इस्लामाबाद। दुनिया की नजर एक बार फिर मिडिल ईस्ट पर टिक गई है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। सोमवार को दोनों देशों के बीच शांति और समझौते को लेकर दूसरे दौर की बातचीत पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने जा रही है। इस बातचीत को लेकर पाकिस्तान ने राजधानी और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बहुत कड़ी कर दी है। हजारों पुलिसकर्मी और सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो।
इस पूरे मामले में पाकिस्तान एक तरह से मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कई देशों से बातचीत की, सेना प्रमुख ने भी ईरान का दौरा किया, कोशिश है कि किसी तरह शांति समझौता हो जाए पाकिस्तान चाहता है कि यह वार्ता सफल हो ताकि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे।
बातचीत से पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच रहा है और बातचीत जल्द शुरू होगी।
यह भी पढ़ें: अमेरिका में मास शूटिंग का कहर: 1 साल के बच्चे समेत 8 मासूमों की मौत, पूरे देश में आक्रोश
ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी कि अगर ईरान अमेरिका की शर्तें नहीं मानता है, तो उसके बुनियादी ढांचे जैसे बिजली और पुलों को गंभीर नुकसान हो सकता है। उनके इस बयान से माहौल और तनावपूर्ण हो गया है।
जानकारी के मुताबिक ईरान ने अमेरिका की मांगों के कारण इस्लामाबाद में होने वाले शांति वार्ता के दूसरे दौर में शामिल होने से साफ मना कर दिया है। ईरान के मुताबिक, अमेरिका बार-बार अपना रुख बदल रहा है और अलग-अलग बयान दे रहा है, जिससे स्थिति और बिगड़ रही है।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक नया विवाद सामने आया है। होर्मुज में अमेरिका ने ईरान का झंडा लगे एक कार्गो जहाज को जब्त कर लिया। इसके बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से बात की।
रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका की धमकी भरी कार्रवाइयों से उस पर भरोसा करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि अमेरिका अपने पुराने तरीके दोहरा सकता है और समझौते में धोखा भी दे सकता है।
इससे पहले दोनों देशों के बीच इस्लामाबाद में पहली बातचीत हुई थी, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। बातचीत का मकसद तनाव कम करना और किसी समझौते तक पहुंचना था, लेकिन दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े रहे। अब एक बार फिर कोशिश की जा रही है कि इस दूसरे दौर की बातचीत से कोई समाधान निकल सके।
अगर इस बार भी बातचीत सफल नहीं होती है, तो स्थिति और खराब हो सकती है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ सकता है और टकराव की स्थिति बन सकती है। तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और दुनिया भर में सप्लाई पर असर पड़ सकता है।
ये भी पढ़ें: ट्रंप की ईरान को खुली धमकी : समझौता नहीं तो अमेरिका वो करेगा जो 47 साल में नहीं हुआ, अंजाम के लिए तैयार रहे
भारत के लिए यह मुद्दा बहुत महत्वपूर्ण है भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अगर होर्मुज में तनाव बढ़ता है तो तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं, आयात महंगा हो जाएगा, लॉजिस्टिक्स कॉस्ट बढ़ेगा।