तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने साफ कहा है कि हालात कभी भी बिगड़ सकते हैं और सेना पूरी तरह तैयार है। शनिवार रात दिए बयान में गालिबाफ ने चेतावनी दी कि यदि ईरानी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से नहीं गुजर पाए, तो किसी अन्य देश के जहाजों को भी वहां से गुजरने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने अमेरिकी नाकेबंदी को “गलत और लापरवाह” बताते हुए कहा कि इससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ रही है।
गालिबाफ ने यह भी कहा कि होर्मुज में माइन-क्लियरिंग जैसी किसी भी सैन्य कार्रवाई को सीजफायर का उल्लंघन माना जाएगा और इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन इसे उसकी कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए।
पिछले 24 घंटों में हालात और बिगड़े हैं। ईरान ने होर्मुज में दो भारतीय जहाजों पर फायरिंग की, जबकि कुल 14 जहाजों को रोका गया। इनमें से 13 जहाजों को वापस लौटना पड़ा। भारत ने इस घटना पर कड़ा विरोध जताते हुए ईरानी राजदूत को तलब किया है।
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इसी बीच, ईरान ने एक बार फिर होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है। वहीं अमेरिका ने सप्लाई संकट को देखते हुए अपने आपातकालीन भंडार से 2.6 करोड़ बैरल तेल जारी किया है।
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दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए बातचीत के प्रयास जारी हैं। पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक और दौर की बातचीत सोमवार को हो सकती है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फरवरी से अप्रैल तक की घटनाओं पर नजर डालें तो कई बार बातचीत शुरू और बंद हुई है। डोनाल्ड ट्रम्प ने भी सख्त बयान देते हुए ईरान पर दबाव बनाया है।
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दूसरी ओर, लेबनान में UN शांति सैनिकों पर हुए हमले ने अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी है। कुवैत ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। UNIFIL के तहत तैनात एक फ्रांस के सैनिक की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हुए हैं। कुवैत ने दोषियों को सजा देने की मांग की है और क्षेत्र में शांति बनाए रखने के प्रयासों का समर्थन किया है।