तेल अवीव। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। इजरायल और ईरान के बीच चल रही सैन्य टकराव की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। इसी बीच इजरायली सेना ने ईरान के नागरिकों के लिए एक असामान्य और बेहद गंभीर चेतावनी जारी कर दी है। इस चेतावनी में ईरान के लोगों से अगले 12 घंटे तक ट्रेनों में सफर न करने और रेलवे लाइनों से दूर रहने की अपील की गई है।
इजरायली सेना ने कहा है कि, रेलवे ट्रैक या ट्रेनों के आसपास मौजूद रहना नागरिकों की जान के लिए खतरा बन सकता है। यह चेतावनी ऐसे समय पर सामने आई है जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई डेडलाइन खत्म होने में कुछ ही घंटे बचे हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि, आने वाले समय में युद्ध और भी विनाशकारी रूप ले सकता है।
इजरायली सेना (IDF) ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर फारसी भाषा में एक संदेश जारी किया। इस संदेश में ईरान के नागरिकों को तत्काल सतर्क रहने की सलाह दी गई है। संदेश में कहा गया है कि ईरान के स्थानीय समय के अनुसार रात 9 बजे तक पूरे देश में ट्रेन का उपयोग न करें और रेलवे लाइनों के आसपास भी न जाएं।
सेना ने अपने बयान में कहा कि, आपकी सुरक्षा के लिए हम अनुरोध करते हैं कि अभी से लेकर रात 9 बजे तक ट्रेन से यात्रा न करें। ट्रेनों या रेलवे लाइनों के पास आपकी मौजूदगी आपकी जान के लिए खतरा बन सकती है।
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक युद्ध के दौरान अक्सर किसी देश की परिवहन व्यवस्था, ऊर्जा ढांचे और लॉजिस्टिक नेटवर्क को निशाना बनाया जाता है। रेलवे सिस्टम किसी भी देश की सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इसके जरिए सैनिकों, हथियारों और जरूरी सामानों की आवाजाही होती है। इजरायल का यह संदेश ईरान के रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर पर संभावित हमले का संकेत हो सकता है। हालांकि इजरायली सेना ने अभी तक किसी विशेष रेलवे लाइन या शहर का नाम नहीं बताया है, जिससे खतरे की प्रकृति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
इस चेतावनी से पहले ही ईरान में बड़े पैमाने पर हमले हो चुके हैं। मंगलवार तड़के अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई में ईरान की राजधानी तेहरान को भारी नुकसान पहुंचा है। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इन हमलों में तेहरान स्थित राफी-निया सिनेगॉग पूरी तरह नष्ट हो गया। यह सिनेगॉग ईरान के यहूदी समुदाय के लिए एक ऐतिहासिक धार्मिक स्थल माना जाता था। गौरतलब है कि, ईरान में यहूदी धर्म को आधिकारिक मान्यता प्राप्त है और वहां आज भी एक छोटा यहूदी समुदाय मौजूद है। हालांकि 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद बड़ी संख्या में यहूदी समुदाय के लोग देश छोड़ चुके हैं।
अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के हमले शुरू होने के बाद से अब तक ईरान में 3500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें कम से कम 1665 आम नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। युद्ध के दौरान कई नागरिक इलाकों, सैन्य ठिकानों और बुनियादी ढांचों को भी नुकसान पहुंचा है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई जा रही है।
इस पूरे संकट के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक कड़ा अल्टीमेटम दिया है। ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) खोलने के लिए एक समय सीमा तय की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि, अगर तय समय तक रास्ता नहीं खोला गया तो अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बना सकते हैं।
ट्रंप के अनुसार, अगर सैन्य कार्रवाई की गई तो ईरान के पुलों, बिजली संयंत्रों और अन्य महत्वपूर्ण ढांचों को नष्ट किया जा सकता है। उन्होंने यहां तक दावा किया कि, जरूरत पड़ने पर चार घंटे के भीतर ईरान के महत्वपूर्ण ढांचे को पूरी तरह नष्ट किया जा सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होकर गुजरती है। अगर यह मार्ग बंद हो जाता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसी वजह से अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए यह समुद्री मार्ग रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।
ईरान ने ट्रंप की डेडलाइन और धमकियों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान ने ट्रंप के बयानों को अहंकारी और आधारहीन धमकियां बताया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि, देश किसी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है और वह अपने सैन्य अभियानों को जारी रखेगा। ईरान का यह भी कहना है कि, अगर उसके गैर-सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया तो उसका जवाब पहले से कहीं ज्यादा कड़ा होगा।
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ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने भी हालात पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि, शीर्ष सैन्य कमांडरों की हत्या से देश की सेना या लड़ाकों का मनोबल कमजोर नहीं होगा। यह बयान उस समय आया जब ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के खुफिया प्रमुख मेजर जनरल माजिद खदेमी की हत्या की खबर सामने आई। खामेनेई ने कहा कि, ईरान के सैनिक और लड़ाके पूरी तरह एकजुट हैं और ऐसी घटनाएं उन्हें कमजोर नहीं कर सकतीं।
इस बीच युद्ध को रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रजा अमीरी मोगद्दम ने कहा कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध रोकने की कोशिशें अब बेहद नाजुक दौर में पहुंच चुकी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि, कुछ देशों की ओर से मध्यस्थता की कोशिशें की जा रही हैं ताकि संघर्ष को आगे बढ़ने से रोका जा सके। हालांकि, अभी तक किसी ठोस समझौते के संकेत नहीं मिले हैं।
मिडिल ईस्ट में बढ़ता यह संघर्ष अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चिंता का विषय बन चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह युद्ध और फैलता है तो इसका असर सिर्फ ईरान और इजरायल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा नागरिकों की सुरक्षा, तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी इसका गहरा असर पड़ सकता है।