ईरान में सत्ता संकट?नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की हालत गंभीर… खुफिया रिपोर्ट में दावा- देश चलाने की स्थिति में नहीं

ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई को लेकर बड़ी खुफिया रिपोर्ट सामने आई है। दावा किया जा रहा है कि वे गंभीर रूप से बीमार और बेहोश हैं। उनका कोम शहर के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। अली खामेनेई की मौत के बाद सत्ता संभालने वाले मोजतबा अब तक सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं।
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नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की हालत गंभीर… खुफिया रिपोर्ट में दावा- देश चलाने की स्थिति में नहीं
ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई (फाइल फोटो)
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    वॉशिंगटन डीसी/तेहरान। मध्य-पूर्व में जारी तनाव और युद्ध के बीच ईरान से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स और खुफिया स्रोतों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि, ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई गंभीर रूप से बीमार हैं और फिलहाल बेहोशी की हालत में हैं। बताया जा रहा है कि, उनका इलाज ईरान के पवित्र शहर कोम (Qom) के एक अस्पताल में चल रहा है। फिलहाल वे शासन से जुड़े किसी भी निर्णय लेने की स्थिति में नहीं हैं।

    यह दावा ऐसे समय सामने आया है जब उनके पिता और ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत को करीब 39 दिन हो चुके हैं। इसके बाद मोजतबा खामेनेई को देश की कमान सौंपी गई थी, लेकिन सत्ता संभालने के बाद से वे सार्वजनिक रूप से कहीं नजर नहीं आए। इसी वजह से उनकी सेहत और स्थिति को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं।

    खुफिया मेमो में क्या दावा किया गया?

    ब्रिटेन के अखबार द टाइम्स और कुछ अन्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में एक डिप्लोमेटिक मेमो का हवाला दिया गया है। यह मेमो कथित तौर पर अमेरिकी और इजरायली खुफिया एजेंसियों की जानकारी पर आधारित है, जिसे खाड़ी देशों के साथ भी साझा किया गया है। इस मेमो के अनुसार मोजतबा खामेनेई गंभीर, स्थिति में हैं और फिलहाल देश चलाने में सक्षम नहीं हैं। बताया गया है कि उन्हें कोम शहर में एक सुरक्षित मेडिकल सुविधा में रखा गया है जहां उनका इलाज जारी है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, यह पहली बार है जब खुफिया एजेंसियों ने सार्वजनिक रूप से यह बताया है कि ईरान के सुप्रीम लीडर इस समय कहां मौजूद हैं। खुफिया सूत्रों का कहना है कि, उनके पास यह जानकारी पहले से मौजूद थी, लेकिन इसे अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया था।

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    28 फरवरी के हमले में घायल होने का दावा

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मोजतबा खामेनेई उसी हवाई हमले में घायल हो गए थे जिसमें उनके पिता अली खामेनेई की मौत हो गई थी। जानकारी के अनुसार, 28 फरवरी को युद्ध की शुरुआत के दौरान तेहरान में खामेनेई परिवार के परिसर पर बड़ा हमला हुआ था। इस हमले में अली खामेनेई के अलावा उनके परिवार के अन्य सदस्यों की भी मौत हो गई थी।

    रिपोर्ट में दावा किया गया है कि, उस समय मोजतबा खामेनेई भी वहीं मौजूद थे और हमले में उन्हें गंभीर चोटें आई थीं। हालांकि, ईरान की ओर से आधिकारिक तौर पर केवल इतना कहा गया था कि उनके पैर में मामूली चोट आई है।

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    कोम क्यों है इतना अहम?

