर कार्यरत थे। उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद परिवार की शिकायत पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया है। शिकायतकर्ता उनके पिता रतन सिंह हैं, जो भरतपुर से पूर्व सांसद रह चुके हैं। पूर्व सांसद का आरोप है कि उनके बेटे की हत्या के पीछे सरकारी नौकरी और करोड़ों रुपये की संपत्ति हासिल करने की साजिश हो सकती है। उनका दावा है कि राजेंद्र प्रताप सिंह को जहर देकर मारने की आशंका है। हालांकि, ये सभी आरोप फिलहाल शिकायत का हिस्सा हैं। पुलिस जांच और फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।
बहू और पोते समेत 5 लोगों पर गंभीर आरोप
पूर्व सांसद रतन सिंह ने अपनी शिकायत में पुत्रवधू नीतू सिंह, पोते सौरव और ससुराल पक्ष के अन्य सदस्यों समेत पांच लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बेटे की मौत के पीछे संपत्ति और पैसों से जुड़ा विवाद हो सकता है। शिकायत के अनुसार, परिवार में लंबे समय से वैवाहिक मतभेद और संपत्ति को लेकर तनाव चल रहा था। पूर्व सांसद ने आरोप लगाया कि अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने और संपत्ति पर अधिकार पाने के उद्देश्य से उनके बेटे को निशाना बनाया गया।
कई साल से अलग रह रहे थे पति-पत्नी
जांच के मुताबिक, राजेंद्र प्रताप सिंह और नीतू सिंह का विवाह 11 मई 2005 को हुआ था। शादी के कुछ समय बाद दोनों के बीच वैवाहिक मतभेद शुरू हो गए। समय के साथ विवाद बढ़ा और मामला पारिवारिक न्यायालय तक पहुंच गया। राजेंद्र प्रताप सिंह ने पत्नी से तलाक लेने के लिए अदालत में याचिका दायर की थी। शिकायत में बताया गया है कि दोनों के बीच तनाव इतना बढ़ गया था कि नीतू सिंह और उनका बेटा पिछले पांच से छह साल से अलग रह रहे थे। इसके बाद मई 2026 में दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति बनी और नीतू सिंह अपने बेटे सौरव के साथ मालवीय नगर स्थित घर में वापस रहने आईं। पूर्व सांसद का आरोप है कि साथ रहने के बाद भी पारिवारिक विवाद खत्म नहीं हुआ। इसके बजाय मकान, संपत्ति और पैसों को लेकर तनाव बढ़ने लगा।
4 सितंबर को झगड़े और धमकी का दावा
रतन सिंह ने अपनी शिकायत में 4 सितंबर की एक घटना का भी जिक्र किया है। उनके मुताबिक, उस दिन लेन-देन को लेकर घर में बड़ा विवाद हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान राजेंद्र प्रताप सिंह को जान से मारने की धमकी भी दी गई थी। शिकायत में यह भी कहा गया है कि 4 और 5 सितंबर को घर में लगे सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए गए या उन्हें नुकसान पहुंचाया गया। पूर्व सांसद ने इन घटनाओं को संदिग्ध बताते हुए बेटे की मौत के पीछे साजिश होने की आशंका जताई है।
FSL जांच के लिए भेजे गए विसरा नमूने
मामले की जांच में पुलिस ने कई अहम कदम उठाए हैं। जवाहर सर्किल थाना पुलिस के अनुसार, घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए गए हैं और घर में लगे सीसीटीवी कैमरों की डिजिटल वीडियो रिकॉर्डिंग (DVR) जब्त कर ली गई है। थानाधिकारी महेश चंद्र के अनुसार, पुलिस मामले के हर पहलू की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम के बाद FSL और पैथोलॉजी विभाग की रिपोर्ट आने पर मौत के वास्तविक कारण के बारे में अधिक स्पष्टता मिल सकेगी।
अब जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
जयपुर में PWD इंजीनियर राजेंद्र प्रताप सिंह की मौत के मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई। क्या मौत प्राकृतिक कारणों से हुई, या इसमें किसी तरह की आपराधिक साजिश थी? इसका जवाब पुलिस जांच और फोरेंसिक रिपोर्ट से मिलने की उम्मीद है। फिलहाल हत्या के आरोप शिकायत के आधार पर दर्ज किए गए हैं।



















