PlayBreaking News

मौलवी, सैनिक और रणनीतिकार…कौन हैं मोजतबा खामेनेई? जिनके हाथ में जा सकती है ईरान की कमान

अमेरिका और इजराइल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत ने दुनिया को झकझोर दिया। उनके बेटे मुजतबा खामेनेई अब उत्तराधिकारी बनने के लिए सबसे मजबूत दावेदार हैं। पढ़ें उनके जीवन, राजनीतिक सफर और ईरान की भविष्य की दिशा के बारे में पूरी खबर।
Follow on Google News
कौन हैं मोजतबा खामेनेई? जिनके हाथ में जा सकती है ईरान की कमान
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    तेहरान। शनिवार की सुबह मिडिल ईस्ट के लिए एक बड़ा झटका लेकर आई। अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत ने न केवल ईरान बल्कि पूरी दुनिया के शक्ति समीकरण को हिलाकर रख दिया। इसके बाद से सवाल उठ रहे हैं कि, अब ईरान में सत्ता की बागडोर किसके हाथ में जाएगी।

    बेटे मुजतबा खामेनेई बनेंगे सुप्रीम लीडर?

    ईरान में सुप्रीम लीडर या ‘रहबर’ का पद राष्ट्रपति से भी ज्यादा ताकतवर माना जाता है। रहबर के पास देश की सरकार, सेना, विदेश नीति और समाज पर अंतिम नियंत्रण होता है। उनके फैसले राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तर पर निर्णायक होते हैं।

    खबरों के अनुसार, अली खामेनेई ने बीमारी के दौरान अपने दूसरे बेटे मुजतबा खामेनेई को उत्तराधिकारी बनाने की तैयारी कर ली थी। 2024 में उनके द्वारा गोपनीय रूप से असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स को बुलाकर मुजतबा की तरफ झुकाव दिखाने के बाद अब उनके सार्वजनिक रूप से पद संभालने की संभावना बढ़ गई है।

    मुजतबा खामेनेई के बारे में जानें?

    मुजतबा हुसैनी खामेनेई का जन्म 8 सितंबर 1969 को ईरान के मशहद में हुआ था। वे अली खामेनेई के दूसरे बेटे हैं। उन्होंने धार्मिक शिक्षा ग्रहण की और मौलवी बने। इसके बाद उन्होंने कुम सेमिनरी में इस्लामिक धर्मशास्त्र पढ़ाया, जहां उन्होंने धार्मिक शिक्षक के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई। उनका व्यक्तित्व काफी रहस्यमयी है और वे सार्वजनिक भाषण बहुत कम देते हैं।

    सैन्य और IRGC अनुभव

    मुजतबा खामेनेई ने 1987 में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) में शामिल होकर ईरान-इराक युद्ध के दौरान सेवाएं दीं। इस दौरान उन्होंने सेना और सिक्योरिटी सिस्टम के अंदर मजबूत संपर्क बनाए। समय के साथ उनके संबंध सैन्य अधिकारियों के साथ-साथ धार्मिक और राजनीतिक नेताओं तक भी फैल गए। 2000 के दशक की शुरुआत तक उनका नेटवर्क काफी प्रभावशाली हो चुका था, जिसने उन्हें ईरान की सत्ता व्यवस्था के सबसे मजबूत और प्रभावशाली दावेदारों में शामिल कर दिया।

    यह भी पढ़ें: 'तेरा खून रंग लाएगा'! खामेनेई की मौत पर लखनऊ से श्रीनगर तक गूंजे नारे

    राजनीतिक और पारिवारिक कनेक्शन

    मुजतबा खामेनेई की शादी जहरा हद्दाद-आदेल से हुई, जो ईरान के पूर्व संसद अध्यक्ष के परिवार से ताल्लुक रखती हैं। यह विवाह उनके राजनीतिक कनेक्शन को और मजबूत करता है। इस दंपति के तीन बच्चे हैं, जो भविष्य में भी ईरान की राजनीति से जुड़े रहने की संभावना रखते हैं।

    मुजतबा की राजनीतिक गतिविधियां और विवाद

    मुजतबा खामेनेई ने कभी भी किसी सरकारी पद को संभाला नहीं, लेकिन उनकी राजनीतिक भागीदारी लगातार बढ़ती रही है। 2005 और 2009 के राष्ट्रपति चुनावों में उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद का समर्थन किया। 2009 में हुए विरोध प्रदर्शन, जिन्हें बाद में ग्रीन मूवमेंट कहा गया, को दबाने में उनकी अहम भूमिका रही। आलोचक उन पर सरकारी धन के दुरुपयोग और सत्ता के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाते हैं। मुजतबा सार्वजनिक रूप से बहुत कम भाषण देते हैं, लेकिन कहा जाता है कि वे ईरान की खुफिया और सरकारी एजेंसियों में अपने समर्थकों के माध्यम से महत्वपूर्ण फैसलों पर प्रभाव डालते हैं।

