इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से हुई मौतों और सैकड़ों लोगों के बीमार पड़ने के मामले में बड़ी अपडेट सामने आई है। इस मामले की जांच के लिए बनाए गए आयोग ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में पेश कर दी है।अदालत ने आयोग को मामले की विस्तृत जांच कर अंतिम रिपोर्ट पेश करने के लिए एक महीने का समय दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी।
इस मामले में पीड़ित पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने अदालत में दलील रखते हुए कहा कि घटना को करीब 90 दिन बीत चुके हैं लेकिन अब तक जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद प्रशासन की जवाबदेही तय नहीं होना चिंता की बात है।
अदालत में दी गई जानकारी के अनुसार शहर की कुल 110 वॉटर हेड टंकियों की जांच की गई थी। जांच में केवल एक टंकी में संक्रमण मिलने की बात सामने आई लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के कारण उसका असर बड़े इलाके तक फैल गया और कई लोग इसकी चपेट में आ गए।
अधिवक्ता अजय बागड़िया ने यह भी कहा कि जांच आयोग की प्रारंभिक रिपोर्ट में मौतों की संख्या को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। इसे लेकर उन्होंने अदालत में आपत्ति भी दर्ज कराई। अदालत ने इस पर गंभीरता दिखाते हुए आयोग को विस्तृत और स्पष्ट रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
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हाईकोर्ट ने जांच आयोग और इंदौर नगर निगम को निर्देश दिया है कि वे मामले की पूरी जांच कर विस्तृत रिपोर्ट 6 अप्रैल तक अदालत में पेश करें। अगली सुनवाई में इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई पर फैसला हो सकता है।
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गौरतलब है कि भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल की वजह से 37 लोगों की मौत हो गई थी और बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़ गए थे। घटना के बाद यह मामला न्यायिक जांच के दायरे में लाया गया था। अदालत पहले भी इस मामले में सख्त टिप्पणी कर चुकी है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठती रही है