‘खुदा के खिलाफ जंग’ का आरोप!ईरान में 19 साल के पहलवान समेत 3 लोगों को सजा-ए-मौत

ईरान से आई एक खबर ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। कोम शहर में 19 साल के उभरते पहलवान सालेह मोहम्मदी समेत तीन प्रदर्शनकारियों को सरेआम फांसी दे दी गई। इन पर खुदा के खिलाफ युद्ध और विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा में शामिल होने के आरोप थे।
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ईरान में 19 साल के पहलवान समेत 3 लोगों को सजा-ए-मौत
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    ईरान से एक बेहद गंभीर खबर सामने आई है। कोम शहर में 19 साल के एक उभरते पहलवान समेत तीन लोगों को सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई। इस घटना ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है और मानवाधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फांसी पाने वालों में सालेह मोहम्मदी, मेहदी कासेमी और सईद दावोदी शामिल थे। बताया जा रहा है कि ये तीनों हाल ही में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में आरोपी थे।

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    क्या थे आरोप और सरकार ने क्या कहा?

    ईरान की सरकार के मुताबिक, इन लोगों पर खुदा के खिलाफ युद्ध यानी मोहारेबेह का आरोप लगाया गया था। यह ईरान में एक गंभीर अपराध माना जाता है, जिसकी सजा मौत तक हो सकती है।

    सरकारी एजेंसियों का दावा है कि ये लोग प्रदर्शन के दौरान हिंसा में शामिल थे और पुलिसकर्मियों की हत्या में भी इनका हाथ था। साथ ही उन पर यह भी आरोप लगाया गया कि उन्होंने यूनाइटेड स्टेट्स और इजरायल जैसे देशों का समर्थन किया। सरकार का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाना जरूरी है। 

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    दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। एमनेस्टी इंटरनेशनल और ईरान मानवाधिकार ने आरोप लगाया है कि इन लोगों को निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिली। इन संगठनों का कहना है आरोपियों से जबरन कबूलनामे कराए गए, उन्हें सही कानूनी मदद नहीं दी गई और पूरी प्रक्रिया बहुत जल्दबाजी में पूरी की गई। खासतौर पर 19 साल के सालेह मोहम्मदी को लेकर कहा जा रहा है कि वह एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी थे और उनका भविष्य उज्ज्वल था।

    जनवरी के प्रदर्शन- जहां से शुरू हुई कहानी

    इस पूरे मामले की शुरुआत जनवरी में हुए बड़े प्रदर्शनों से जुड़ी है। शुरुआत में लोग महंगाई और आर्थिक परेशानियों के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे, लेकिन धीरे-धीरे यह विरोध सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन में बदल गया। देशभर में हजारों लोग प्रदर्शन करने लगे।
    रिपोर्ट्स के अनुसार, इन प्रदर्शनों को रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने सख्ती दिखाई, जिसमें बड़ी संख्या में लोग मारे गए और कई गिरफ्तार किए गए।

    डर का माहौल बनाया जा रहा है

    विशेषज्ञों का मानना है कि इन फांसी की सजाओं का मकसद सिर्फ सजा देना नहीं, बल्कि लोगों में डर पैदा करना भी हो सकता है।
    मानवाधिकार समूहों ने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में और भी लोगों को ऐसी सजा दी जा सकती है। उनका कहना है कि इससे समाज में भय का माहौल बन सकता है और विरोध की आवाजों को दबाया जा सकता है।

    अब ईरान पर दुनिया की नजर

    यह घटना सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रही, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बन गई है। दुनिया भर के देश और संगठन अब ईरान की न्याय प्रणाली और मानवाधिकार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

    Garima Vishwakarma
    By Garima Vishwakarma

    गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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