स्मार्ट गांव पड़रिया थोवन : दमोह का छोटा सा गांव बन गया खास... साफ-सफाई, होम-स्टे मॉडल देखने पहुंच रहे लोग

दमोह जिले का छोटा गांव पड़रिया थोवन मप्र के स्मार्ट गांव के मॉडल के रूप पहचाने जाने लगा है। कुछ युवाओं की कोशिशों ने इस गांव की रंगत बदल दी है। इस गांव के फेसबुक पेज पर करीब 13 हजार फॉलोअर्स हैं।
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दमोह का छोटा सा गांव बन गया खास... साफ-सफाई, होम-स्टे मॉडल देखने पहुंच रहे लोग

संजय कुमार तिवारी, जबलपुर। कभी साधारण ग्रामीण बस्ती के रूप में पहचाना जाने वाला पड़रिया थोवन अब पूरे मध्यप्रदेश में स्मार्ट गांव मॉडल के रूप में नई पहचान बना रहा है। दमोह जिले की जबेरा तहसील मुख्यालय से महज तीन किलोमीटर दूर कोरता रोड पर स्थित यह छोटा सा गांव इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर सुर्खियां बटोर रहा है। गांव की साफ-सुथरी सड़कें, दीवारों पर आकर्षक पेंटिंग, हर गली में स्वच्छता का संदेश और आधुनिक सुविधाओं से लैस ग्रामीण परिवेश लोगों को अपनी ओर खींच रहा है।

ग्रामीण खुद करते हैं गांव की साफ-सफाई

करीब 350 आबादी वाले इस गांव में प्रवेश करते ही ऐसा अहसास होता है जैसे किसी मिनी स्मार्ट सिटी में पहुंच गए हों। गांव की गलियों में कहीं भी कचरा दिखाई नहीं देता। हर घर के बाहर डस्टबिन रखे गए हैं और ग्रामीण खुद गांव की साफ-सफाई का जिम्मा संभालते हैं। दीवारों पर लिखे स्वच्छता संदेश और रंग-बिरंगी वॉल पेंटिंग गांव को अलग पहचान देते हैं।

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गांव की हर गतिविधि पर नजर 

पड़रिया थोवन की सबसे खास बात यह है कि यहां आधुनिक तकनीक का भी उपयोग किया गया है। गांव में करीब आठ सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनसे 24 घंटे निगरानी की जाती है। इसके अलावा पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम भी स्थापित किया गया है, जिससे गांव में जरूरी सूचनाएं प्रसारित की जाती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सीसीटीवी कैमरों और सामूहिक निगरानी के कारण गांव में अनुशासन और सुरक्षा दोनों बेहतर हुए हैं। गांव के लोग खुद सुविधाओं की देखरेख करते हैं और प्रतिदिन साफ-सफाई में हिस्सा लेते हैं।

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युवाओं ने बदली गांव की तकदीर

इस बदलाव के पीछे गांव के युवाओं की सोच और मेहनत सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है। विदेशों और बड़े शहरों में रहने वाले गांव के युवाओं ने ‘स्मार्ट गांव फाउंडेशन’ के जरिए अपने गांव को नई पहचान देने का संकल्प लिया। धीरे-धीरे गांव में आधुनिक सुविधाएं जुड़ती गईं और आज यह गांव प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया है। 

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इस तरह हुई गांव को स्मार्ट बनाने की पहल 

  • 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरित होकर अमेरिका निवासी रजनीश वाजपेई और मुंबई निवासी योगेश साहू ने इसे ‘स्मार्ट गांव फाउंडेशन ’से जोड़ा।
  •  दोनों ने फांउडेशन की मदद से गांव में आठ कैमरे, आठ एड्रेसिंग सिस्टम, स्ट्रीट लाइट, सोलर लाइटें लगवाई। 
  • गांव की दीवारों पर पेटिंग और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को पढ़ाने के लिए पाठ्य सामग्री तक उपलब्ध कराई। 
  • गांव के प्राइमरी स्कूल में स्मार्ट टीवी लगाई गई है। यहां पर गांव के एक-एक मकान और उसके लोगों का डेटा वेबसाइट पर उपलब्ध है। यही नहीं गांव का पूरा नक्शा अलग से तैयार करवाया गया है। 
  • गांव के तालाब, गोचर भूमि, कृषि योग्य जमीन, नहर, सड़कें एवं घर किसका है यह सभी जानकारी सिर्फ एक लिंक से प्राप्त की जा सकती है। 
  • हर परिवार का डेटा फीड किया जा रहा है, जो एक क्लिक पर उपलब्ध होगा। दुनिया के किसी भी कोने से गांव के किसी भी व्यक्ति से संपर्क किया जा सकता है। 
  • रजनीश बाजपेई ने बताया उनके दोस्त सत्येंद्र सिंह से गांव के बारे में जानकारी लगी। सेटेलाइट से पूरे गांव की निगरानी की और उसके बाद गांव का रि-डेवलपमेंट प्लान तैयार करवाया। 
  • यहां के पब्लिक एड्रेस सिस्टम की विशेषता यह है कि गांव में हों या कहीं और इंटरनेट के माध्यम से सीधे ग्रामीणों के साथ बातचीत कर सकते हैं। 
  • यहां पर स्मार्ट क्लासरूम सहित अनेक सुविधाएं बहुत ही कम समय में सुनिश्चित हुई हैं। 

सोशल मीडिया पर वायरल

सोशल मीडिया पर गांव की तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद यहां पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आसपास के जिलों के अलावा दूसरे राज्यों से भी लोग इस गांव को देखने पहुंच रहे हैं।

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केंद्रीय मंत्री भी कर चुके हैं सराहना 

गांव की चर्चा उस समय और बढ़ गई जब पूर्व केंद्रीय प्रहलाद सिंह पटेल ने यहां पहुंचकर स्मार्ट गांव मॉडल की लॉन्चिंग की थी। उन्होंने गांव का दौरा कर ग्रामीणों की पहल की सराहना की थी और कहा था कि यह मॉडल दूसरे गांवों के लिए प्रेरणा बनेगा। ग्रामीण अनुज बाजपेई बताते हैं कि पिछले तीन-चार वर्षों में गांव तेजी से बदला है। गांव के लोग खुद प्रतिदिन सफाई करते हैं और सुविधाओं का रखरखाव भी सामूहिक रूप से करते हैं। गांव में शांति और सौहार्द का माहौल है और हर व्यक्ति विकास की जिम्मेदारी महसूस करता है।

हम गांव को देश का आदर्श गांव बनाना चाहते हैं

ग्रामीण अभिषेक जैन कहते हैं कि गांव के युवा लगातार इसे बेहतर बनाने में जुटे हैं। उनका सपना है कि पड़रिया थोवन आने वाले समय में देश के आदर्श गांवों में गिना जाए। 

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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