जयपुर में चलती लो-फ्लोर बस में धुआं और फिर उठने लगीं लपटें, यात्रियों में मची अफरा-तफरी

फायर एक्सटिंग्विशर खाली, टैंकर से बुझाई आग
इंजन में आग लगने के बाद यात्रियों के सामने सबसे बड़ी समस्या आग पर तत्काल काबू पाने की थी। बस में आग बुझाने के लिए रखा गया फायर एक्सटिंग्विशर खाली मिला। ऐसे में मौके पर मौजूद लोगों ने पीछे से आ रहे पानी के टैंकर को रुकवाया। टैंकर की मदद से बस के इंजन में लगी आग पर पानी डाला गया। समय रहते किए गए इस प्रयास से आग को फैलने से रोक लिया गया और संभावित बड़ा हादसा टल गया। घटना के दौरान यात्रियों में कुछ देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
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मार्च में पूरी हो चुकी थी बस की निर्धारित अवधि
बताया गया है कि जिस मिनी बस में आग लगी, वह मार्च में अपनी निर्धारित संचालन अवधि पूरी कर चुकी थी। इसके बावजूद JCTSL प्रबंधन की ओर से उसके संचालन की अवधि तीन महीने और बढ़ाए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि अवधि बढ़ाने से पहले बस की पर्याप्त तकनीकी जांच नहीं की गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि निर्धारित अवधि पूरी कर चुकी बस को सड़क पर उतारने से पहले सुरक्षा मानकों की जांच किस स्तर पर की गई।
हादसे ने बसों के रखरखाव पर सवाल
घटना सामने आने के बाद JCTSL की बसों के रखरखाव को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। एम्पलाइज यूनियन एटा के संगठन सचिव विपिन के अनुसार, टोडी डिपो से संचालित बसों के रखरखाव का काम मातेश्वरी कंपनी के जिम्मे बताया जा रहा है। आरोप है कि बसों के मेंटेनेंस की प्रक्रिया केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित है और जमीनी स्तर पर वाहनों की तकनीकी स्थिति की पर्याप्त जांच नहीं की जा रही। आग की घटना ने इन दावों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी?
मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि 50 डबल डेकर बसों के रखरखाव का काम भी इसी कंपनी को दिए जाने की जानकारी सामने आई है। एक ओर निर्धारित संचालन अवधि पूरी कर चुकी बस सड़क पर दौड़ती मिली और दूसरी ओर आपात स्थिति में काम आने वाला फायर एक्सटिंग्विशर भी खाली पाया गया। ऐसे में बसों के रखरखाव और तकनीकी जांच की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।





