    जिस शहर में मोजतबा खामेनेई के इलाज की बात कही जा रही है, वह ईरान का बेहद महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र है। कोम को शिया इस्लाम की धार्मिक राजधानी माना जाता है। यहां बड़े धार्मिक संस्थान और कई प्रमुख मौलवियों का केंद्र है। खुफिया रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि, इसी शहर में पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की तैयारी भी चल रही है। बताया जा रहा है कि, कोम में एक बड़ा मकबरा तैयार किया जा रहा है जिसमें एक से ज्यादा कब्रों की जगह बनाई जा रही है। माना जा रहा है कि इसमें खामेनेई परिवार के अन्य सदस्यों को भी दफनाया जा सकता है।

    अंतिम संस्कार को लेकर गोपनीयता

    अली खामेनेई की मौत के बाद उनका राजकीय अंतिम संस्कार अभी तक नहीं हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी प्रशासन को डर है कि अगर सार्वजनिक रूप से अंतिम संस्कार किया गया तो वहां भारी भीड़ इकट्ठा हो सकती है। इसके अलावा सरकार को यह भी आशंका है कि विरोध प्रदर्शन या अशांति हो सकती है। इसी वजह से अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को बेहद गोपनीय रखा गया है और कोम में तैयारी की जा रही है।

    सत्ता संभालने के बाद से गायब

    मार्च की शुरुआत में जब मोजतबा खामेनेई को ईरान का सुप्रीम लीडर घोषित किया गया था, तब से लेकर अब तक उन्हें सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है। उनकी ओर से अब तक केवल दो लिखित बयान जारी हुए हैं। खास बात यह है कि इन बयानों को भी सरकारी टेलीविजन पर एंकरों द्वारा पढ़कर सुनाया गया था, जबकि मोजतबा खुद कहीं दिखाई नहीं दिए। इस वजह से उनकी सेहत को लेकर तरह-तरह के सवाल उठने लगे हैं।

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    AI वीडियो का भी दावा

    हाल ही में एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था जिसमें मोजतबा खामेनेई को कथित तौर पर एक वॉर रूम में इजरायल का नक्शा देखते हुए दिखाया गया था। हालांकि, कई विशेषज्ञों का दावा है कि यह वीडियो असली नहीं बल्कि AI द्वारा तैयार किया गया हो सकता है। इस वीडियो के सामने आने के बाद भी उनकी वास्तविक स्थिति को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी।

    सेना के नेतृत्व को लेकर भी सवाल

    इस बीच एसोसिएटेड प्रेस (AP) की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान की सैन्य संरचना में भी भ्रम की स्थिति दिखाई दे रही है। बताया जा रहा है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और अन्य सैन्य इकाइयां फिलहाल बिना स्पष्ट केंद्रीय नेतृत्व के काम कर रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर शीर्ष नेतृत्व सक्रिय नहीं है तो इससे युद्ध के दौरान फैसले लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

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    रूस का क्या कहना है?

    इस पूरे मामले में रूस की ओर से भी बयान सामने आया था। रूस के राजदूत ने कहा था कि मोजतबा खामेनेई देश के अंदर ही हैं, लेकिन “स्पष्ट कारणों” की वजह से सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आ रहे हैं। रूस और ईरान के बीच पिछले साल एक रणनीतिक समझौता हुआ था, जिसके चलते रूस वहां की स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है।

    ट्रंप की सुप्रीम लीडर से नहीं हुई बात

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी हाल ही में दावा किया था कि, वह ईरानी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि बातचीत सीधे सुप्रीम लीडर के साथ नहीं हो रही है। इस बयान के बाद यह सवाल और गहरा गया कि क्या मोजतबा खामेनेई वास्तव में सक्रिय नेतृत्व की स्थिति में हैं या नहीं।

    विपक्ष का पुराना दावा

    ईरान के कुछ विपक्षी समूह पहले भी दावा कर चुके हैं कि मोजतबा खामेनेई कोमा में हैं। हालांकि, इन दावों की अब तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। लेकिन यह भी सच है कि अब तक ऐसा कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है जिससे इन दावों को पूरी तरह गलत साबित किया जा सके।

    ईरान में बढ़ती अनिश्चितता

    मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध और अंदरूनी सत्ता परिवर्तन के बीच ईरान की स्थिति काफी जटिल होती जा रही है। अगर मोजतबा खामेनेई वास्तव में गंभीर रूप से बीमार हैं या शासन चलाने की स्थिति में नहीं हैं, तो इससे ईरान की राजनीतिक और सैन्य व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है।

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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