वॉशिंगटन डीसी। मध्य-पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा टकराव अब खुले अल्टीमेटम और जवाबी चेतावनियों तक पहुंच चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि, अगर ईरान ने उनकी शर्तें नहीं मानीं और Strait of Hormuz को फिर से नहीं खोला, तो अमेरिका ईरान के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह तबाह कर सकता है।
व्हाइट हाउस में प्रेस से बातचीत के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि, अमेरिका के पास ऐसी सैन्य योजना है जिससे ईरान के पुल, बिजली संयंत्र और अन्य अहम ढांचे को कुछ ही घंटों में नष्ट किया जा सकता है। ट्रंप की इस चेतावनी के बाद तेहरान से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरानी नेतृत्व ने कहा है कि वे दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं और किसी भी हमले का जवाब देने के लिए तैयार हैं। इस बयानबाजी ने पूरे मध्य-पूर्व में युद्ध के खतरे को और बढ़ा दिया है।
व्हाइट हाउस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने ईरान को साफ चेतावनी देते हुए कहा कि, उसके पास फैसला लेने के लिए सीमित समय है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान को मंगलवार रात 8 बजे (अमेरिकी समय) तक का समय दिया है। भारतीय समय के अनुसार यह बुधवार सुबह करीब 5:30 बजे तक की डेडलाइन बनती है।
ट्रंप ने कहा, अगर उन्होंने फैसला नहीं लिया, तो उनके पास कोई पुल नहीं बचेगा, कोई पावर प्लांट नहीं बचेगा। पूरा ढांचा खत्म हो जाएगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि, अगर अमेरिका चाहे तो यह सैन्य कार्रवाई महज 4 घंटे में पूरी हो सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ऐसा नहीं करना चाहता, लेकिन जरूरत पड़ी तो कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा।
ट्रंप ने अपने बयान में एक बार फिर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता जताई। उनका कहना था कि, ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति देना ही असली युद्ध अपराध होगा। उन्होंने उन आलोचनाओं को भी खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि बिजली संयंत्रों या नागरिक ढांचे पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हो सकता है। ट्रंप ने कहा, मुझे इसकी कोई चिंता नहीं है। असली युद्ध अपराध यह होगा कि ईरान को परमाणु हथियार रखने दिया जाए।
मौजूदा विवाद का केंद्र Strait of Hormuz है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। दुनिया के लगभग 20% तेल टैंकर इसी रास्ते से गुजरते हैं। खाड़ी देशों से निकलने वाला अधिकांश तेल इसी मार्ग से वैश्विक बाजारों तक पहुंचता है। इस मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट से वैश्विक तेल कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। ट्रंप का कहना है कि, ईरान को यह रास्ता तुरंत खोलना होगा ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित न हो।
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ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक और विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर उनकी इच्छा चले तो वे ईरान के तेल भंडारों को जब्त कर लेंगे। उन्होंने कहा, अगर हम तेल ले लें तो हम बहुत पैसा कमा सकते हैं और ईरान के लोगों की भी मदद कर सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में इस बयान को लेकर काफी चर्चा हो रही है क्योंकि किसी देश के प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जे की बात करना उसकी संप्रभुता का उल्लंघन माना जाता है।
ट्रंप की चेतावनी के बाद ईरान की ओर से भी सख्त प्रतिक्रिया आई है। ईरानी नेतृत्व ने साफ कहा है कि वे दबाव में आकर कोई फैसला नहीं करेंगे। ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अपने संदेश में कहा कि, सैन्य हमले या लक्षित हत्याएं ईरान की ताकत को कमजोर नहीं कर सकतीं। उन्होंने कहा कि, ईरान के सशस्त्र बल किसी भी परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं और देश अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता से समझौता नहीं करेगा।
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ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिब (Mohammad Bagher Ghalibaf) के एक शीर्ष सलाहकार मेहदी मोहम्मदी ने भी सोशल मीडिया पर ट्रंप को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने लिखा कि, ट्रंप के पास लगभग 20 घंटे बचे हैं और उन्हें फैसला करना होगा। उनका कहना था, हम पीछे नहीं हटेंगे। अगर दबाव बनाया गया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। ईरान का दावा है कि, वह इस संघर्ष में मजबूत स्थिति में है और दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेनाओं का सामना करने में सक्षम है।
ईरान ने साफ किया है कि वह केवल अस्थायी सीजफायर नहीं चाहता, बल्कि स्थायी समाधान चाहता है।
ईरान की प्रमुख मांगें हैं-
ईरानी नेतृत्व का कहना है कि, केवल युद्धविराम से समस्या हल नहीं होगी क्योंकि इससे विरोधी पक्ष फिर से युद्ध की तैयारी कर सकता है।
ट्रंप के बयान पर अमेरिका के भीतर भी विरोध शुरू हो गया है। डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद क्रिस मर्फी ने ट्रंप की टिप्पणी को बेहद खतरनाक बताया है। उन्होंने कहा कि, नागरिक सुविधाओं जैसे बिजली संयंत्र और पुलों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध माना जा सकता है।
मर्फी ने कहा, यह उनके पूरे कार्यकाल का सबसे चौंकाने वाला बयान है। इससे हजारों निर्दोष लोग मारे जा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि, ट्रंप के सहयोगियों को उन्हें ऐसे कदम उठाने से रोकना चाहिए।
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मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। आज सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव पर मतदान होना है, जिसमें ईरान से समुद्री मार्गों को खुला रखने और वाणिज्यिक जहाजों पर हमले रोकने की अपील की गई है। पहले खाड़ी देशों ने एक सख्त प्रस्ताव पेश किया था जिसमें होर्मुज खोलने के लिए सैन्य बल के इस्तेमाल की अनुमति देने की बात कही गई थी, लेकिन वीटो की आशंका के कारण उसे नरम कर दिया गया। नए प्रस्ताव में देशों से कहा गया है कि, वे रक्षात्मक तरीके से मिलकर जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर समझौता नहीं हुआ तो यह विवाद बड़े सैन्य संघर्ष में बदल सकता है।
इसके संभावित असर-
दुनिया के कई देश इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं क्योंकि होर्मुज मार्ग बंद होने से ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है।