नई दिल्ली। ईरान में चल रहे संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने स्थिति पर करीबी नजर रखने और संभावित असर से निपटने के लिए तीन सदस्यीय मंत्री समूह का गठन किया है। इस उच्चस्तरीय समिति की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे। सरकार का कहना है कि फिलहाल देश पर इस संकट का कोई बड़ा प्रभाव नहीं दिख रहा है, लेकिन एहतियात के तौर पर पहले से तैयारी की जा रही है।
इस मंत्री समूह में गृह मंत्री अमित शाह के अलावा विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी शामिल हैं। विदेश मंत्रालय कूटनीतिक स्तर पर हालात की समीक्षा करेगा, जबकि पेट्रोलियम मंत्रालय वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करेगा। खास तौर पर रसोई गैस की संभावित कमी या आपूर्ति में बाधा की स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक स्रोतों और आपूर्ति प्रबंधन पर भी विचार किया जा रहा है।
कुछ क्षेत्रों में रसोई गैस सिलेंडरों की कमी की खबरें सामने आई हैं, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि घरेलू उपभोक्ताओं को किसी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए अग्रिम तैयारियां की जा रही हैं।
तेल कंपनियों को पर्याप्त भंडारण बनाए रखने और वितरण व्यवस्था को सुचारु रखने के निर्देश दिए गए हैं। यह मंत्री समूह अन्य संबंधित मंत्रालयों के साथ मिलकर लगातार स्थिति की समीक्षा करेगा, ताकि संकट का देश की ऊर्जा सुरक्षा और आम लोगों की जरूरतों पर कम से कम असर पड़े।
इस बीच भारत के लिए राहत की खबर भी सामने आई है। विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरघची से फोन पर बातचीत की, जिसके बाद ईरान ने भारतीय जहाजों को स्ट्रेट ऑफ हार्मुज से गुजरने की अनुमति दे दी।
बताया जा रहा है कि दो भारतीय जहाज बुधवार रात से गुरुवार सुबह के बीच इस रास्ते से गुजर रहे हैं। युद्ध जैसी स्थिति के कारण कई जहाज वहां फंसे हुए थे और आवाजाही लगभग ठप हो गई थी। इन जहाजों के निकलने से भारत में तेल आपूर्ति को लेकर कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।