मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री वाले वीडियो को लेकर सस्पेंड किए गए शिक्षक को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने सस्पेंशन आदेश पर रोक लगाते हुए मामले को दोबारा विचार के लिए संबंधित अधिकारी के पास भेज दिया है।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि केवल सस्पेंड करने का अधिकार होना ही काफी नहीं है, बल्कि उसका इस्तेमाल सोच-समझकर और ठोस आधार पर किया जाना चाहिए। कोर्ट ने माना कि शिकायत मिलते ही तत्काल की गई कार्रवाई से अधिकारी की स्वतंत्र सोच पर सवाल खड़े होते हैं।
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यह मामला शिवपुरी जिले के प्राथमिक शिक्षक साकेत कुमार पुरोहित से जुड़ा है। उन्हें 13 मार्च 2026 को फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट करने के बाद सस्पेंड कर दिया गया था। वीडियो में उन्होंने गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों पर टिप्पणी करते हुए प्रधानमंत्री की मिमिक्री की थी। बीजेपी विधायक प्रीतम लोधी की शिकायत के बाद शिक्षा विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए शिक्षक को सस्पेंड कर बीईओ कार्यालय बदरवास से अटैच कर दिया था।
याचिका में शिक्षक की ओर से कहा गया कि वीडियो में कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं थी और बिना स्वतंत्र जांच के जल्दबाजी में सस्पेंशन का आदेश जारी कर दिया गया। वहीं, शासन की ओर से दलील दी गई कि सस्पेंशन कोई सजा नहीं है, बल्कि जांच को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए एक अंतरिम कदम होता है।
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जस्टिस आशीष श्रोती की एकल पीठ ने कहा कि सस्पेंशन जैसे कदम उठाने में विवेकपूर्ण निर्णय जरूरी है। कोर्ट ने यह भी पाया कि 2005 के शासन निर्देशों का पालन नहीं किया गया। प्रथम दृष्टया आदेश को त्रुटिपूर्ण मानते हुए हाईकोर्ट ने सस्पेंशन पर रोक लगा दी और निर्देश दिया कि सभी तथ्यों और नियमों को ध्यान में रखते हुए नए सिरे से निर्णय लिया जाए।