खकनार जनपद की बैठक में पति-प्रतिनिधियों को बाहर करने पर हंगामा, 25 सदस्यों ने किया बहिष्कार

बुरहानपुर जिले की खकनार जनपद पंचायत में बैठक शुरू होने से पहले ही माहौल गरमा गया। महिला जनप्रतिनिधियोंा के साथ पहुंचे पति-प्रतिनिधियों को जनपद पंचायत CEO सुनीता बघेल ने बैठक से बाहर जाने के लिए कहा तो विवाद खड़ा हो गया। नाराज महिला सदस्यों के साथ अन्य सदस्य भी बैठक से बाहर निकल आए। इसके बाद जनपद अध्यक्ष समेत 25 सदस्यों ने बैठक का बहिष्कार कर कार्यालय के बाहर नारेबाजी शुरू कर दी। मामला सिर्फ बैठक में प्रतिनिधियों की मौजूदगी तक सीमित नहीं रहा। सदस्यों ने जनपद क्षेत्र में विकास कार्य नहीं होने का आरोप लगाते हुए CEO के खिलाफ नाराजगी जताई और जरूरत पड़ने पर कलेक्टर के सामने सामूहिक इस्तीफा देने की चेतावनी भी दी।
25 सदस्यों वाली जनपद में 15 महिलाएं निर्वाचित
खकनार जनपद पंचायत में कुल 25 सदस्य हैं। इनमें 15 महिलाएं और 10 पुरुष सदस्य निर्वाचित हैं। शनिवार को जनपद CEO सुनीता बघेल ने सभी सदस्यों को बैठक में शामिल होने के लिए पत्र जारी किया था। बैठक के दौरान चार महिला सदस्य खुद नहीं पहुंचीं, बल्कि उनके स्थान पर उनके पति या पुरुष प्रतिनिधि आए। वहीं करीब पांच महिला सदस्य अपने पति को प्रतिनिधि के तौर पर साथ लेकर बैठक में पहुंची थीं। जनपद उपाध्यक्ष आरती निलेश चैकसे भी अपने पति निलेश चैकसे के साथ बैठक में पहुंचीं।
CEO ने कहा- सिर्फ सदस्य ही बैठक में बैठें
बैठक शुरू होते ही CEO सुनीता बघेल ने स्पष्ट कर दिया कि बैठक में केवल निर्वाचित जनपद सदस्य ही बैठेंगे। उन्होंने प्रतिनिधियों से बाहर जाने के लिए कहा। प्रतिनिधियों के बाहर जाने पर कुछ महिला सदस्य भी बैठक से बाहर निकल गईं। इसके बाद जनपद अध्यक्ष राकेश सिंह सोलंकी समेत अन्य सदस्य भी बाहर आ गए। CEO ने सदस्यों से बैठक में वापस आने का आग्रह किया, लेकिन वे तैयार नहीं हुए। देखते ही देखते मामला विरोध और नारेबाजी तक पहुंच गया।
विकास कार्यों को लेकर भी सदस्यों में नाराजगी
बैठक का बहिष्कार करने के बाद जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य कार्यालय के बाहर एकत्रित हो गए। उन्होंने जनपद क्षेत्र में विकास कार्य नहीं होने का आरोप लगाते हुए CEO सुनीता बघेल के खिलाफ नारेबाजी की। CEO ने सदस्यों से बातचीत कर विवाद शांत करने की कोशिश की, लेकिन सदस्य अपनी मांगों पर अड़े रहे। बातचीत बेनतीजा रहने के बाद CEO भी वहां से नाराज होकर अपने निवास के लिए रवाना हो गईं।
उपाध्यक्ष के पति ने भी उठाया विकास का मुद्दा
जनपद उपाध्यक्ष आरती चैकसे के पति निलेश चैकसे भी बैठक में मौजूद थे। नारेबाजी के दौरान उन्होंने भी जनपद क्षेत्र में विकास कार्य नहीं होने का मुद्दा उठाया। सदस्यों ने चेतावनी दी कि अगर जल्द विकास कार्य शुरू नहीं किए गए तो वे कलेक्टर हर्ष सिंह के सामने सामूहिक रूप से इस्तीफा देने पर विचार करेंगे। कुछ देर तक विरोध और नारेबाजी के बाद सभी सदस्य वहां से लौट गए।
महिला आरक्षण के बावजूद 'प्रतिनिधि व्यवस्था' पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने पंचायतों में महिला आरक्षण के उद्देश्य पर भी सवाल खड़े किए हैं। जिले में कई पंचायतों में महिला सरपंच और सदस्य निर्वाचित हैं, लेकिन उनके स्थान पर पति या परिवार के पुरुष सदस्य काम संभालते दिखाई देते हैं। खकनार की बैठक में भी कई महिला सदस्यों की जगह उनके पति या प्रतिनिधि पहुंचे थे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, तो निर्णय लेने की प्रक्रिया में पुरुष प्रतिनिधियों की भूमिका कितनी उचित है।
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जनपद अध्यक्ष बोले- विकास कार्य भी हो रहे प्रभावित
जनपद अध्यक्ष राकेश सिंह सोलंकी ने कहा कि बैठक में प्रतिनिधि बैठने पर किसी को आपत्ति नहीं थी। लेकिन CEO मैम ने प्रतिनिधियों को बाहर कर दिया। आखिरी बैठक जनवरी में हुई थी, इसके बाद अब हो रही है। विकास कार्य भी अवरुद्ध हो रहे हैं। फिलहाल बैठक के बहिष्कार और नारेबाजी के बाद मामला शांत हो गया है। अब देखना होगा कि प्रशासन और जनपद सदस्यों के बीच इस विवाद का समाधान कैसे निकलता है और लंबे समय से रुके विकास कार्यों को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।





















