Jabalpur News:सौरभ शर्मा की हाईकोर्ट से जमानत अर्जी खारिज, पत्नी की सर्जरी का दिया था हवाला

जबलपुर। मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार सौरभ शर्मा की 60 दिनों की अस्थाई जमानत याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। अदालत ने माना कि पत्नी की बीमारी आपातकालीन नहीं है और उनकी देखभाल के लिए परिवार के अन्य सदस्य मौजूद हैं। मामले में ईडी ने भी आरोपी के दावों का विरोध किया था।
हाईकोर्ट ने अस्थाई जमानत देने से किया इनकार
मामले पर सुरक्षित रखा फैसला सुनाते हुए जस्टिस विशाल मिश्रा की वेकेशन बेंच ने कहा है कि आरोपी की पत्नी की बीमारी में कोई इमरजेंसी नहीं है। अदालत ने यह भी माना कि उनकी देखभाल के लिए परिवार के अन्य सदस्य घर में मौजूद हैं। इसी आधार पर अस्थाई जमानत देने से इनकार कर दिया गया।
मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत दर्ज है मामला
यह मामला प्रवर्तन निदेशालय, भोपाल जोन में दर्ज अपराध से जुड़ा है। आरोपी सौरभ शर्मा के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 की धारा 3 और 4 के तहत गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं। मामले की जांच कई एजेंसियों द्वारा की जा रही है।
छापेमारी में मिला था करोड़ों कैश और 54 किलो सोना
बता दें कि 17 दिसंबर 2024 को सौरभ शर्मा के ठिकानों पर छापेमारी शुरू हुई थी। उसके घर से करोड़ों रुपए कैश और दो क्विंटल चांदी की सिल्लियां भी मिली थीं। इसी तरह उसके दोस्त की कार से 54 किलो सोना और 10 करोड़ रुपए से अधिक कैश बरामद हुआ था। इस मामले में आयकर विभाग, लोकायुक्त, डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस, ईडी और ग्वालियर पुलिस द्वारा जांच की जा रही है।
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जमानत के लिए पत्नी की बीमारी का दिया था हवाला
कुल दो मामलों में 10 फरवरी 2025 को हुई गिरफ्तारी के बाद जमानत के लिए यह अर्जी हाईकोर्ट में दाखिल की गई थी। 27 सितंबर 2025 को जमानत अर्जी खारिज होने के बाद सौरभ शर्मा ने दूसरी अर्जी दाखिल करके अपनी पत्नी दिव्या तिवारी का इलाज कराने हाईकोर्ट से अस्थाई जमानत मांगी थी। सौरभ का दावा था कि था कि उसकी पत्नी दिव्या तिवारी क्रॉनिक राइनोसिनुसाइटिस और माइग्रेन से पीड़ित हैं। उन्हें साइनस के ऑपरेशन की सलाह दी गई है और घर पर देखभाल के लिए उनके अलावा कोई अन्य जिम्मेदार सदस्य नहीं है।
ईडी ने अदालत में किया दावों का विरोध
मामले पर हुई सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से अधिवक्ता विक्रम सिंह ने आरोपी के दावों का कड़ा विरोध किया। अदालत के निर्देश पर पेश की गई मेडिकल स्टेटस रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि पत्नी की बीमारी कोई जानलेवा या आपातकालीन स्थिति नहीं है। साथ ही जांच में यह भी सामने आया कि परिवार के अन्य सदस्य देखभाल के लिए मौजूद हैं।












