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Rupee Falls:डॉलर के मुकाबले 94.7 पर पहुंचा, 14 साल में सबसे बड़ी गिरावट; महंगाई का दबाव बढ़ा

भारतीय रुपया शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.7 के स्तर पर पहुंच गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है।
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डॉलर के मुकाबले 94.7 पर पहुंचा, 14 साल में सबसे बड़ी गिरावट; महंगाई का दबाव बढ़ा
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AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भारतीय रुपया शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.7 के स्तर पर पहुंच गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और एनर्जी सप्लाई चेन में आई रुकावटों ने रुपए पर भारी दबाव बना दिया है। पिछले एक महीने में ही रुपया करीब 4% टूट चुका है, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक इसमें 10% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। यह पिछले 14 सालों की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है।

    14 साल में सबसे ज्यादा गिरावट

    भारत में वित्त वर्ष अप्रैल से मार्च तक चलता है और मौजूदा डेटा के अनुसार 2011-12 के बाद पहली बार रुपए में इतनी बड़ी गिरावट देखी जा रही है। उस समय यूरोजोन संकट के दौरान करीब 14% गिरावट आई थी। अब एक बार फिर ग्लोबल संकट ने रुपए को कमजोर कर दिया है। खासतौर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और डॉलर की मजबूती इसका बड़ा कारण हैं।

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    गिरते रुपए का सीधा असर आम लोगों पर

    रुपए की कमजोरी का असर सिर्फ बाजार तक सीमित नहीं है बल्कि आम लोगों की जेब पर भी पड़ता है:

    • तेल और गैस महंगी: कच्चे तेल के दाम बढ़ने से भारत का इम्पोर्ट बिल बढ़ गया है
    • जरूरी सामान महंगा: LPG, प्लास्टिक और पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स की कीमतों पर असर
    • महंगाई बढ़ने का खतरा: पेट्रोल-डीजल और इम्पोर्टेड सामान महंगे होंगे
    • विदेश जाना महंगा: पढ़ाई या घूमने के लिए ज्यादा रुपए खर्च करने होंगे
    • इलेक्ट्रॉनिक्स महंगे: मोबाइल, लैपटॉप और अन्य आयातित सामान की कीमतें बढ़ सकती हैं

    क्या रुपया 98 तक जा सकता है?

    ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन की रिपोर्ट के मुताबिक अगर मिडिल ईस्ट का तनाव लंबा चलता है तो रुपए पर और दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में रुपया 98 प्रति डॉलर के स्तर तक भी पहुंच सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि:

    • करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ सकता है
    • महंगाई काबू में रखने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ब्याज दरें बढ़ा सकता है

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    करेंसी कमजोर क्यों होती है?

    जब किसी देश की मुद्रा डॉलर के मुकाबले गिरती है तो उसे करेंसी डेप्रिसिएशन कहा जाता है।

    इसके पीछे कुछ मुख्य कारण होते हैं:

    • विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) में कमी
    • इम्पोर्ट ज्यादा और एक्सपोर्ट कम होना
    • ग्लोबल अनिश्चितता और निवेशकों का भरोसा कमजोर होना

    अगर भारत के पास डॉलर कम होते हैं, तो रुपया कमजोर होता है। वहीं डॉलर रिजर्व बढ़ने पर रुपया मजबूत हो सकता है।

    Sumit Shrivastava
    By Sumit Shrivastava

    मास कम्युनिकेशन में Ph.D और M.Phil पूर्ण की है तथा टीवी और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते ...Read More

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