ईरान और US के बीच चल रही बातचीत का पहला दौर बेनतीजा रहा। तो वहीं सोमवार को होने वाली दूसरे दौर की वार्ता से शांति की उम्मीद थी, लेकिन 19 अप्रैल की रात हालात अचानक बदल गए। ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नाकेबंदी को पार करने को कोशिश कर रहे एक ईरानी झांडे वाले कार्गो जहाज को कब्जे में ले लिया है। दोनों देश अपनी-अपनी ताकत दिखा रहे हैं और हालात हर पल गंभीर होते जा रहे हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी नेवी ने ईरान के झंडे वाले एक कार्गो जहाज TOUSKA को रोक लिया। अमेरिकी दावा है कि यह शिप उनकी नाकाबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहा था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इस कार्रवाई की जानकारी दी और कहा कि जहाज को कई बार चेतावनी दी गई थी, लेकिन वह नहीं रुका।
यह भी पढ़ें: पाकिस्तान में हाई अलर्ट! दूसरे दौर की वार्ता से पहले ट्रंप की ईरान को धमकी
अमेरिकी युद्धपोत USS Spruance ने जहाज को रोकने के लिए उसके इंजन को निशाना बनाया। जैसे ही जहाज की रफ्तार रुकी, अमेरिकी मरीन उस पर चढ़ गए और उसे अपने कब्जे में ले लिया। अब इस जहाज में क्या सामान था, इसकी जांच की जा रही है।
इस घटना का वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में जहाज में आग लगती हुई दिख रही है और काला धुआं आसमान में उठ रहा है। रात के अंधेरे में यह मंजर और भी डरावना लग रहा है। इस वीडियो ने पूरी दुनिया का ध्यान इस इलाके की ओर खींच लिया है।
इस कार्रवाई के बाद ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरान ने कहा है कि वह कभी सरेंडर नहीं करेगा और होर्मुज पर अपना नियंत्रण नहीं छोड़ेगा। ईरान ने अमेरिका के इस कदम को गैरकानूनी बताया और इसे समुद्री डकैती जैसा कदम कहा है। साथ ही, जल्द जवाबी कार्रवाई करने की भी बात कही गई है।
ईरान की मीडिया ने दावा किया है कि इस घटना के बाद उनकी सैन्य कार्रवाई से अमेरिकी सेना को पीछे हटना पड़ा। हालांकि, इस दावे की पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल दोनों देशों के अपने-अपने दावे हैं और सच क्या है, यह साफ नहीं है।
यह भी पढ़ें: ट्रंप की ईरान को खुली धमकी : समझौता नहीं तो अमेरिका वो करेगा जो 47 साल में नहीं हुआ, अंजाम के लिए तैयार रहे
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है। यहां से बड़ी मात्रा में तेल की सप्लाई होती है। अगर यहां कोई भी तनाव बढ़ता है, तो इसका असर सीधे तेल की कीमतों और पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। यही वजह है कि इस इलाके में हर हलचल पर दुनिया की नजर रहती है।
इस हमले के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता को लेकर भी असमंजस बना हुआ है। कुछ खबरें कहती हैं कि बातचीत से नई दिशा तय हो सकती है, लेकिन ईरान का कहना है कि जब तक दबाव कम नहीं होगा, वह बातचीत नहीं करेगा।