    यह भी पढ़ें: US-Israel Iran Conflict : ईरानी सेना के चीफ-ऑफ-स्टाफ मौसावी की मौत, कराची में अमेरिकी दूतावास पर हमला

    अली खामेनेई का जीवन और सत्ता का सफर

    अली खामेनेई का जन्म 19 अप्रैल 1939, मशहद में हुआ। वे शाह के शासन के खिलाफ विरोध में सक्रिय हुए और 1979 की ईरानी क्रांति में प्रमुख चेहरा बने।

    • 1981 में राष्ट्रपति बने और आठ साल तक इस पद पर रहे।
    • 1989 में रुहोल्लाह खुमैनी की मृत्यु के बाद उन्हें ईरान का सुप्रीम लीडर बनाया गया।
    • उन्होंने 37 साल तक ईरान की सर्वोच्च सत्ता संभाली।

    उनके शासनकाल में ईरान ने न्यूक्लियर प्रोग्राम, बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्ट और क्षेत्रीय प्रभाव को मजबूत किया। समर्थक उन्हें इस्लामी व्यवस्था का मजबूत रक्षक मानते हैं, जबकि आलोचक उन्हें कट्टर और सख्त शासन चलाने का आरोप देते हैं।

    ईरान की राजनीतिक संरचना: पांच सबसे ताकतवर संस्थाएं

    रहबर (Supreme Leader): सरकार, सेना, समाज और विदेश नीति पर अंतिम निर्णय।

    असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स: 88 धर्मगुरु जो रहबर का चुनाव और निगरानी करते हैं।

    राष्ट्रपति: सरकार चलाते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय रहबर का होता है।

    गार्डियन काउंसिल: 6 धर्मगुरु और 6 जज; संसद के कानून रोक सकते हैं।

    संसद: 290 सदस्य; कानून बनाती है और राष्ट्रपति या मंत्रियों पर कार्रवाई कर सकती है।

    अमेरिका और इजराइल के हमले का प्रभाव

    अली खामेनेई की मौत अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले में हुई, जिसका उद्देश्य अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और संभावित खतरे को खत्म करना बताया गया। ईरानी मीडिया ने भी उनके निधन की पुष्टि की है। इस हमले के बाद सात देशों में अमेरिकी ठिकानों पर ईरानी मिसाइल हमले हुए और क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया।

    भविष्य की चुनौतियां और क्षेत्रीय रणनीति

    अगर मुजतबा सुप्रीम लीडर बनते हैं, तो उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा-

    आंतरिक स्थिरता बनाए रखना: विरोधियों और धार्मिक आलोचकों के बीच संतुलन।

    क्षेत्रीय शक्ति प्रबंधन: हिज्बुल्लाह और अन्य शिया गुटों के साथ तालमेल।

    अंतरराष्ट्रीय दबाव: अमेरिका और इजराइल के साथ बढ़ते तनाव का प्रबंधन।

    विरासत संभालना: पिता की धार्मिक और राजनीतिक धरोहर को बनाए रखना।

    यह भी पढ़ें: अमेरिका-इजराइल हमले में ईरानी सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत : बेटी-पोती भी मारी गईं, ईरान में 40 दिनों के शोक का ऐलान

    ईरान और इजराइल के टकराव के मुख्य मुद्दे

    न्यूक्लियर प्रोग्राम: अमेरिका का शक कि ईरान हथियार विकसित कर सकता है।

    बैलिस्टिक मिसाइल: ईरान इसे अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक मानता है।

    इजराइल विरोध: ईरान इजराइल का खुलकर विरोध करता है।

    मिडिल ईस्ट में प्रभाव: इराक, सीरिया, लेबनान और यमन में समर्थक गुटों को मदद।

    आर्थिक पाबंदियां: अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पर असर।

    मुजतबा की वैश्विक और घरेलू भूमिका

    • मुजतबा खामेनेई को केवल धार्मिक नेता नहीं बल्कि राजनीतिक और सैन्य रणनीतिज्ञ भी माना जाता है।
    • उनके नेतृत्व में ईरान की विदेश नीति और क्षेत्रीय रणनीति में बदलाव आ सकता है।
    • उनका दृष्टिकोण अमेरिका और इजराइल के साथ तनाव को नियंत्रित करने पर केंद्रित होगा।
    • उनके लिए आंतरिक और बाहरी दोनों प्रकार के दबाव सबसे बड़ी चुनौती हैं।
    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

    नई दिल्ली
    --°
    बारिश: -- mmह्यूमिडिटी: --%हवा: --
    Source:AccuWeather
    icon

    Latest Posts